विज्ञापन • ADVERTISEMENT
होम/राजनीति/ममदानी की जीत से बदली यूरोप की राजनीति, बर्लिन में वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को बनाया सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा
राजनीतिपढ़ने में समय: 4 मिनट

ममदानी की जीत से बदली यूरोप की राजनीति, बर्लिन में वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को बनाया सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा

यूरोप की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ममदानी की हालिया जीत के बाद वहां की वामपंथी पार्टियों ने आम जनता के सबसे बड़े दर्द यानी सस्ते घर और कम किराए के मुद्दे को अपनी चुनावी रणनीति के केंद्र में रख लिया है। बर्लिन से लेकर जर्मनी के कई बड़े शहरों में इस बात को लेकर नई बहस छिड़ गई है कि कैसे महंगे मकानों और बढ़ते किराए से परेशान जनता को राहत दी जाए।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•7 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•31
🌐Read in English →
शेयर करें:
ममदानी की जीत से बदली यूरोप की राजनीति, बर्लिन में वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को बनाया सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा
📷 ममदानी की जीत से बदली यूरोप की राजनीति, बर्लिन में वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को बनाया सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • यूरोप की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ममदानी की हालिया जीत के बाद वहां की वामपंथी पार्टियों ने आम जनता के सबसे बड़े दर्द यानी सस्ते घर और कम किराए के मुद्दे को अपनी चुनावी रणनीति के केंद्र में रख लिया है। बर्लिन से लेकर जर्मनी के कई बड़े शहरों में इस बात को लेकर नई बहस छिड़ गई है कि कैसे महंगे मकानों और बढ़ते किराए से परेशान जनता को राहत दी जाए।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

बर्लिन/नई दिल्ली — द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप की राजनीति इस समय एक नए और बेहद अहम मोड़ पर खड़ी है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की चुनावी हवा अब यूरोपीय देशों की जमीन पर भी साफ असर दिखा रही है। हाल ही में ममदानी की बड़ी जीत ने यूरोपीय राजनीति के समीकरण पूरी तरह से हिला दिए हैं। इस जीत से सबक लेते हुए वहां की वामपंथी और विपक्षी पार्टियों ने आम आदमी से जुड़े सबसे बड़े मुद्दे को लपक लिया है। अब बर्लिन और जर्मनी के दूसरे बड़े शहरों में सस्ते घर और कम किराए की मांग सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बन गई है।

शहरी इलाकों में रहने वाले आम लोग इन दिनों महंगे घरों और आसमान छूते किराए के बोझ तले दबे हुए हैं। मकान मालिकों की मनमानी और रियल एस्टेट कंपनियों के बढ़ते दखल ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। इसी नाराजगी को पहचानते हुए वामपंथी दलों ने इसे अपनी सियासी जमीन मजबूत करने का सबसे सही मौका माना है। बर्लिन की सड़कों से लेकर राजनीतिक मंचों तक अब सिर्फ एक ही नारा गूंज रहा है, हर परिवार को सस्ता घर और तय सीमा के अंदर ही किराया। इस मुद्दे ने वहां की सत्ताधारी पार्टियों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है क्योंकि आम मतदाता अब सीधे तौर पर इसी वादे पर वोट करने का मन बना रहा है।

बर्लिन में कैसे पलटी बाजी और क्यों गरमाया हाउसिंग क्राइसिस?

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हालात पिछले कुछ सालों से काफी सुलग रहे थे। यहां घरों की कमी और किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण आम नागरिकों का जीना मुहाल हो चुका था। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग अपनी आधी से ज्यादा कमाई सिर्फ मकान का किराया चुकाने में गंवा रहे थे। ऐसे में जब ममदानी की चुनावी जीत का असर यूरोप पहुंचा, तो स्थानीय राजनीतिक दलों को एक साफ रास्ता मिल गया। उन्होंने जनता के बीच जाकर सीधे तौर पर वादा किया कि वे सरकार बनने पर मकानों के किराए पर सख्त लगाम लगाएंगे। इस रणनीति का असर यह हुआ कि बर्लिन के स्थानीय चुनावों में वामपंथी दलों को ऐतिहासिक बढ़त और समर्थन मिलना शुरू हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय राजनीति का यह नया रुख सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहने वाला है। फ्रांस, नीदरलैंड्स और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में भी अब किराए और मकानों के दाम को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। वहां के राजनीतिक दल भी समझ चुके हैं कि अगर आम जनता को महंगाई और आवास संकट से राहत नहीं दी गई, तो उन्हें चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वामपंथी दलों की यह रणनीति अब इतनी असरदार साबित हो रही है कि पारंपरिक दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी दल भी इस पर बात करने के लिए मजबूर हो गए हैं। उन्हें अपनी नीतियां बदलकर गरीबों और किराएदारों के पक्ष में कुछ बड़े ऐलान करने पड़ रहे हैं।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

जर्मनी में वामपंथी दलों की जीत से नीतिगत बदलाव के संकेत

जर्मनी की जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो पता चलता है कि यह बदलाव रातों-रात नहीं आया है। पिछले कई महीनों से वहां की जनता लगातार प्रदर्शन कर रही थी कि बड़े घर मालिकों और कंपनियों पर लगाम लगाई जाए। सरकार की पुरानी नीतियां सिर्फ बड़े निवेशकों और रियल एस्टेट कारोबारियों को फायदा पहुंचा रही थीं, जबकि आम आदमी बेघर होने की कगार पर पहुंच रहा था। अब राजनीतिक दलों ने जनता की इस नब्ज को पहचान लिया है। चुनावी मंचों से यह साफ कहा जा रहा है कि शहर सबके हैं और यहां रहने का अधिकार हर नागरिक को वाजिब दाम पर मिलना ही चाहिए।

द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि आने वाले दिनों में यूरोप के कई अन्य देशों में भी चुनाव होने हैं। इन चुनावों में भी 'सस्ते घर और कम किराए' का मुद्दा सबसे ऊपर रहने की पूरी उम्मीद है। जिन पार्टियों ने इस मुद्दे को नजरअंदाज किया, उन्हें चुनावी मैदान में बड़ा झटका लग सकता है। जर्मनी और बर्लिन की इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक राजनीति में अब भाषणों से ज्यादा आम आदमी की बुनियादी जरूरतें मायने रखती हैं। जब तक सरकारों और राजनीतिक दलों को जनता के असली दर्द का अहसास नहीं होगा, तब तक सत्ता की चाबी उन्हीं के हाथ में जाएगी जो उनके घर और चूल्हे की बात करेगा।

संबंधित खबरें

इजराइल में 20 दिन बाद वोटिंग, नेतन्याहू हार सकते हैं: हमास हमले ने बदली देश की राजनीति; वामपंथ कमजोर, अरब प...

इजराइल में 20 दिन बाद वोटिंग, नेतन्याहू हार सकते हैं: हमास हमले ने बदली देश की राजनीति; वामपंथ कमजोर, अरब प...

राजनीति के गलियारों में फिर क्यों गूंजा मिथुन चक्रवर्ती का नाम, जानिए ताजा अपडेट

राजनीति के गलियारों में फिर क्यों गूंजा मिथुन चक्रवर्ती का नाम, जानिए ताजा अपडेट

राजनीति के गलियारों में क्यों गूंज रहा है मिथुन चक्रवर्ती का नाम?

राजनीति के गलियारों में क्यों गूंज रहा है मिथुन चक्रवर्ती का नाम?

तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल और चुनाव से पहले चर्चा में नािल

तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल और चुनाव से पहले चर्चा में नािल

कोबरा हूं, पीछे नहीं हटूंगा: मिथुन चक्रवर्ती के तीखे तेवर और बंगाल की राजनीति में हलचल

कोबरा हूं, पीछे नहीं हटूंगा: मिथुन चक्रवर्ती के तीखे तेवर और बंगाल की राजनीति में हलचल

तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा में क्यों छाए हैं नािल संपत?

तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा में क्यों छाए हैं नािल संपत?

कोबरा वाले बयान पर कायम, स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक जंग के बीच चर्चा में मिथुन चक्रवर्ती

कोबरा वाले बयान पर कायम, स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक जंग के बीच चर्चा में मिथुन चक्रवर्ती

इजराइल में 20 दिन बाद होने वाले चुनाव से बदल सकती है बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक तकदीर

इजराइल में 20 दिन बाद होने वाले चुनाव से बदल सकती है बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक तकदीर

प्रायोजित • SPONSORED
द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

❤️
100% पाठक समर्थित मीडिया

निष्पक्ष व निडर पत्रकारिता को आपका साथ चाहिए

द फ्रीलांस बिना किसी कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव के जनसरोकार की खबरें आप तक पहुँचाता है। आपका छोटा सा योगदान भी हमारी स्वतंत्रता की ताकत है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित विजुअल स्टोरीज (Web Stories)

TAP TO VIEW

‘ममदानी’ व राजनीति से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें

इजराइल में 20 दिन बाद वोटिंग, नेतन्याहू हार सकते हैं: हमास हमले ने बदली देश की राजनीति; वामपंथ कमजोर, अरब प...POLITICS

इजराइल में 20 दिन बाद वोटिंग, नेतन्याहू हार सकते हैं: हमास हमले ने बदली देश की राजनीति; वामपंथ कमजोर, अरब प...

8 अक्टू॰40
राजनीति के गलियारों में फिर क्यों गूंजा मिथुन चक्रवर्ती का नाम, जानिए ताजा अपडेटPOLITICS

राजनीति के गलियारों में फिर क्यों गूंजा मिथुन चक्रवर्ती का नाम, जानिए ताजा अपडेट

7 अक्टू॰41
राजनीति के गलियारों में क्यों गूंज रहा है मिथुन चक्रवर्ती का नाम?POLITICS

राजनीति के गलियारों में क्यों गूंज रहा है मिथुन चक्रवर्ती का नाम?

7 अक्टू॰36
तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल और चुनाव से पहले चर्चा में नािलPOLITICS

तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल और चुनाव से पहले चर्चा में नािल

8 अक्टू॰25
कोबरा हूं, पीछे नहीं हटूंगा: मिथुन चक्रवर्ती के तीखे तेवर और बंगाल की राजनीति में हलचलPOLITICS

कोबरा हूं, पीछे नहीं हटूंगा: मिथुन चक्रवर्ती के तीखे तेवर और बंगाल की राजनीति में हलचल

8 अक्टू॰49
तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा में क्यों छाए हैं नािल संपत?POLITICS

तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा में क्यों छाए हैं नािल संपत?

7 अक्टू॰33
कोबरा वाले बयान पर कायम, स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक जंग के बीच चर्चा में मिथुन चक्रवर्तीPOLITICS

कोबरा वाले बयान पर कायम, स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक जंग के बीच चर्चा में मिथुन चक्रवर्ती

7 अक्टू॰38
इजराइल में 20 दिन बाद होने वाले चुनाव से बदल सकती है बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक तकदीरPOLITICS

इजराइल में 20 दिन बाद होने वाले चुनाव से बदल सकती है बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक तकदीर

7 अक्टू॰28
विज्ञापन • ADVERTISEMENT