महाराष्ट्र के नासिक शहर से इस वक्त एक बहुत बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। आने वाले कुंभ मेले से ठीक पहले वहां के भूजल में जहरीला क्रोमियम मिल गया है। यह केमिकल सीधे तौर पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। पानी में इस जहर के मिलने से स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों की नींद उड़ गई है। लोग अब पीने के पानी को लेकर काफी डरे हुए हैं और साफ पानी की मांग कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया है। जांच के दौरान पता चला कि कुछ फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल बिना किसी ट्रीटमेंट के जमीन में छोड़ा जा रहा था। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक मुख्य आरोपी फैक्ट्री को सील कर दिया है। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाली 11 अन्य कंपनियों को भी कड़े नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
नासिक के भूजल में कैसे घुला कैंसर वाला जहर?
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि नासिक के औद्योगिक इलाकों में चल रही कुछ फैक्ट्रियां नियमों को ताक पर रख रही थीं। ये कंपनियां जहरीले कचरे को जमीन के अंदर सोखने वाले बोरवेल में डाल रही थीं। इससे धीरे-धीरे यह जहरीला क्रोमियम रिसकर भूजल तक पहुंच गया। भूजल का यह पानी जब आसपास के ट्यूबवेल और हैंडपंपों में पहुंचा तो इस खतरनाक खतरे का खुलासा हुआ। स्थानीय लोगों ने कई बार पानी के रंग बदलने और बदबू आने की शिकायत की थी।
प्रशासन अब इलाके के सभी बोरवेल और कुओं के पानी के सैंपल की लैब में जांच करा रहा है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे फिलहाल उस इलाके का भूजल बिल्कुल न पिएं। सरकार की ओर से प्रभावित बस्तियों में पीने के पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी तैनात कर दी गई हैं ताकि किसी भी नागरिक को बीमारी होने पर तुरंत इलाज मिल सके। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि इन फैक्ट्रियों का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द किया जाए।
कुंभ मेले की तैयारियों पर मंडराया पानी का बड़ा संकट
नासिक में कुछ ही समय में बड़ा कुंभ मेला आयोजित होने वाला है। देश और दुनिया से लाखों श्रद्धालु इस पवित्र आयोजन में शामिल होने के लिए नासिक पहुंचेंगे। ऐसे समय में भूजल का जहरीला होना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। श्रद्धालुओं और स्थानीय आबादी के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करना अब सरकार के लिए सबसे बड़ा काम बन गया है। अधिकारी युद्ध स्तर पर पानी की शुद्धता की जांच कर रहे हैं ताकि मेले के दौरान किसी प्रकार की अनहोनी न हो।
इस बीच, नासिक से मुंबई और चेन्नई तक चल रहे अन्य विकास कार्यों और विरोध प्रदर्शनों के बीच यह पर्यावरण का मुद्दा सबसे ऊपर आ गया है। आदिवासी छात्र और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता भी पानी को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि कंपनियों का मुनाफा कमाने का यह खेल आम जनता की जान से खिलवाड़ कर रहा है। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की ग्राउंड रिपोर्ट आप तक पहुंचाती रहेगी।





