उटी/ग्राउंड ब्यूरो — तमिलनाडु के शांत और खूबसूरत पहाड़ी जिले नीलगिरी में इन दिनों प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही है। केरल राज्य में निपाह वायरस के संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद, नीलगिरी की सीमाओं पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़े पहरे बिठा दिए हैं। केरल से आने वाले हर वाहन और यात्री की कड़ी स्वास्थ्य जांच की जा रही है ताकि संक्रमण को पहाड़ी जिले की सीमा में घुसने से रोका जा सके। जिला प्रशासन ने सभी चेक पोस्ट पर मेडिकल टीमों को चौबीसों घंटे तैनात कर दिया है।
इस बीच मौसम ने भी स्थानीय लोगों और पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नीलगिरी के विभिन्न इलाकों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। (गुडलूर) और देवला जैसे इलाकों में इन दिनों सुबह के वक्त बेहद घना कोहरा छाया रहता है। विजिबिलिटी इतनी कम हो जाती है कि वाहन चालकों को दिन में भी लाइट जलाकर सफर करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले घंटों में जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिसके चलते जिला प्रशासन ने यात्रा करने वालों के लिए विशेष ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।
केरल सीमा पर कड़ी चौकसी और स्वास्थ्य जांच
नीलगिरी जिला स्वास्थ्य विभाग ने केरल से सटे सभी प्रवेश मार्गों पर विशेष चिकित्सा शिविर और जांच केंद्र स्थापित कर दिए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें केरल से आने वाले लोगों के शरीर के तापमान और अन्य लक्षणों की बारीकी से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी राज्य में निपाह वायरस के खतरे को देखते हुए एहतियात बरतना बेहद जरूरी है। स्थानीय अस्पतालों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी संदिग्ध मामले से तुरंत निपटा जा सके। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन पूरी सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
प्रशासन की इन सख्ती के अलावा, पहाड़ी रास्तों पर जंगली हाथियों की आवाजाही ने भी वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। आनकाट्टी और केरल के अन्य रास्तों पर जंगली हाथियों के झुंड को अक्सर सड़कों पर घूमते हुए देखा जा रहा है। वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय ड्राइवरों को चेतावनी दी है कि वे इन जंगलों के रास्तों से गुजरते समय पूरी सतर्कता बरतें और गाड़ी से बाहर न निकलें। हाथियों की हरकतों पर नजर रखने के लिए विशेष गश्ती दल तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
बारिश और कोहरे के बीच आम जनजीवन पर असर
लगातार हो रही बारिश और कोहरे की चादर ने नीलगिरी के जनजीवन को काफी हद तक प्रभावित किया है। चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों को सुबह के वक्त भारी ठंड और बारिश के बीच काम करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क किनारे यात्रा करने वाले पर्यटकों को भी वाहन चलाते समय फिसलन भरी सड़कों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस और परिवहन विभाग ने वाहन चालकों को धीमी गति से गाड़ी चलाने और फॉग लाइट का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
मौसम की इस मार के साथ-साथ राज्य में चल रही राजनीतिक हलचल और प्रशासनिक नियुक्तियों से जुड़ी खबरें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। टीएनपीएससी (TNPSC) की आगामी परीक्षाओं और उपचुनावों की तैयारियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सरगर्मी तेज है। लेकिन फिलहाल आम लोगों का पूरा ध्यान स्वास्थ्य सुरक्षा और मौसम की अनिश्चितताओं से निपटने पर केंद्रित है। जिला प्रशासन ने लोगों को आश्वासन दिया है कि सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
वन्यजीवों की आवाजाही और प्रशासनिक तैयारियां
नीलगिरी के जंगलों में मौसम बदलने के साथ ही वन्यजीवों का व्यवहार भी बदल रहा है। खाने और पानी की तलाश में हाथियों के झुंड अक्सर रिहाइशी इलाकों और मुख्य सड़कों के करीब आ जाते हैं। वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और चालकों को लाउडस्पीकर के जरिए सचेत किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे वन क्षेत्र में प्लास्टिक या कचरा न फेंका करें ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कुल मिलाकर, नीलगिरी जिला इस समय एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है। एक तरफ जहां निपाह वायरस के खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत की गई है, वहीं दूसरी तरफ भारी बारिश, कोहरे और जंगली जानवरों की आवाजाही से जुड़ी चुनौतियों का भी डटकर सामना किया जा रहा है। द फ्रीलान्स की टीम जमीनी हालात पर लगातार नजर बनाए रखेगी और हर नए अपडेट से अपने पाठकों को अवगत कराती रहेगी।



