नई दिल्ली से ग्राउंड जीरो तक, देश के करोड़ों अन्नदाताओं की निगाहें इस समय प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) की अगली यानी 24वीं किस्त पर टिकी हुई हैं। जैसे-जैसे इस किस्त के आने की सुगबुगाहट तेज हो रही है, प्रशासनिक स्तर पर भी नियमों में बड़े फेरबदल देखने को मिल रहे हैं। द फ्रीलान्स की विशेष जमीनी पड़ताल के मुताबिक, इस बार की किस्त से पहले सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने और अपात्रों को बाहर करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं।
चार बड़े बदलाव और किसानों की चिंताएं
दैनिक जागरण और हिंदुस्तान जैसे प्रमुख मीडिया स्रोतों से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 24वीं किस्त जारी होने से ठीक पहले चार बड़े तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय सहायता केवल जरूरतमंद और असली किसानों तक ही पहुंचे। हालांकि, इन नए नियमों के चलते कई इलाकों के किसानों के मन में असमंजस की स्थिति भी पैदा हो गई है कि क्या इस बार उनके खाते में तयशुदा दो-दो हजार रुपये समय पर पहुंचेंगे या नहीं।
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किन किसानों की अटक सकती है किस्त?
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन किसानों ने अभी तक ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी नहीं कराई है या जिनके भूलेख सत्यापन (Land Verification) में विसंगतियां पाई गई हैं, उनकी किस्त इस बार अटक सकती है। जमीनी रिपोर्ट बताती है कि कई गांवों में आज भी तकनीकी जागरूकता की कमी के कारण किसान अपने स्टेटस की जांच नहीं कर पा रहे हैं। पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस चेक करना और आधार सीडिंग की प्रक्रिया पूरी करना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
तकनीकी नवाचार और कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका
एक तरफ जहां भारत में सीधे खाते में पैसे ट्रांसफर करने की इस योजना पर चर्चा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलाव भी ध्यान खींच रहे हैं। वियतनाम से सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में वैश्विक स्तर पर 42 'किसानों के लिए वैज्ञानिकों' और 24 'तकनीकी नवाचारों' को सम्मानित किया गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि कृषि में तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समावेश अब दुनिया भर की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। भारत में भी स्मार्ट किसिंग और डिजिटल कृषि मिशन के तहत ऐसे ही नवाचारों की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।
आगे की राह और जमीनी निष्कर्ष
हमारी फील्ड इन्वेस्टिगेशन यह साफ करती है कि भले ही सरकार डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर ग्रामीण भारत को अभी भी तकनीकी साक्षरता की बड़ी जरूरत है। जब तक हर किसान तक स्पष्ट सूचना नहीं पहुंचेगी, तब तक कागजी बदलावों का पूरा लाभ धरातल पर नहीं उतर सकेगा। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए तुरंत अपना स्टेटस ऑनलाइन जांच लें।








