भारतीय सर्राफा बाजार और कमोडिटी एक्सचेंज में इन दिनों सोने और चांदी की चाल पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई हैं। त्योहारी सीजन की आहट के साथ ही आम आदमी के मन में यह सवाल सबसे बड़ा है कि क्या इस बार दिवाली पर सोना खरीदने के लिए लोगों को अपनी जेब और ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। हालांकि गांधी जयंती के अवसर पर घरेलू कमोडिटी बाजार और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के रेट जारी नहीं हुए हैं, लेकिन वैश्विक बाजारों से आ रहे संकेत आने वाले दिनों की तस्वीर को साफ कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के समीकरण इस समय कीमती धातुओं के पक्ष में बनते नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों और मार्केट एनालिस्ट्स का आकलन है कि अगर मौजूदा वैश्विक आर्थिक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले महीनों में सोने के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। केडिया कमोडिटीज के प्रेसीडेंट अजय केडिया का कहना है कि त्योहारी सीजन यानी दिवाली या फिर साल के अंत तक सोना अपने ऐतिहासिक स्तरों को पार करते हुए एक नए मुकाम पर पहुंच सकता है। निवेशकों के लिए इस समय सोना सबसे सुरक्षित विकल्प बना हुआ है, जिसके चलते इसकी मांग में लगातार तेजी देखने को मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने-चांदी की चमक बढ़ी
घरेलू बाजार भले ही अवकाश के चलते शांत रहे हों, लेकिन सिंगापुर और अन्य वैश्विक एक्सचेंजों पर सोने की कीमतों में लगातार हलचल बनी हुई है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, सिंगापुर के बाजार में स्पॉट गोल्ड में बढ़त दर्ज की गई है और यह मजबूत पकड़ बनाए हुए है। इसके साथ ही चांदी की कीमतों में भी तेजी का रुख देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित संपत्तियों की तरफ शिफ्ट हो रहा है, जिसका सीधा फायदा सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को मिल रहा है।
प्लेटिनम और पैलेडियम जैसे अन्य कीमती मेटल्स में भी लिवाली का जोर देखा जा रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले डॉलर स्पॉट इंडेक्स में आई हल्की कमजोरी ने भी सोने की कीमतों को इंटरनेशनल मार्केट में सपोर्ट दिया है। जब-जब डॉलर कमजोर होता है, वैश्विक निवेशकों का रुख सोने की ओर तेजी से बढ़ता है, क्योंकि इसे मुद्रास्फीति और आर्थिक मंदी के खिलाफ सबसे बड़ा सुरक्षा कवच माना जाता है।
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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और फेडरल रिजर्व का रुख
सोने की कीमतों को तय करने में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और फेडरल रिजर्व के फैसलों की भूमिका सबसे अहम होती है। पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में खासी नरमी देखने को मिली है। खासकर 10 साल की अमेरिकी यील्ड में आई गिरावट ने निवेशकों को राहत दी है। इसके पीछे मुख्य वजह यूरोप, खासकर फ्रांस की राजकोषीय स्थिति को लेकर वैश्विक निवेशकों की चिंताएं हैं। जब शेयर बाजारों या सरकारी बॉन्ड में जोखिम बढ़ता है, तो निवेशक अपना पैसा निकालकर सोने में निवेश करना सुरक्षित समझते हैं।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के हालिया बयानों ने भी ब्याज दरों को लेकर स्थिति बदल दी है। फेडरल रिजर्व के वाइस चेयरमैन फिलिप जेफरसन ने संकेत दिया है कि ब्याज दरों पर अगला कदम उठाने से पहले केंद्रीय बैंक को आर्थिक आंकड़ों का और बारीकी से आकलन करने की जरूरत है। इस बयान के बाद बाजार में यह उम्मीदें कम हो गई हैं कि दरों में तुरंत कोई बड़ी बढ़ोतरी की जाएगी। ट्रेडर्स अब अक्टूबर या आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बदलाव को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
मध्य पूर्व का तनाव और तेल की कीमतों का असर
कीमती धातुओं में तेजी की एक और बड़ी वजह दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव हैं। खासकर मिडिल ईस्ट में सुलग रही संघर्ष की आग ने एनर्जी सप्लाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका के चलते कच्चे तेल और ऊर्जा के दामों में स्थिरता बनी हुई है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति का खतरा अभी टला नहीं है।
"वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण इस साल के अंत तक सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है, जो निवेशकों के लिए बड़ा संकेत है।" — अजय केडिया, प्रेसीडेंट, केडिया कमोडिटीज
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ने का असर यह है कि सितंबर महीने के दौरान आई मामूली गिरावट के बाद अब बाजार एक बार फिर वापसी कर रहा है। सितंबर में ऊंची बॉन्ड यील्ड की वजह से सोने पर थोड़ा दबाव जरूर देखा गया था, लेकिन अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। एमसीएक्स पर चांदी और सोने के वायदा कारोबार में जिस तरह से शुरुआती उछाल देखा गया है, वह इस बात का गवाह है कि घरेलू स्तर पर भी खरीदार और निवेशक एक्टिव हो चुके हैं।
आम आदमी की जेब पर क्या होगा इसका असर
सोने और चांदी के लगातार बढ़ते दामों का सीधा असर आम भारतीय उपभोक्ता की जेब पर पड़ रहा है। भारत में शादियों के सीजन और त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी को बहुत शुभ माना जाता है। ऐसे में यदि कीमतें इसी तरह आसमान छूती रहीं, तो आम मध्यमवर्गीय परिवार के लिए सोना खरीदना बेहद मुश्किल हो जाएगा। हालांकि जानकारों की सलाह है कि निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए ही स्टेप-बाय-स्टेप निवेश करना चाहिए।
यदि आप भी इस त्योहारी सीजन में सोने या चांदी में निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो आपको अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों और एक्सपर्ट्स की सलाह पर पैनी नजर रखनी चाहिए। आने वाले हफ्तों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और मिडिल ईस्ट की परिस्थितियां यह तय करेंगी कि सोने की कीमतें नया कौन सा रिकॉर्ड बनाएंगी। तब तक बाजार में सतर्कता और समझदारी के साथ आगे बढ़ना ही सबसे बेहतर रणनीति साबित होगी।








