महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय हलचल बहुत तेज हो गई है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के नेता अंबादास दानवे ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा है कि देश में हुकूमशाही लगातार बढ़ रही है। दानवे के अनुसार सरकार की नीतियां तानाशाही भरी हैं और इसका परिणाम भुगतना ही पड़ेगा। शिवसेना यूबीटी ने सरकार के खिलाफ नया तेवर अपना लिया है।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत हिंगोली से हुई है। शिवसेना यूबीटी ने देवेंद्र फडणवीस और शिंदे सरकार के खिलाफ एक नया विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन का नाम 'तुमसे न हो पाएगा' रखा गया है। पार्टी का कहना है कि मौजूदा सरकार जनता के मुद्दों पर पूरी तरह फेल हो चुकी है। जमीन पर उतरकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है।
ऑपरेशन टाइगर और बढ़ती हुकूमशाही पर तीखा प्रहार
अंबादास दानवे ने 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। विपक्षी नेताओं को डराने और दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। दानवे ने चेतावनी दी है कि जनता सब देख रही है और वक्त आने पर इसका जवाब जरूर देगी। उन्होंने कहा कि तानाशाही का यह दौर ज्यादा दिन नहीं टिकने वाला है।
विवाद केवल नीतियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि विधायकों और सांसदों की निष्ठा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अंबादास दानवे और पार्टी के अन्य नेताओं ने बागी सांसदों पर तीखे हमले किए हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों खुद को बेच दिया है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर बिकने और स्वार्थ की राजनीति करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इससे महाविकास आघाड़ी और सत्ता पक्ष के बीच का तनाव और बढ़ गया है।
हिंगोली से शुरू हुआ 'तुमसे न हो पाएगा' आंदोलन
पार्टी की रणनीति अब आक्रामक रूप ले चुकी है। हिंगोली से शुरू हुआ 'तुमसे न हो पाएगा' अभियान पूरे महाराष्ट्र में फैलाया जाएगा। पार्टी नेताओं का मानना है कि सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हुई है। चाहे बेरोजगारी का मुद्दा हो या किसानों की समस्याएं, सरकार किसी भी वादे पर खरी नहीं उतरी है। इसी निराशा और गुस्से को जनता के बीच ले जाने का काम शिवसेना यूबीटी कर रही है।
दूसरी तरफ प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व और पार्टी उम्मीदवारों के चयन को लेकर उन्होंने खुलकर बात की है। अंबादास दानवे के प्रत्याशी बनने और पार्टी की आगामी रणनीतियों पर पार्टी के भीतर एकजुटता दिखाई जा रही है। विपक्षी गठबंधन आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार की कमियों को जोर-शोर से उजागर करने में जुट गया है।
आगामी राजनीतिक समीकरण और जनता की नजर
राज्य में हो रहे इन राजनीतिक बदलावों का असर आने वाले स्थानीय और विधानसभा चुनावों पर पड़ना तय है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिना रहा है, वहीं शिवसेना यूबीटी जैसे दल सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। अंबादास दानवे के बयानों ने राजनीतिक सरगर्मी को और अधिक बढ़ा दिया है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।



