नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों दक्षिण भारतीय सिनेमा का दबदबा साफ नजर आ रहा है। मलयालम फिल्म 'प्रथम दृष्ट्या कुट्टक्कर' ने रिलीज होते ही दर्शकों के बीच अपनी एक खास जगह बना ली है। इस सस्पेंस थ्रिलर फिल्म को इंटरनेट मूवी डेटाबेस पर आठ की शानदार रेटिंग मिली है। फिल्म की कहानी इतनी दमदार है कि दर्शक इसकी तुलना मोहनलाल की सुपरहिट फिल्म 'दृश्यम' से कर रहे हैं। फिल्म में एक के बाद एक कई ऐसे खुलासे होते हैं जो दर्शकों की धड़कनें बढ़ाने के लिए काफी हैं।
इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी कसी हुई पटकथा और कलाकारों का बेहतरीन अभिनय है। कहानी की शुरुआत एक अजीबोगरीब घटना से होती है जहां चार पुलिसवाले और दो लाशें रहस्यमयी परिस्थितियों में आमने-सामने आती हैं। फिल्म के हर दृश्य में सस्पेंस इस तरह से पिरोया गया है कि दर्शक अंत तक स्क्रीन से नजरें नहीं हटा पाते हैं। निर्देशक ने पुलिस विभाग के भीतर के दबाव और जटिलताओं को बहुत ही बारीकी से पर्दे पर उतारा है।
पार्वती थिरुवोथु के पुलिस लुक ने बटोरी सुर्खियां
फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही मशहूर अभिनेत्री पार्वती थिरुवोथु का पुलिस अधिकारी वाला रूप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उनका यह गंभीर और दबंग अंदाज दर्शकों को बहुत पसंद आ रहा है। इससे पहले भी पार्वती ने कई फिल्मों में अपनी मजबूत अदाकारी का लोहा मनवाया है। इस प्रोजेक्ट में उनका अभिनय फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है। पर्दे पर उनकी एंट्री और मामलों को सुलझाने का उनका तरीका फिल्म की जान है।
फिल्म के रिलीज होने के बाद से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। इस हफ्ते ओटीटी पर रिलीज हुई दक्षिण भारतीय फिल्मों में इसे सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। समीक्षकों का मानना है कि जिन लोगों को मर्डर मिस्ट्री और पुलिस इन्वेस्टिगेशन वाली कहानियां पसंद हैं, उनके लिए यह फिल्म एक बेहतरीन विकल्प है। फिल्म के संवाद और बैकग्राउंड म्यूजिक इसके तनाव को और ज्यादा बढ़ा देते हैं।
ओटीटी पर इस हफ्ते की सबसे बड़ी रिलीज
अक्टूबर के पहले हफ्ते में कई बड़ी फिल्में और सीरीज ओटीटी पर स्ट्रीम हुई हैं। इनमें 'प्रथम दृष्ट्या कुट्टक्कर' ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं। दर्शक विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस फिल्म का लुत्फ उठा रहे हैं। सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी दर्शकों के बीच भी मलयालम सिनेमा की पहुंच काफी मजबूत हो गई है। लोग अपने घरों में बैठकर इस बेहतरीन थ्रिलर का आनंद ले रहे हैं और सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी साझा कर रहे हैं।
आम दर्शकों के साथ-साथ फिल्म समीक्षकों ने भी इसकी सराहना की है। कहानी में जिस तरह से हर एक किरदार का सच धीरे-धीरे सामने आता है, वह काबिल-ए-तारीफ है। पुलिस महकमे की कार्यशैली और एक जटिल केस की गुत्थी को सुलझाने की यह दौड़ दर्शकों को बांधे रखती है। अगर आप वीकेंड पर कुछ नया और रोमांचक देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।
पारिवारिक और मनोरंजक सिनेमा का नया दौर
दक्षिण भारत के फिल्म उद्योग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दमदार कहानी के आगे बड़े बजट की कोई खास अहमियत नहीं होती है। कम संसाधनों में बनी इस फिल्म ने साबित कर दिया कि दर्शक आज के समय में सिर्फ अच्छी और तार्किक कहानियों को पसंद करते हैं। फिल्म का हर एक सीन दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है कि आखिर इस गुनाह के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल में यह बात सामने आई है कि आने वाले दिनों में ऐसी और भी कई क्षेत्रीय फिल्में ओटीटी पर बड़ा फेरबदल कर सकती हैं। हिंदी पट्टी के दर्शक भी अब सबटाइटल के साथ दक्षिण भारतीय थ्रिलर फिल्मों को बड़े चाव से देख रहे हैं। 'प्रथम दृष्ट्या कुट्टक्कर' की यह सफलता इस बात का पक्का सबूत है कि अच्छी कला की कोई भाषा या सीमा नहीं होती है।








