सुल्तानपुर जिले में इन दिनों गोमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है, जिससे आम जनजीवन और प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। नदी का पानी लगातार ऊपर आ रहा है और इसने शहर के प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल सीताकुंड घाट को अपने आगोश में ले लिया है। पानी बढ़ने से घाट की सीढ़ियां और आसपास के मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इस दृश्य को देखकर नदी किनारे रहने वाले लोग सहम गए हैं और उन्हें पुरानी बाढ़ का वो दौर याद आ रहा है जब पानी घरों तक घुस गया था।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलस्तर में यह बढ़ोतरी बहुत तेजी से हो रही है। अगर बारिश का सिलसिला ऐसे ही जारी रहा तो स्थिति और भी खराब हो सकती है। लोग अभी से ही अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गए हैं। प्रशासन की तरफ से भी नदी के आसपास के इलाकों में मुनादी कराई जा रही है ताकि कोई अनहोनी न हो। गोमती का यह बढ़ता रूप शहर के लिए एक बड़ी चेतावनी की तरह सामने आ रहा है और लोग दुआ कर रहे हैं कि हालात नियंत्रण में रहें।
सीताकुंड घाट पर डूबी सीढ़ियां, श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें
गोमती नदी के जलस्तर में अचानक आए इस उछाल से सीताकुंड घाट का पूरा स्वरूप बदल गया है। रोजाना सुबह-शाम पूजा-पाठ करने और स्नान करने आने वाले श्रद्धालुओं को अब भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी इतनी ऊपर आ चुका है कि मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया है। पुजारियों और स्थानीय दुकानदारों ने अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। नदी के तेज बहाव को देखकर लोग दूर से ही हाथ जोड़कर लौट रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का मुआयना करना शुरू कर दिया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। सिंचाई विभाग के कर्मचारी लगातार जलस्तर की माप कर रहे हैं और उच्च अधिकारियों को पल-पल की रिपोर्ट भेज रहे हैं। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। राहत और बचाव दल को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
पुरानी बाढ़ की डरावनी यादों से सहमे शहरवासी
गोमती के इस बढ़ते जलस्तर को देखकर बुजुर्गों को वो साल याद आ गए जब बाढ़ ने पूरे सुल्तानपुर शहर में तबाही मचा दी थी। उस वक्त सड़कों पर नावें चली थीं और चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था। लोग महीनों तक अपने घरों से बेघर हो गए थे और खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया था। आज वैसी ही परिस्थितियां बनती देख लोगों के दिलों में पुराना डर फिर से जाग गया है। हर कोई यही चर्चा कर रहा है कि अगर जलस्तर और बढ़ा तो शहर की सुरक्षा व्यवस्था कैसे संभाली जाएगी।
व्यापारी वर्ग भी इस स्थिति से खासे चिंतित हैं क्योंकि नदी के पास बनी कई दुकानों में पानी भरने का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और नदी के पास जाने से बचें। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में और बारिश हो सकती है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जमीनी अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।
प्रशासनिक तैयारियां और एहतियाती कदम
जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए कमर कस ली है। नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए गए हैं जो चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित होने वाले संभावित गांवों और मोहल्लों की सूची तैयार कर ली गई है ताकि राहत सामग्री समय पर बांटी जा सके। चिकित्सा टीमों को भी तैयार रहने के आदेश दिए गए हैं ताकि जलजनित बीमारियों से निपटा जा सके।
नागरिकों से भी यह अपील की जा रही है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। गोमती नदी के तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह के कटाव को समय रहते रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि स्थिति अभी नियंत्रण में है और हर मुमकिन कोशिश की जा रही है कि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।







