त्योहारी सीजन से पहले पंजाब के कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले
देशभर के केंद्रीय कर्मचारी जहां साल के दूसरे महंगाई भत्ते यानी डीए हाइक (DA Hike) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं गैर-केंद्रीय स्तर पर राज्यों ने अपने कर्मचारियों को राहत देना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में पंजाब की भगवंत मान सरकार ने अपने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए खजाना खोल दिया है। राज्य सरकार ने त्योहारी सीजन से ठीक पहले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत (DA/DR) में पूरे 8 फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी है। सरकार के इस कदम से राज्य के करीब आठ लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है।
महंगाई भत्ते में इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी के बाद अब राज्य के कर्मचारियों का डीए बढ़कर सीधे 50 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह संशोधित दरें अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 अक्टूबर से प्रभावी हो जाएंगी। हालांकि, इसका भुगतान चार-चार फीसदी के हिसाब से दो अलग-अलग किस्तों में किया जाएगा, ताकि सरकारी राजकोष पर अचानक बहुत ज्यादा वित्तीय बोझ न पड़े।
दिवाली और दशहरा जैसे बड़े त्योहारों से पहले आए इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। पिछले काफी समय से राज्यभर में कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर लामबंद थे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में सरकार का यह दांव त्योहारी माहौल में कर्मचारियों को शांत करने और उन्हें बड़ी राहत देने के रूप में देखा जा रहा है।
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मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी संगठनों की बैठक का असर
यह फैसला रातों-रात नहीं लिया गया है, बल्कि इसके पीछे लंबी बातचीत और कर्मचारी संगठनों का लगातार संघर्ष शामिल है। पिछले कुछ हफ्तों से पंजाब के विभिन्न विभागों के कर्मचारी और पेंशनभोगी अपनी लंबित मांगों और बकाए के भुगतान को लेकर सड़कों पर थे। विरोध-प्रदर्शनों का दौर लगातार तेज हो रहा था, जिससे सरकार पर भी दबाव बढ़ रहा था। इसी दबाव को कम करने और मामलों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद मोर्चा संभाला।
बीते शुक्रवार, 18 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में विभिन्न कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ एक लंबी और अहम बैठक की थी। इस हाई-लेवल मीटिंग में कर्मचारियों की सेवा-संबंधी कई समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान ही मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए महंगाई भत्ते में 8 फीसदी की बढ़ोतरी करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, जिस पर अब आधिकारिक मुहर लग चुकी है।
बैठक के बाद पंजाब राज्य मंत्रिस्तरीय सेवा संघ के अध्यक्ष गुरनाम सिंह विर्क ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि उनकी अन्य जायज मांगों पर भी आने वाले दिनों में सकारात्मक चर्चा की जाएगी। कर्मचारी नेताओं ने इस फैसले का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही अपने अन्य मुद्दों पर भी सरकार से स्पष्ट रुख की मांग की है।
दो किस्तों में मिलेगा बढ़ा हुआ डीए, 50 प्रतिशत तक पहुंचा आंकड़ा
पंजाब सरकार के नए आदेश के मुताबिक, महंगाई भत्ते (DA) में की गई 8 फीसदी की यह बढ़ोतरी 1 अक्टूबर से लागू होगी। लेकिन इसे सीधे एकमुश्त देने के बजाय सरकार ने दो किस्तों में भुगतान करने का निर्णय लिया है। चार-चार फीसदी की दो किस्तों में मिलने वाले इस डीए से कर्मचारियों के मासिक वेतन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। राज्य सरकार का मानना है कि इससे त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में भी मांग बढ़ेगी और कर्मचारियों को अतिरिक्त वित्तीय संबल मिलेगा।
इस बढ़ोतरी के साथ ही पंजाब के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता अब बढ़कर 50 फीसदी के आंकड़े को छू लेगा। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक समय में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन के बढ़ते खर्चों के बीच 50 प्रतिशत डीए होना कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत है। हालांकि, देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब के कर्मचारियों का संघर्ष अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि उनके कुछ पुराने वित्तीय मामले अभी भी अनसुलझे हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद इस बाबत बयान जारी करते हुए कहा है कि उनकी सरकार प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति के दायरे में रहकर कर्मचारियों की हर वास्तविक मांग को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। भविष्य में भी कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों पर नियम और कानूनी स्थिति के अनुसार ही विचार किया जाएगा।
बकाए को लेकर तनातनी जारी, मामला सुप्रीम कोर्ट में अटका
एक तरफ जहां सरकार डीए बढ़ाकर त्योहारी तोहफा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों और सरकार के बीच एक बड़ा वित्तीय विवाद अभी भी जस का तस बना हुआ है। यह विवाद करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाए के भुगतान को लेकर है। कर्मचारी संगठन पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस पुराने आदेश का हवाला दे रहे हैं, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर यह सारा बकाया चुकाने का सख्त निर्देश दिया था।
लेकिन पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। सरकार का तर्क है कि राज्य की वित्तीय हालत इतनी मजबूत नहीं है कि वह इतने कम समय में एकमुश्त 14 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान कर सके। सरकार का यह भी कहना है कि यदि इतना बड़ा भुगतान एक साथ कर दिया गया, तो राज्य के विकास कार्यों और अन्य जरूरी योजनाओं पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
"सरकार के इस फैसले से त्योहारी मौसम के दौरान सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को वित्तीय सहायता मिलेगी। हम कर्मचारियों की वास्तविक मांगों के प्रति प्रतिबद्ध हैं।" — भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब
कर्मचारी संघों का कहना है कि डीए में 8 फीसदी की बढ़ोतरी स्वागत योग्य है, लेकिन यह उनके 14,191 करोड़ रुपये के बकाए का विकल्प नहीं हो सकता। वे अदालत के आदेश के तहत अपने हक की पूरी राशि पाने के लिए अड़े हुए हैं। देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या अंतिम फैसला सुनाता है, क्योंकि उसी पर पंजाब के सरकारी खजाने और कर्मचारियों का अगला कदम निर्भर करेगा।




