नई दिल्ली और पटना — भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बिहार सरकार के सामने किसानों की जमीनों को लेकर एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। पटना के पास बनने वाली सैटेलाइट सिटी के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया इन दिनों काफी तेजी से चल रही है। लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट पर अब किसानों के तीखे तेवर सामने आने लगे हैं। राकेश टिकैत ने साफ शब्दों में कह दिया है कि जब तक सर्किल रेट नहीं बढ़ाए जाएंगे, तब तक सरकार को किसानों की एक इंच भी जमीन नहीं मिलेगी। किसानों का यह विरोध अब धीरे-धीरे एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह जमीन के बदले मिलने वाला मुआवजा है। किसानों और किसान नेताओं का कहना है कि प्रशासन पुराने और बेहद कम रेट पर जमीन खरीदना चाहता है। राकेश टिकैत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तंज कसा है कि सरकार किसानों को उनकी उपजाऊ जमीन का सही दाम देने से बच रही है। उन्होंने दो टूक कहा है कि पुराने रेट पर जमीन देने का सवाल ही पैदा नहीं होता। जब तक बाजार के हिसाब से मुआवजा तय नहीं होगा, तब तक किसान अपनी जमीन किसी भी कीमत पर प्रशासन को नहीं सौंपेंगे।
पटना सैटेलाइट सिटी प्रोजेक्ट और मुआवजे का विवाद
बिहार की राजधानी पटना के आसपास आधुनिक सुविधाओं से लैस सैटेलाइट सिटी बसाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर ग्रामीण इलाकों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। लेकिन जमीन मालिकों और स्थानीय किसानों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि उन्हें उनकी संपत्ति का उचित बाजार मूल्य नहीं मिल रहा है। राकेश टिकैत ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि विकास के नाम पर किसानों को उजाड़ने की साजिश किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने दी जाएगी। किसानों के इस तेवर से स्थानीय प्रशासन की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
दूसरी तरफ, किसान नेता राकेश टिकैत के इस तेवर के बाद प्रशासनिक हलकों में भी बैठकों का दौर शुरू हो गया है। अधिकारी इस बात की माथापच्ची कर रहे हैं कि किसानों को कैसे मनाया जाए ताकि प्रोजेक्ट में और ज्यादा देरी न हो। लेकिन किसान अपनी मांगों पर पूरी तरह अड़े हुए हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक लिखित में उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। इस बीच, किसान संगठनों ने अपनी ट्रैक्टर रैलियों और बैठकों की रणनीति भी तैयार करनी शुरू कर दी है, जिससे सरकार पर दबाव और ज्यादा बढ़ गया है।
बाबा टिकैत की जयंती पर श्रद्धांजलि और युवाओं का संकल्प
एक तरफ जहां जमीन के मुआवजे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है, वहीं दूसरी तरफ किसान संगठनों ने हाल ही में बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती भी पूरी शिद्दत के साथ मनाई है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में युवा किसानों ने रक्तदान शिविर लगाए और कृषि अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया। देश के कई बड़े नेताओं ने भी बाबा टिकैत को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। जानकारों का मानना है कि टिकैत परिवार और भारतीय किसान यूनियन एक बार फिर से अपनी पुरानी जमीन और तेवर को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
जमीन अधिग्रहण के इस ताजा विवाद ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि देश का किसान अब अपने हक के लिए किसी भी समझौते के मूड में नहीं है। चाहे वह उत्तर भारत के राज्य हों या फिर बिहार जैसे पूर्वी राज्य, किसान हर जगह अपने हितों की रक्षा के लिए गोलबंद हो रहे हैं। राकेश टिकैत का यह बयान केवल एक चेतावनी नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में एक बड़े किसान संघर्ष की पटकथा भी हो सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार सरकार किसानों को मनाने के लिए क्या नया फॉर्मूला लेकर आती है।
आगामी रणनीति और किसानों का अगला कदम
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, किसान संगठन आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर महापंचायतों का आयोजन करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि वे किसानों के साथ लगातार बातचीत के रास्ते खुले रखे हुए हैं। हालांकि, जिस तरह की जिद दोनों पक्षों की तरफ से दिखाई जा रही है, उससे साफ है कि मामला आसानी से सुलझने वाला नहीं है। किसानों का यह नया तेवर सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है और आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक तूल पकड़ सकता है।





