मॉस्को/कीव — रूस और यूक्रेन के बीच जारी खूनी संघर्ष में एक नया और बेहद खतरनाक मोड़ आ गया है। दोनों देशों के बीच कुछ समय पहले बना ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रोकने का समझौता यानी एनर्जी सीजफायर अब पूरी तरह से टूट चुका है। यूक्रेन की सेना ने रूस के अंदर घुसकर कई सैन्य ठिकानों और एयरफील्ड्स पर भीषण मिसाइल हमले किए हैं। इस हमले में रूस को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है और उसके कई लड़ाकू विमान मलबे में तब्दील हो गए हैं।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी बलों ने रूस के एक मुख्य एयरफील्ड पर अचानक मिसाइल दाग दी। इस सटीक हमले में रूस के छह एसयू-34एम फाइटर जेट पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। युद्ध के मैदान में रूस के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इन आधुनिक युद्धक विमानों के नष्ट होने से रूसी वायु सेना की ताकत को तगड़ा नुकसान पहुंचा है। कीव प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, तब तक वे रूस के सामरिक ठिकानों को बख्शेंगे नहीं।
एनर्जी सीजफायर के टूटने से भड़का युद्ध
रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा ढांचे को सुरक्षित रखने को लेकर जो आपसी सहमति बनी थी, वह अब कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति के लिए किए जा रहे तमाम प्रयास फिलहाल असफल साबित हो रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने साफ कर दिया है कि अब रूस की तेल रिफाइनरियों और ईंधन भंडारों पर सीधे हमले किए जाएंगे। इस फैसले से साफ है कि आने वाले दिनों में यह युद्ध और अधिक विनाशकारी रूप लेने वाला है।
दूसरी ओर, इस जंग के बीच तकनीकी मोर्चे पर भी तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों की तरफ से यूक्रेन को मिलने वाली मदद में कुछ असहजता देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एलन मस्क की कंपनी ने यूक्रेन को मिलने वाली इंटरनेट स्पीड में कुछ कटौती की है। इसके अलावा मिलिट्री-ग्रेड सैटेलाइट सेवाओं को लेकर भी रणनीतिक फेरबदल किए जा रहे हैं, जिससे कीव की सामरिक तैयारियों पर असर पड़ सकता है।
रूस में डिजिटल नियमों पर कड़ा शिकंजा
युद्ध के इन हालातों के बीच रूस के भीतर आंतरिक नियंत्रण भी काफी सख्त कर दिया गया है। रूस की अदालतें और प्रशासन नागरिकों की छोटी-सी गलती पर भी भारी जुर्माना लगा रहे हैं। हाल ही में एक रूसी महिला को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी चैटजीपीटी की मदद से एक भालू की फोटो बनवाने पर हजारों रुपये का भारी जुर्माना भरना पड़ा है। रूस में बिना अनुमति डिजिटल मीडिया और एआई के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं, जिनका उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो रही है।
जमीनी हालात यह बता रहे हैं कि आने वाले सप्ताह दोनों देशों के लिए और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा केंद्रों पर होने वाले हमलों से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भी भारी उछाल आ सकता है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए है और युद्ध के हर नए अपडेट को आप तक पहुंचाती रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भविष्य के संकेत
इस पूरे घटनाक्रम के बाद वैश्विक राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। पश्चिमी देश एक तरफ यूक्रेन को हथियार दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध को ज्यादा फैलने से रोकने के उपाय भी तलाश रहे हैं। लेकिन जमीन पर हालात इसके बिल्कुल उलट दिशा में जाते दिख रहे हैं। तेल रिफाइनरियों पर हमले शुरू होने से केवल रूस और यूक्रेन ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत के रास्ते और भी ज्यादा संकुचित होने की आशंका जताई जा रही है।









