द फ्रीलान्स ग्राउंड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। दोनों देशों के बीच हुआ अनौपचारिक ऊर्जा सीजफायर अब पूरी तरह टूट चुका है। यूक्रेन की सेना ने रूस के एक मुख्य एयरफील्ड पर अचानक भीषण मिसाइल हमला कर दिया है। इस हमले में रूस के छह आधुनिक एसयू-34एम लड़ाकू जेट पूरी तरह तबाह हो गए हैं। इस ताजा सैन्य कार्रवाई से दोनों देशों के बीच तनाव अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
सामने आ रही शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अब रूसी ऊर्जा ढांचे को सीधे तौर पर निशाना बनाने का फैसला किया है। अमेरिकी स्तर पर हो रहे राजनीतिक बदलावों और शांति प्रयासों के बीच यह हमला बड़ा झटका माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन के युद्ध रोकने के प्रयासों को इस हमले से करारा झटका लगा है। यूक्रेन का साफ कहना है कि अब रूसी तेल रिफाइनरियों पर बड़े पैमाने पर हमले किए जाएंगे।
रूस के एयरफील्ड पर यूक्रेन का बड़ा मिसाइल हमला
यूक्रेनी सेना ने बेहद सुनियोजित तरीके से रूस के भीतर स्थित एयरफील्ड को इस हमले में अपना निशाना बनाया। इस हवाई पट्टी पर खड़े रूस के एसयू-34एम जेट युद्ध के मैदान में काफी ताकतवर माने जाते हैं। इतने बड़े सैन्य उपकरणों के एक ही झटके में नष्ट होने से रूसी वायु सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला यूक्रेन की नई रणनीति का हिस्सा है। वे रूस की युद्धक क्षमता को उसकी धरती पर ही कमजोर करना चाहते हैं।
इस बीच, अमेरिका और तकनीक से जुड़ी बड़ी कंपनियों के रुख ने भी इस जंग में नया मोड़ ला दिया है। मस्क की कंपनी ने यूक्रेन के इलाके में इंटरनेट की स्पीड को कम कर दिया है। युद्ध के मैदान में मिलिट्री-ग्रेड सैटेलाइट इंटरनेट का यह झटका यूक्रेन के लिए रणनीतिक परेशानी खड़ी कर रहा है। इसके बावजूद यूक्रेनी सेना ने अपने हमले रोकने से इंकार कर दिया है। जेलेंस्की प्रशासन का मानना है कि अपनी रक्षा के लिए उन्हें रूस के आर्थिक और ऊर्जा स्रोतों को तोड़ना ही होगा।
रूसी तेल रिफाइनरियों पर मंडराया नया खतरा
रूस की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा उसके तेल और गैस के निर्यात पर टिका हुआ है। यूक्रेन अब सीधे तौर पर रूस की इन्हीं तेल रिफाइनरियों को तबाह करने की तैयारी कर रहा है। यदि ये हमले सफल होते हैं तो रूस की घरेलू ईंधन आपूर्ति और विदेशी कमाई दोनों पर बुरा असर पड़ेगा। रूसी प्रशासन इन हमलों से निपटने के लिए अपनी वायु रक्षा प्रणाली को और ज्यादा मजबूत करने में जुट गया है। दोनों पक्षों की तरफ से किसी भी नरमी के संकेत फिलहाल नहीं मिल रहे हैं।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिज्ञ इस जंग के और फैलने से चिंतित हैं। भारत और अन्य विकासशील देश इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। हाल ही में रूस ने भारत के साथ रोजगार समझौतों को मंजूरी दी है, जिससे द्विपक्षीय मामलों पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, युद्ध के मैदान में रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा यह खूनी संघर्ष पूरी दुनिया की ऊर्जा और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और ऊर्जा बाजार पर असर
रूस और यूक्रेन की इस ताजा जंग का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल के बाजार पर पड़ सकता है। रिफाइनरियों पर हमलों की खबरों के बाद तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ गई है। यूरोपीय देश भी इस बात से डरे हुए हैं कि ऊर्जा संकट एक बार फिर विकराल रूप ले सकता है। अमेरिकी नेतृत्व वाले पश्चिमी देश इस पूरे घटनाक्रम को रोकने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस जंग को थामा जा सकता है या यह संघर्ष और अधिक भयानक रूप लेगा।










