केरल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, वक्फ बोर्ड का हुआ पुनर्गठन
दक्षिण भारतीय राज्य केरल की राजनीति में एक बार फिर वक्फ बोर्ड का मुद्दा गर्मा गया है। राज्य की यूडीएफ सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए मौजूदा वक्फ बोर्ड को भंग कर दिया है और इसके स्थान पर एक नई नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस फेरबदल के तहत इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के वरिष्ठ नेता एम.सी. मायिन हाजी को केरल राज्य वक्फ बोर्ड का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह फैसला राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि पिछले बोर्ड का कार्यकाल अभी साढ़े चार साल से अधिक शेष था।
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने के.एस. हम्सा की अध्यक्षता वाले पिछले बोर्ड को भंग करने का आधिकारिक आदेश शुक्रवार को जारी किया था। इस पुराने बोर्ड का गठन इसी साल मार्च महीने में पूर्ववर्ती वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल के दौरान किया गया था। लेकिन गठन के महज सात महीने के भीतर ही इस तरह बोर्ड को हटाए जाने से राज्य के राजनीतिक गलियारों में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं।
हाई कोर्ट में चुनौती और अदालत का रुख
वक्फ बोर्ड को अचानक भंग किए जाने के सरकारी फैसले को पूर्व अध्यक्ष के.एस. हम्सा ने केरल उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत के समक्ष सरकार ने तर्क दिया था कि बोर्ड का पुनर्गठन करना प्रशासनिक रूप से अनिवार्य था क्योंकि पिछले बोर्ड के कई सदस्य निर्धारित योग्यता मानदंडों को पूरा नहीं कर पा रहे थे। अदालत की पूर्व की पाबंदियों के कारण बोर्ड के नीतिगत फैसलों पर भी रोक लग गई थी जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा था।
शनिवार को इस मामले में विशेष सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एस. मनु की पीठ ने सरकार के पुनर्गठन के फैसले पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि फिलहाल इस फैसले पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद नहीं हैं। हालांकि, अदालत ने मामले से जुड़ी अन्य याचिकाओं को संबंधित खंडपीठ के पास सुनवाई के लिए भेज दिया है। अदालत के इस रुख से फिलहाल राज्य सरकार और नवनियुक्त बोर्ड को बड़ी राहत मिली है।
कौन हैं एम.सी. मायिन हाजी और क्या हैं नए समीकरण
नवनियुक्त अध्यक्ष एम.सी. मायिन हाजी आईयूएमएल के बेहद अनुभवी और प्रभावशाली नेता हैं। वह पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ पहले भी वक्फ बोर्ड के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्हें बोर्ड के कामकाज और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का अच्छा अनुभव है। मुस्लिम लीग के नेतृत्व के बीच मायिन हाजी की नियुक्ति को एक सर्वमान्य और संतुलित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति से मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से चल रहे तनाव को कम करने में मदद मिलेगी। बोर्ड में उनके साथ आईयूएमएल विधायक कुरुक्कोली मोइदीन को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा मुस्तफा फैजी, सिरास डी. कैप्सी, तोडियूर मोहम्मद कुंजु मौलवी, सजना फिरोज, जसीम सबाहा, डॉ. अब्दुल मजीद और सलाही मदीना बेगम जैसे चेहरों को नई नौ सदस्यीय समिति में जगह दी गई है।
"केरल सरकार ने प्रशासनिक सुधार और बोर्ड के सुचारू संचालन के लिए वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। नए अध्यक्ष के अनुभव से संस्था के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और सभी पक्षों को साथ लेकर चलने में मदद मिलेगी।" — प्रशासनिक सूत्र, केरल सरकार
दो नए सदस्यों की नियुक्ति पर अभी भी संशय बरकरार
नया वक्फ बोर्ड गठित होने के बावजूद इसके सभी पद अभी पूरी तरह नहीं भरे जा सके हैं। सरकार ने बोर्ड में अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के नाम तो तय कर दिए हैं, लेकिन दो पदों पर नियुक्ति को फिलहाल रोककर रखा गया है। इसके पीछे मुख्य वजह नए कानून में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ा वैधानिक प्रावधान है।
अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार इन दो पदों पर किसी भी तरह की जल्दबाजी से बच रही है। सरकार सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेशों और दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही है। अदालत के अंतिम निर्देशों के आधार पर ही इन दो रिक्त पदों पर गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। तब तक नौ सदस्यीय समिति ही बोर्ड के शुरुआती कामकाज को संभालेगी और जल्द ही नए बोर्ड की पहली औपचारिक बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें आगे की रूपरेखा तैयार होगी।












