अहमदाबाद: भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला एक बार फिर से अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में घर वापसी के संकेत दे रहे हैं। गुजरात के राजनीतिक गलियारों में इस समय चर्चा का सबसे बड़ा विषय यही है कि क्या 86 वर्ष की उम्र में 'बापू' यानी वाघेला एक बार फिर कांग्रेस का हाथ थामने जा रहे हैं। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड रिपोर्ट और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, वाघेला ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि पार्टी आलाकमान और खासकर राहुल गांधी उन्हें उचित जिम्मेदारी देते हैं, तो वे बीजेपी को चुनौती देने के लिए कांग्रेस में लौटने को पूरी तरह तैयार हैं।
86 की उम्र में भी राजनीतिक मैदान छोड़ने को तैयार नहीं 'बापू'
राजनीति की पिच पर उम्र भले ही बढ़ रही हो, लेकिन शंकरसिंह वाघेला का जुझारू तेवर कम नहीं हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों से गांधीनगर से लेकर दिल्ली तक उनकी सक्रियता ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। 86 वर्ष की उम्र में भी उनका यह कहना कि वे 'आउट होने को तैयार नहीं हैं', इस बात का प्रमाण है कि वे गुजरात की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहते हैं। राज्य की क्षेत्रीय राजनीति में उनका प्रभाव आज भी एक बड़े वर्ग पर है, और यही वजह है कि उनकी संभावित वापसी की अटकलों ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
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‘बीजेपी को हटाने के लिए कांग्रेस में जाने को तैयार’
हाल ही में दिए गए बयानों में शंकरसिंह वाघेला ने खुलकर कहा है कि केंद्र और राज्य की सत्ता से बीजेपी को हटाने के लिए समान विचारधारा वाले दलों और नेताओं को एकजुट होना होगा। उन्होंने मीडिया के सामने अपनी मंशा साफ करते हुए कहा है कि वे कांग्रेस में वापसी के रास्ते तलाश रहे हैं और इसके लिए उन्होंने अपनी शर्तें भी पार्टी के सामने रख दी हैं। वाघेला का यह कड़ा तेवर सीधे तौर पर बीजेपी के खिलाफ एक बड़े मोर्चेबंदी की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी की मुहर का इंतजार और कांग्रेस का असमंजस
इस पूरी राजनीतिक पटकथा का सबसे अहम हिस्सा राहुल गांधी की प्रतिक्रिया है। रिपोर्टों के अनुसार, वाघेला की कांग्रेस में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इसके लिए वे राहुल गांधी से आमने-सामने की मुलाकात का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस का एक धड़ा वाघेला के पुराने इतिहास को लेकर सतर्क भी है। 2017 के राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर जाने वाले वाघेला का पार्टी में स्वागत करना कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा होगा या जोखिम, इस पर अंदरखाने गहन मंथन चल रहा है।
गुजरात के सियासी समीकरणों पर इसका क्या होगा असर?
- वाघेला के आने से राज्य के ग्रामीण इलाकों और क्षत्रिय समाज में कांग्रेस की पकड़ मजबूत हो सकती है।
- यह कदम आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य की रणनीतियों के लिहाज से गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
- बीजेपी के मजबूत दुर्ग में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस को एक अनुभवी और आक्रामक चेहरे की तलाश थी, जो वाघेला पूरी कर सकते हैं।
निष्कर्ष: क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?
राजनीति में कोई भी स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, और शंकरसिंह वाघेला का राजनीतिक सफर इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है। जनसंघ से लेकर बीजेपी, फिर अपनी पार्टी आरएसपीपी (Rashtriya Janata Party) और बाद में कांग्रेस व एनसीपी का सफर तय करने वाले वाघेला यदि एक बार फिर कांग्रेस में लौटते हैं, तो यह गुजरात की राजनीति का एक नया अध्याय होगा। अब देखना यह है कि राहुल गांधी इस अनुभवी नेता को कितनी जल्दी स्वीकार करते हैं और 'बापू' का यह दांव कितना कामयाब रहता है।







