कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में स्थित ऐतिहासिक शृंगेरी मठ इन दिनों सोशल मीडिया पर चल रही एक झूठी खबर के कारण चर्चा में है। इंटरनेट पर पिछले कुछ समय से यह दावा किया जा रहा था कि मठ के प्रमुख सीअर यानी शंकराचार्य ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को आशीर्वाद देने से साफ इनकार कर दिया था। जैसे ही यह वीडियो और इससे जुड़े संदेश सोशल मीडिया पर शेयर हुए, वैसे ही राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई। लेकिन जब द फ्रीलान्स की टीम ने इसकी तह तक जाकर जमीनी और डिजिटल पड़ताल की, तो पूरी सच्चाई सामने आ गई। यह दावा पूरी तरह से निराधार निकला और इसका मकसद सिर्फ लोगों को गुमराह करना था।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो क्लिप को बहुत ही चालाकी से काटा गया था ताकि देखने वालों को लगे कि मठ के संत राहुल गांधी से नाराज हैं। बूम (BOOM) की फैक्ट चेक रिपोर्ट और स्थानीय स्तर पर हमारे संवाददाताओं द्वारा जुटाई गई जानकारी से यह साफ हो गया कि मूल वीडियो किसी दूसरी पुरानी घटना का है। राहुल गांधी जब भी धार्मिक और आध्यात्मिक यात्राओं पर जाते हैं, तो विरोधी दल अक्सर पुराने फुटेज का गलत इस्तेमाल करके जनता के बीच भ्रम फैलाते हैं। इस मामले में भी बिल्कुल ऐसा ही किया गया और बिना किसी ठोस सबूत के एक झूठी कहानी को सच की तरह पेश कर दिया गया।
शृंगेरी चुनाव और राजनीतिक समीकरणों की असली कहानी
शृंगेरी सिर्फ एक धार्मिक केंद्र ही नहीं बल्कि कर्नाटक की राजनीति का भी एक अहम हिस्सा रहा है। साल 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान शृंगेरी सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। उस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार टी. डी. राजेगोड़ा (T D Rajegowda) ने शानदार जीत दर्ज की थी और इलाके में अपनी पकड़ मजबूत की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र में कांग्रेस की बढ़ती पकड़ और नेताओं के धार्मिक दौरों से विरोधी दल असहज महसूस करते हैं। यही वजह है कि समय-समय पर ऐसे फर्जी वीडियो गढ़े जाते हैं ताकि धार्मिक भावनाओं को भड़काकर राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।
स्थानीय पत्रकारों और मठ के करीबी सूत्रों से जब हमारी बातचीत हुई, तो उन्होंने साफ बताया कि शृंगेरी मठ हमेशा से सभी राजनीतिक दलों और नेताओं का समान रूप से स्वागत करता आया है। मठ की परंपरा किसी एक व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ जाने की नहीं रही है। जब राहुल गांधी ने शृंगेरी का दौरा किया था, तब वहां किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं घटी थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने जानबूझकर इस तरह की अफवाहें फैलाईं ताकि समाज में गलत संदेश जाए और स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हों।
सोशल मीडिया पर फैल रहे झूठ से कैसे बचें आम नागरिक
आज के दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया हर किसी के हाथ में है, लेकिन यह सूचनाओं के साथ-साथ अफवाहों का भी बड़ा अड्डा बन चुका है। किसी भी वीडियो या खबर को बिना जांचे-परखे आगे शेयर कर देना समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। शृंगेरी मठ वाले मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती। जब तक कोई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान या विश्वसनीय फैक्ट चेक एजेंसी किसी बात की पुष्टि न कर दे, तब तक उस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट से यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि राहुल गांधी और शृंगेरी सीअर के बीच किसी भी अनबन की बात पूरी तरह मनगढ़ंत है। जनता को ऐसे फर्जी दावों से सतर्क रहना चाहिए और नफरत फैलाने वाले प्रोपेगैंडा का शिकार बनने से बचना चाहिए। स्थानीय प्रशासन और साइबर पुलिस भी ऐसे मामलों में नजर बनाए हुए है जो लोग जानबूझकर समाज में झूठ फैलाते हैं। हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह सच को पहचाने और फर्जी खबरों को आगे बढ़ाने से बचे।
धार्मिक संस्थाओं को राजनीति से दूर रखने की जरूरत
भारत में मठ और मंदिर सदियों से आस्था और संस्कृति के बड़े केंद्र रहे हैं। इन पवित्र स्थानों को जब राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो आम जनता की आस्था को ठेस पहुंचती है। शृंगेरी मठ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को विवादों में घसीटना और उनके नाम पर झूठ फैलाना बेहद निंदनीय है। देश के हर जिम्मेदार नागरिक और मीडिया संस्थान की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसे दुष्प्रचार का डटकर मुकाबला करें और सच को जनता के सामने रखें।









