चेन्नई की राजनीतिक गलियारों से लेकर मदुरै की सड़कों तक, इस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (TVK) के कदम सबसे बड़ी चर्चा का विषय बने हुए हैं। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड इन्वेस्टिगेटिव टीम ने जब राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम को टटोला, तो यह साफ हुआ कि पिछले कुछ घंटों में राज्य की राजनीति ने एक बेहद तेज और दिलचस्प मोड़ लिया है। एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री विजय ने नवजात बच्चों के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजना की शुरुआत की है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के साथ आर्थिक मोर्चे पर खींचतान भी शुरू हो गई है।
थाईमामान थंगा मोथिरम योजना: क्या हैं शर्तें?
पीटीआई (PTI) से मिले विशेष इनपुट और हमारी जमीनी पड़ताल के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में नवजात बच्चों के लिए 'एक ग्राम गोल्ड रिंग' (Thaimaman Thanga Mothiram Scheme / VG RAM G Scheme) योजना को लागू किया है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रशासन ने कुछ कड़े नियम तय किए हैं। इसके तहत मां का तमिलनाडु का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। साथ ही, मदर्स प्रसूति और बाल स्वास्थ्य ट्रैकिंग सिस्टम (PICME) में पंजीकरण और आरसीएच आईडी (RCH ID) होना भी दस्तावेजों की मुख्य शर्त बनाई गई है। योजना के लागू होने के तुरंत बाद से ही प्रशासनिक अमला इसकी तैयारियों में जुट गया है।
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मदुरै में सीएम विजय का मेगा रोड शो
योजना के ऐलान और शुरुआती क्रियान्वयन के ठीक बाद, मुख्यमंत्री विजय सीधे मदुरै के दौरे पर निकल पड़े। 'न्यूज़18 तमिल' और अन्य स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मदुरै की सड़कों पर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत हुआ। 'CM Vijay Road Show' ने दक्षिण तमिलनाडु में पार्टी (TVK) के कार्यकर्ताओं में भारी जोश भर दिया है। मदुरै पहुंचे सीएम विजय की एक झलक पाने के लिए सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा था।
केंद्र सरकार को पत्र और फंडिंग पैटर्न पर विवाद
योजना को धरातल पर उतारने के ठीक एक दिन बाद, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने इस योजना के फंडिंग पैटर्न (Funding Pattern) पर गंभीर चिंता जताई है। मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि मौजूदा 60:40 के अनुपात वाले केंद्र-राज्य लागत-साझाकरण (Cost-sharing) फॉर्मूले पर पुनर्विचार किया जाए। राज्य का तर्क है कि इस तरह की कल्याणकारी योजनाओं का बोझ अकेले राज्य के खजाने पर भारी पड़ रहा है, इसलिए केंद्र को अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए।
राष्ट्रीय राजनीति और इंडिगो गठबंधन के कयास
दूसरी ओर, राष्ट्रीय पटल पर भी तमिलनाडु और बिहार की राजनीति के तार जुड़ते दिख रहे हैं। ज़ी तमिल न्यूज़ (ZEE Tamil News) की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार चुनाव 2025 (#BiharElection2025) के संदर्भ में 'इंडिया' गठबंधन (INDIA Alliance) के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है, जहाँ तेजस्वी यादव को गठबंधन का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। इसका असर दक्षिण भारतीय राजनीति और राष्ट्रीय क्षेत्रीय दलों के बीच रणनीतिक बैठकों पर भी पड़ रहा है।
निष्कर्ष और भविष्य का असर
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन से यह स्पष्ट होता है कि सीएम जोसेफ विजय ने अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए एक तरफ जहां जनता के बीच सीधे पैठ बनाने वाली योजनाओं (जैसे गोल्ड रिंग स्कीम) का दांव चला है, वहीं केंद्र के साथ वित्तीय मोर्चे पर भी खुलकर मोर्चा ले लिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस फंडिंग पैटर्न के विरोध पर क्या रुख अपनाती है और यह तमिलनाडु की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।








