बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर एनडीए और राजनीतिक दलों में बढ़ी हलचल
बिहार के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। राज्य में विधान परिषद (MLC) की आठ महत्वपूर्ण सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को लेकर सत्ताधारी राष्ट्रीय जनता दल गठबंधन यानी एनडीए ने अपनी चुनावी तैयारियों को पूरी तरह अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। इन आठ सीटों में चार सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं जबकि शेष चार सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के परिणाम आगामी सियासी समीकरणों पर अपनी गहरी छाप छोड़ेंगे।
हाल ही में पटना स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में एनडीए के तमाम प्रमुख घटक दलों के शीर्ष नेता एक मंच पर जुटे। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से चुनावी रणनीति, सहयोगी दलों के बीच आपसी समन्वय और बूथ स्तर तक के प्रबंधन को लेकर गहन मंत्रणा की गई। बैठक में भाजपा के साथ-साथ जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और हम (HAM) पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। गठबंधन के नेताओं ने एक सुर में दावा किया है कि इस बार के विधान परिषद चुनाव में एनडीए सभी आठों सीटों पर प्रचंड जीत हासिल करेगा।
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही उम्मीदवारों के पर्चा दाखिल करने का सिलसिला भी तेजी पकड़ चुका है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और निर्दलीय प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ निर्वाचन कार्यालय पहुंच रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह चुनाव भले ही स्थानीय निकायों या विशेष कोटे का हो, लेकिन राज्य के राजनीतिक भविष्य और दलों की जमीनी पकड़ को आंकने के लिहाज से इसका बहुत बड़ा महत्व है।
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भाजपा और जदयू ने घोषित किए अपने धाकड़ उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सूची जारी करते हुए कई अनुभवी और पुराने नेताओं पर भरोसा जताया है। पार्टी ने जिन चेहरों को मैदान में उतारा है उनमें से कई चेहरे पहले से ही विधान परिषद के सदस्य के रूप में सदन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। भाजपा ने दरभंगा ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से सर्वेश कुमार को टिकट दिया है, जबकि तिरहुत टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र से नरेंद्र प्रसाद सिंह ताल ठोक रहे हैं। इसके अलावा पटना टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र से अनुभवी नेता नवल किशोर यादव को एक बार फिर पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। कोशी ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. एन.के. यादव को भी पार्टी ने मैदान में उतारा है जो कि अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं।
दूसरी ओर, एनडीए के प्रमुख सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड ने भी पहले ही अपने चार उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया था। जदयू की सूची में भी कई कद्दावर नेता शामिल हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के टिकट पर नीरज कुमार मैदान में हैं, जो अपने आक्रामक तेवर और राजनीतिक बयानों के लिए पूरे राज्य में खासे प्रसिद्ध हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन के दोनों प्रमुख दलों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि समाज के विभिन्न वर्गों और पेशेवर समूहों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके ताकि चुनाव में किसी प्रकार की आंतरिक कलह या असंतोष का सामना न करना पड़े।
जन सुराज पार्टी की एंट्री से मुकाबले में आया रोमांच
इस बार के विधान परिषद चुनाव को बेहद खास और दिलचस्प बनाने का काम प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' ने कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज के उतरने से मुकाबला पारंपरिक एनडीए बनाम महागठबंधन या अन्य दलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह त्रिकोणीय और बेहद संघर्षपूर्ण बन गया है। पटना स्नातक सीट पर मुकाबला सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां जदयू के मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार और जन सुराज समर्थित प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह आमने-सामने हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि कुछ सीटों पर स्थानीय क्षत्रपों और बाहुबली नेताओं का भी परोक्ष या अपरोक्ष समर्थन प्रत्याशियों को मिल रहा है, जिससे चुनावी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जन सुराज पार्टी लगातार राज्य में एक वैकल्पिक राजनीतिक संस्कृति और पढ़े-लिखे युवाओं को आगे बढ़ाने का दावा कर रही है। ऐसे में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में उनके उम्मीदवार कितना असर छोड़ पाते हैं, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा।
प्रशासनिक तैयारियां और मतदान की तारीखें
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार इन सभी आठ सीटों पर शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। पटना समेत संबंधित जिलों के निर्वाचन अधिकारियों की अध्यक्षता में लगातार उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि आचार संहिता का सख्ती से पालन हो सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके।
निर्वाचन कार्यक्रम के मुताबिक इन सीटों के लिए मतदान आगामी 23 अक्टूबर को तय किया गया है, जबकि इसके ठीक बाद वोटो की गिनती कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। नामांकन प्रक्रिया के तहत लगातार पर्चे दाखिल हो रहे हैं और जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के दिग्गजों का जनसंपर्क अभियान भी तेज होता जा रहा है।
"बिहार विधान परिषद के इन चुनावों में एनडीए पूरी तरह एकजुट होकर उतर रहा है। हमारे सभी घटक दल आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं और हमें पूरा विश्वास है कि हम सभी आठों सीटों पर भारी मतों से विजय प्राप्त करेंगे।" — भाजपा प्रदेश नेतृत्व
निष्कर्ष और आगे की सियासी राह
बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों का चुनाव महज कुछ जनप्रतिनिधियों को चुनने भर का जरिया नहीं है, बल्कि यह आगामी बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का ट्रेलर भी माना जा रहा है। एक तरफ जहां सत्ताधारी एनडीए अपनी पुरानी सियासी जमीन को और अधिक मजबूत करने की जुगत में है, वहीं विपक्ष और नई राजनीतिक ताकतें अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही हैं। शिक्षक और स्नातक मतदाता हमेशा से जागरूक और सरकार के कामकाज का बारीकी से आकलन करने वाले माने जाते हैं, इसलिए इस वर्ग का विश्वास जीतना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार का शोर और तेज होने की उम्मीद है।








