होम/राजनीति/टाटा का वह ऐतिहासिक साबुन: अस्सी के दशक में अमीरों की शान और बाथरूम की रौनक, जानें कैसे हुई शुरुआत
राजनीतिपढ़ने में समय: 7 मिनट

टाटा का वह ऐतिहासिक साबुन: अस्सी के दशक में अमीरों की शान और बाथरूम की रौनक, जानें कैसे हुई शुरुआत

नब्बे के दशक के शुरुआती दौर में हर घर में अपनी खास जगह रखने वाला 'मोती साबुन' एक समय में विलासिता और स्टेटस का प्रतीक हुआ करता था। टाटा ऑयल मिल्स (TOMCO) के इस अनूठे प्रयोग ने भारतीय कंज्यूमर मार्केट में तहलका मचा दिया था, लेकिन बदलते वक्त और कॉरपोरेट विलय के चलते यह चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ गई। आइए जानते हैं उस सुनहरे दौर की कहानी जब एक साबुन खरीदना भी किसी लग्जरी अनुभव से कम नहीं था।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
21 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
टाटा का वह ऐतिहासिक साबुन: अस्सी के दशक में अमीरों की शान और बाथरूम की रौनक, जानें कैसे हुई शुरुआत
📷 टाटा का वह ऐतिहासिक साबुन: अस्सी के दशक में अमीरों की शान और बाथरूम की रौनक, जानें कैसे हुई शुरुआत — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मोती साबुन का अनोखा डिजाइन और गोल आकार इसे उस दौर के बाकी साबुनों से बिल्कुल अलग और खास बनाता था।
  • यह उत्पाद टाटा ऑयल मिल्स यानी TOMCO के बैनर तले तैयार किया गया था, जो बाद में हिंदुस्तान यूनिलीवर में विलीन हो गया।
  • नब्बे के दशक के उत्तरार्ध में हर्बल और आयुर्वेदिक साबुनों के आने से इस लग्जरी ब्रांड को कड़ी टक्कर मिली।
प्रायोजित • SPONSOREDVoterAction Campaign Suite
VoterAction - कागज़ पर नहीं, ऐप पर लड़े जाते हैं चुनाव | अभियान की पूरी कमान

जब बाथरूम में पहुंचता था 'मोती', एक अलग ही ठाट-बाट का होता था अहसास

भारतीय बाजार का इतिहास कई ऐसे आइकॉनिक ब्रांड्स से भरा पड़ा है, जिन्होंने आम जनजीवन पर अमिट छाप छोड़ी है। अस्सी और नब्बे के दशक में जब विज्ञापनों और उत्पादों की दुनिया आज जितनी विविधतापूर्ण नहीं थी, तब कुछ चुनिंदा उत्पाद ही घरों की शान हुआ करते थे। ऐसा ही एक नाम था 'मोती साबुन'। इस साबुन का जिक्र आते ही उस दौर के लोगों के जेहन में एक अलग ही खुशबू और उसकी अनोखी गोल बनावट ताजा हो जाती है। यह केवल नहाने का एक माध्यम नहीं था, बल्कि मध्यवर्ग और उच्च वर्ग के लिए यह एक लाइफस्टाइल स्टेटमेंट बन चुका था। जब घर में मेहमान आते थे, तो इस साबुन को विशेष रूप से बाथरूम में रखा जाता था, जो घर के मालिक के अच्छे और आधुनिक स्वाद की गवाही देता था।

टाटा समूह हमेशा से अपनी दूरदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के लिए जाना जाता रहा है। टाटा ऑयल मिल्स कंपनी यानी TOMCO ने जब इस उत्पाद को बाजार में उतारा, तो इसके पीछे एक बेहद स्पष्ट रणनीति थी। कंपनी जानती थी कि भारतीय उपभोक्ता अब पारंपरिक चीजों से आगे बढ़कर कुछ ऐसा चाहते हैं जो प्रीमियम अहसास कराए। मोती साबुन का वजन, उसकी महक और उसकी पैकेजिंग सब कुछ इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह ग्राहकों को पहली नजर में ही आकर्षित कर ले। यही वजह थी कि देखते ही देखते यह साबुन देश के हर संभ्रांत परिवार के बाथरूम की शोभा बढ़ाने लगा और इसकी गिनती देश के सबसे प्रीमियम उत्पादों में होने लगी।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

शेयर बाजार में निवेश के नए रास्ते खुले: SEBI के इन बड़े बदलावों से आम निवेशकों को होगा तगड़ा फायदा

शेयर बाजार में निवेश के नए रास्ते खुले: SEBI के इन बड़े बदलावों से आम निवेशकों को होगा तगड़ा फायदा

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्य

ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्य

बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारी

बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारी

पॉलिसीबाजार के शेयर में भारी भूचाल: एक नए सरकारी नियम से निवेशकों में मचा हड़कंप, जानिए क्या है माजरा

पॉलिसीबाजार के शेयर में भारी भूचाल: एक नए सरकारी नियम से निवेशकों में मचा हड़कंप, जानिए क्या है माजरा

बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशन

बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशन

डीजल पर नया संकट: पेट्रोल पंपों पर राशनिंग शुरू, एक दिन में खरीदने की सीमा तय

डीजल पर नया संकट: पेट्रोल पंपों पर राशनिंग शुरू, एक दिन में खरीदने की सीमा तय

भारत में बन रही दुनिया की सबसे लंबी एलपीजी पाइपलाइन, दस हजार करोड़ की लागत से बदलेगी देश की ऊर्जा तस्वीर

भारत में बन रही दुनिया की सबसे लंबी एलपीजी पाइपलाइन, दस हजार करोड़ की लागत से बदलेगी देश की ऊर्जा तस्वीर

टाटा ऑयल मिल्स (TOMCO) और इस खूबसूरत प्रयोग की पूरी दास्तान

टाटा ऑयल मिल्स कंपनी का भारतीय उपभोक्ता बाजार में एकछत्र राज हुआ करता था। कंपनी ने अनुसंधान और विकास पर खासा जोर दिया और ऐसे उत्पाद तैयार किए जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते थे। मोती साबुन का निर्माण इसी कड़ी का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा था। उस समय ज्यादातर साबुन सामान्य आयताकार होते थे, लेकिन टाटा ने इसके डिजाइन के साथ बड़ा प्रयोग किया। इसे पूरी तरह से गोल आकार दिया गया, जो हाथ में पकड़ने में बेहद आरामदायक था और पानी में जल्दी घुलता भी नहीं था। इसकी खुशबू इतनी सधी हुई और तेज थी कि पूरा कमरा महक उठता था।

कंपनी ने इसकी मार्केटिंग के लिए भी एक अनोखा तरीका अपनाया। इसे रोजमर्रा की जरूरत के बजाय एक विशेषाधिकार के रूप में बेचा गया। विज्ञापनों में इसकी चमक और इसकी बनावट पर जोर दिया जाता था। मध्यम वर्ग के लोग अक्सर इसे त्योहारों या खास अवसरों पर खरीदते थे या फिर मेहमानों के आने पर ही इसका इस्तेमाल होता था। इस प्रकार, यह उत्पाद धीरे-धीरे भारतीय परिवारों की यादों का एक अटूट हिस्सा बन गया। अस्सी के दशक के अंत तक बाजार में इसका दबदबा इस हद तक बढ़ चुका था कि अन्य कंपनियां इस तरह के उत्पाद उतारने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थीं।

"मोती साबुन सिर्फ एक उपभोक्ता वस्तु नहीं थी, बल्कि यह उस दौर के भारतीय मध्यम वर्ग की तरक्की और आधुनिक जीवनशैली अपनाने की एक छोटी सी बानगी थी। इसकी खुशबू आज भी कई लोगों को उनके बचपन और बीते दिनों की याद दिला देती है।" — बाजार विश्लेषक और उपभोक्ता इतिहासकार

नब्बे का दशक और कॉर्पोरेट जगत में आए बड़े बदलाव

हर सुनहरे दौर की तरह, मोती साबुन के सुनहरे सफर में भी बदलाव का दौर आना तय था। साल 1993 भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में एक बड़े मील का पत्थर के रूप में दर्ज है, जब टाटा ऑयल मिल्स (TOMCO) का विलय देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी 'हिंदुस्तान यूनिलीवर' (HUL) में हो गया। इस विलय के साथ ही भारतीय साबुन बाजार का समीकरण पूरी तरह से बदलने लगा। एक नई प्रबंधन रणनीति के तहत बाजार की प्राथमिकताओं का पुनर्गठन किया गया। एचयूएल के पास पहले से ही कई स्थापित और मजबूत ब्रांड मौजूद थे, जिसके चलते बाजार में आंतरिक प्रतिस्पर्धा का एक नया दौर शुरू हो गया।

इस विलय के बाद कॉर्पोरेट बोर्डरूम की प्राथमिकताएं बदल चुकी थीं। कंपनी का ध्यान अब बड़े पैमाने पर बिकने वाले और मास-मार्केट प्रोडक्ट्स पर अधिक केंद्रित हो गया। मोती साबुन, जो कि एक विशेष और सीमित वर्ग के लिए प्रीमियम उत्पाद के रूप में अपनी पहचान बना चुका था, उसे वह समर्थन और मार्केटिंग का बूस्ट नहीं मिल पाया जिसकी उसे इस नए दौर में जरूरत थी। इसके परिणामस्वरूप, धीरे-धीरे इसकी रीच कम होने लगी और यह केवल चुनिंदा दुकानों तक ही सिमट कर रह गया, जबकि अन्य ब्रांड्स ने देश के कोने-कोने में अपनी पैठ मजबूत कर ली थी।

हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पादों की आंधी में कैसे पिछड़ गया मोती?

नब्बे के दशक के उत्तरार्ध में भारतीय बाजार का मिजाज पूरी तरह बदल रहा था। लोग अब केवल खुशबू और चमक वाले साबुनों से आगे बढ़कर प्राकृतिक और आयुर्वेदिक गुणों की तलाश करने लगे थे। मैसूर सैंडल जैसे पारंपरिक चंदन के साबुन, नीम आधारित उत्पाद और धीरे-धीरे बाजार में कदम रख रहे हर्बल ब्रांड्स ने ग्राहकों का रुख मोड़ना शुरू कर दिया। उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं अब त्वचा की देखभाल, प्राकृतिक तत्वों और औषधीय गुणों की ओर शिफ्ट हो रही थीं, जहां मोती साबुन अपनी क्लासिक फॉर्मूलेशन के साथ थोड़ा पीछे छूटता नजर आया।

इसके अलावा, साल 2000 के दशक की शुरुआत में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) ने भारतीय बाजार में आक्रामक एंट्री ली। आधुनिक पैकेजिंग, आकर्षक विज्ञापनों और सस्ते विकल्पों के साथ इन नई कंपनियों ने बाजार में खलबली मचा दी। इस गलाकाट प्रतिस्पर्धा के बीच मोती साबुन अपनी पुरानी चमक को बनाए रखने के लिए संघर्ष करता दिखा। साल 2010 तक आते-आते स्थिति यह हो गई कि इस प्रतिष्ठित साबुन का मार्केट शेयर सिमटकर मात्र 20 फीसदी के आसपास ही रह गया। आम बाजार की अलमारियों और दुकानों से यह धीरे-धीरे गायब होने लगा और एक लीजेंडरी ब्रांड का सफर इतिहास के पन्नों में दर्ज होने की कगार पर पहुंच गया।

एक लीजेंड की विरासत जो आज भी दिलों में जिंदा है

आज भले ही मोती साबुन आपको रोजमर्रा की दुकानों पर आसानी से देखने को न मिले, लेकिन अस्सी और नब्बे के दशक में बड़े हुए लोगों के दिलों में इसकी जगह आज भी उतनी ही खास है। यह साबुन इस बात का गवाही देता है कि भारतीय बाजार ने पिछले कुछ दशकों में कितनी लंबी छलांग लगाई है। वैश्वीकरण और खुले बाजार की नीतियों ने हमें अनगिनत विकल्प दिए हैं, लेकिन पुरानी यादों और उन उत्पादों से जुड़ाव की बात ही कुछ और है। टाटा समूह का यह प्रयोग इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती पसंद के बीच एक ब्रांड ने अपनी अमिट छाप छोड़ी।

आधुनिक दौर में जब हम बाजार में अनगिनत प्रीमियम और केमिकल-फ्री उत्पाद देखते हैं, तो पुरानी पीढ़ी अक्सर उन दिनों को याद करती है जब एक गोल मोती साबुन बाथरूम की शान हुआ करता था। यह सिर्फ एक वस्तु के लुप्त होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे सफर की दास्तान है जिसने भारतीय कंज्यूमर मार्केट को परिपक्व बनाने में अहम भूमिका निभाई। भले ही समय के साथ इसका व्यावसायिक साम्राज्य सिमट गया हो, लेकिन इसकी खुशबू और इसकी यादें हमेशा भारतीय मध्यम वर्ग के नॉस्टैल्जिया का एक बेहद खूबसूरत हिस्सा बनी रहेंगी।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED

संबंधित खबरें (Related Articles)

शेयर बाजार में निवेश के नए रास्ते खुले: SEBI के इन बड़े बदलावों से आम निवेशकों को होगा तगड़ा फायदाNATIONAL

शेयर बाजार में निवेश के नए रास्ते खुले: SEBI के इन बड़े बदलावों से आम निवेशकों को होगा तगड़ा फायदा

25 सित॰
बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानीNATIONAL

बिहार के इन दो युवाओं ने कर दिखाया कमाल: छोटे से आइडिया से खड़ा कर दिया करोड़ों का कारोबार, जानें पूरी कहानी

25 सित॰
ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्यNATIONAL

ग्रीन हाइड्रोजन से चमकेगी गाड़ियों की दुनिया: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव, जानिए कैसे बदलेगा कारों का भविष्य

25 सित॰
बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारीNATIONAL

बड़ी चेतावनी! एलपीजी सिलेंडर पर लागू होगा 10 साल पुराना नियम, ई-केवाईसी नहीं कराई तो जेब पर पड़ेगा भारी

25 सित॰
पॉलिसीबाजार के शेयर में भारी भूचाल: एक नए सरकारी नियम से निवेशकों में मचा हड़कंप, जानिए क्या है माजराNATIONAL

पॉलिसीबाजार के शेयर में भारी भूचाल: एक नए सरकारी नियम से निवेशकों में मचा हड़कंप, जानिए क्या है माजरा

24 सित॰
बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशनNATIONAL

बदल गया ईपीएफओ का पेंशन नियम: सैलरी 25 हजार होने पर अब रिटायरमेंट पर मिलेगा भारी फायदा, जानिए कैलकुलेशन

24 सित॰
डीजल पर नया संकट: पेट्रोल पंपों पर राशनिंग शुरू, एक दिन में खरीदने की सीमा तयNATIONAL

डीजल पर नया संकट: पेट्रोल पंपों पर राशनिंग शुरू, एक दिन में खरीदने की सीमा तय

24 सित॰
भारत में बन रही दुनिया की सबसे लंबी एलपीजी पाइपलाइन, दस हजार करोड़ की लागत से बदलेगी देश की ऊर्जा तस्वीरNATIONAL

भारत में बन रही दुनिया की सबसे लंबी एलपीजी पाइपलाइन, दस हजार करोड़ की लागत से बदलेगी देश की ऊर्जा तस्वीर

24 सित॰