नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों उद्धव ठाकरे का नाम खूब चर्चा में है। गूगल ट्रेंड्स पर भी उनकी हलचल साफ दिख रही है। हाल ही में एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने सबको चौंका दिया। उद्धव ठाकरे अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ एक मंच पर आए। दोनों ने मिलकर मुंबई के शिवाजी पार्क में एक मौन प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। इस घटना ने महाराष्ट्र की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है।
द फ्रीलान्स के फील्ड रिपोर्टर के तौर पर हमने इस पूरे घटनाक्रम को करीब से देखा। उद्धव और राज ठाकरे का एक साथ आना कोई छोटी बात नहीं है। लंबे समय से दोनों भाइयों के रास्ते अलग थे। शिवसेना में फूट के बाद उद्धव ठाकरे के लिए यह एक बड़ा सहारा हो सकता है। इस मौन प्रदर्शन का मकसद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताना था। मुंबई की सड़कों पर दोनों भाइयों के समर्थकों का जमावड़ा दिखा।
शिवाजी पार्क में भाई-भाई का साथ: क्या बदलेगी महाराष्ट्र की सियासत?
मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए इस मौन प्रदर्शन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ एक मुद्दे पर साथ आना था? या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई दोस्ती की शुरुआत है? इस प्रदर्शन में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ता शामिल हुए। दोनों दलों के झंडे एक साथ लहराते दिखे। यह नजारा अपने आप में बहुत कुछ कह रहा था। कई सालों बाद ठाकरे परिवार के दो बड़े नेता एक साथ दिखे।
इस प्रदर्शन से एक मजबूत संदेश गया है। खासकर उन लोगों के लिए जो ठाकरे परिवार को बंटा हुआ मानते थे। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुटता दिखाकर दोनों भाइयों ने अपनी ताकत का अहसास कराया। यह दिखाता है कि कुछ मुद्दों पर वे अपने पुराने मतभेद भुला सकते हैं। आने वाले समय में इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति पर दिख सकता है। खासकर बीएमसी चुनावों और विधानसभा चुनावों में यह नई केमिस्ट्री काम आ सकती है।
एक तरफ यह नई दोस्ती पनप रही है, वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे को INDIA गठबंधन में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में INDIA गठबंधन की एक बैठक में उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें ठीक नहीं हो रही हैं। यह बात मीडिया में भी खूब उछली। गठबंधन के भीतर की यह खींचतान उद्धव ठाकरे के लिए नई परेशानी खड़ी कर रही है।
INDIA गठबंधन में उद्धव की मुश्किलें: अंदरूनी खींचतान और इस्तीफे का असर
INDIA गठबंधन में उद्धव ठाकरे की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। गठबंधन के प्रदर्शन के बीच ही उन्हें एक और झटका लगा। उनकी पार्टी के एक प्रवक्ता ने इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब गठबंधन अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है। प्रवक्ता के इस्तीफे से पार्टी के भीतर भी कुछ बेचैनी दिख रही है। यह दिखाता है कि उद्धव ठाकरे को अपने घर और बाहर दोनों जगह संतुलन बनाना पड़ रहा है।
कांग्रेस के साथ अनबन और प्रवक्ता का इस्तीफा, ये दोनों बातें उद्धव ठाकरे के लिए चिंता का विषय हैं। INDIA गठबंधन में उनकी भूमिका और ताकत पर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर गठबंधन के भीतर ही तालमेल ठीक नहीं होगा, तो आने वाले चुनावों में इसका नुकसान हो सकता है। उद्धव ठाकरे को अब इन अंदरूनी मसलों को सुलझाने पर भी ध्यान देना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी पार्टी और गठबंधन दोनों मजबूत रहें।
इन सब के बीच, उद्धव ठाकरे के सामने एक और बड़ी चुनौती है। यह चुनौती दशहरा रैली को लेकर है। हर साल शिवाजी पार्क में शिवसेना की दशहरा रैली होती है। यह रैली शिवसेना की पहचान का एक अहम हिस्सा रही है। लेकिन इस बार एकनाथ शिंदे गुट ने भी शिवाजी पार्क में रैली करने का दावा किया है। 20 अक्टूबर को होने वाली इस रैली को लेकर दोनों गुटों में जबरदस्त टक्कर है।
दशहरा रैली की जंग: शिंदे बनाम ठाकरे, शिवाजी पार्क पर किसका हक?
दशहरा रैली सिर्फ एक सभा नहीं है। यह शिवसेना की परंपरा और विरासत का प्रतीक है। बालासाहेब ठाकरे हमेशा शिवाजी पार्क से ही दशहरा रैली को संबोधित करते थे। अब उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे दोनों इस विरासत पर अपना हक जता रहे हैं। टीजर जारी कर दोनों गुटों ने अपना एजेंडा सेट कर दिया है। यह लड़ाई सिर्फ मैदान की नहीं, बल्कि शिवसेना की असली पहचान की भी है।
शिवाजी पार्क में रैली करने की अनुमति किसे मिलेगी, यह अभी साफ नहीं है। प्रशासन इस पर फैसला लेगा। लेकिन यह तय है कि जो भी गुट शिवाजी पार्क में रैली करेगा, उसे एक बड़ी राजनीतिक बढ़त मिलेगी। यह रैली दोनों गुटों के लिए अपनी ताकत दिखाने का मौका होगी। उद्धव ठाकरे के लिए यह रैली इसलिए भी खास है क्योंकि उन्हें अपनी पार्टी और समर्थकों को एकजुट रखना है। शिंदे गुट भी अपनी नई पहचान बनाने में जुटा है।
द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि उद्धव ठाकरे इस समय एक चौराहे पर खड़े हैं। एक तरफ उन्हें अपने चचेरे भाई राज ठाकरे का अप्रत्याशित साथ मिला है। यह उनके लिए एक नई उम्मीद हो सकती है। दूसरी तरफ, INDIA गठबंधन में उन्हें अंदरूनी कलह और इस्तीफों से जूझना पड़ रहा है। वहीं, दशहरा रैली को लेकर एकनाथ शिंदे से उनकी सीधी टक्कर है। महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे का भविष्य इन सभी मोर्चों पर उनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। आने वाले दिन उनकी राजनीतिक यात्रा के लिए बेहद अहम साबित होंगे।









