मुंबई/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन को लेकर सुगबुगाहट तेज है, वहीं महाराष्ट्र की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के एक जाने-माने प्रवक्ता ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस इस्तीफे के बाद से पार्टी के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस्तीफा देने वाले नेता ने पार्टी की कार्यप्रणाली और कुछ हालिया फैसलों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने पत्र में उन मुद्दों का जिक्र किया है जो पिछले कुछ हफ्तों से पार्टी के भीतर अंदरखाने सुलग रहे थे। चुनाव के इस अहम समय में इस तरह का इस्तीफा पार्टी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता भी इस अचानक हुए घटनाक्रम से हैरान नजर आ रहे हैं।
पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और बगावत के सुर
शिवसेना (यूबीटी) के भीतर पिछले कुछ महीनों से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लोकसभा चुनावों के बाद से ही पार्टी के कई नेता अपनी उपेक्षा से नाराज बताए जा रहे हैं। इस्तीफा देने वाले प्रवक्ता ने पार्टी नेतृत्व पर संवाद की कमी का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जमीनी कार्यकर्ताओं की बात अब बड़े नेताओं तक नहीं पहुंच पा रही है। इस घटना के बाद विरोधी दलों को भी उद्धव ठाकरे पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस इस्तीफे का असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को अगर समय रहते नहीं संभाला गया, तो और भी कई नेता बगावत का रुख कर सकते हैं। उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। वे नाराज नेताओं से संपर्क साधकर उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि पार्टी में और टूट न हो सके।
INDIA गठबंधन की बैठकों और सीट बंटवारे पर असर
एक तरफ जहां पूरा विपक्ष मिलकर आगामी चुनावों की रणनीति बना रहा है, वहीं इस तरह की अंदरूनी कलह गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े करती है। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर भी अभी पूरी तरह से सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे समय में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता का इस्तीफा देना गठबंधन के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विरोधी दल इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं।
आम जनता और स्थानीय मतदाताओं के बीच भी इस बात की चर्चा है कि क्या उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को एकजुट रख पाएंगे। पार्टी के वफादार कार्यकर्ता इस स्थिति से खासे परेशान हैं। वे चाहते हैं कि शीर्ष नेतृत्व जल्द से जल्द इस मामले को सुलझाए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उद्धव ठाकरे इस राजनीतिक संकट से कैसे निपटते हैं और क्या नाराज नेताओं की घर वापसी हो पाती है या नहीं।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल और आगे की राह
हमारी टीम ने जब मुंबई में पार्टी कार्यालय और स्थानीय कार्यकर्ताओं से बात की, तो एक अलग ही तस्वीर सामने आई। कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि पार्टी को अपनी पुरानी आक्रामक शैली में वापस लौटना होगा। केवल बड़े फैसलों से काम नहीं चलेगा, बल्कि निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को सम्मान देना होगा। इस्तीफा देने वाले नेता के अगले राजनीतिक कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं कि क्या वे किसी अन्य दल का दामन थामेंगे या निर्दलीय रहेंगे।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर एक रोमांचक मोड़ पर आ गई है। चुनाव नजदीक हैं और हर एक दल फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। ऐसे में उद्धव ठाकरे के सामने अपनी पार्टी को बचाए रखने और INDIA गठबंधन में अपनी साख मजबूत बनाए रखने की दोहरी चुनौती है। आने वाला हफ्ता तय करेगा कि राज्य की राजनीति किस करवट बैठती है।




