नई दिल्ली और कीव से प्राप्त ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस और यूक्रेन के बीच हालात एक बार फिर से बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। पिछले कुछ समय से शांति की जो उम्मीदें बंध रही थीं, वे अब पूरी तरह से टूट चुकी हैं। यूक्रेन की सेना ने सीधे तौर पर रूस के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और एयरफील्ड को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा सैन्य रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन हमलों में रूस के कम से कम छह एसयू-34एम लड़ाकू जेट पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच जंग का दायरा और अधिक व्यापक होने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मध्यस्थता की कोशिशें फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही हैं। ट्रंप का सुझाया गया तथाकथित 'एनर्जी सीजफायर' या ऊर्जा समझौतों का प्रस्ताव अब जमीन पर दम तोड़ चुका है। इसी नाकामी के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस के तेल रिफाइनरियों और ईंधन भंडारों पर सीधे हमले करने की अपनी योजना को हरी झंडी दे दी है। यूक्रेन का मानना है कि रूस की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उसके तेल अड्डों पर चोट करना अब बेहद जरूरी हो गया है ताकि युद्ध के मैदान में उसकी ताकत कम हो सके।
इंटरनेट और सैटेलाइट सेवाओं में कटौती से यूक्रेन को बड़ा झटका
इस बीच, युद्ध के मैदान से एक और बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है जहां यूक्रेन को अमेरिका की तरफ से दोतरफा झटका मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के अमीर कारोबारी एलन मस्क की कंपनी ने यूक्रेन में अपनी इंटरनेट सेवाओं की स्पीड में खासी कमी कर दी है। यूक्रेन की सेना युद्ध के दौरान रणनीतिक संवाद और ड्रोन संचालन के लिए मिलिट्री-ग्रेड सैटेलाइट इंटरनेट का भारी पैमाने पर इस्तेमाल करती आ रही है। इस तकनीकी बाधा और गति में कमी के कारण यूक्रेनी सैनिकों को मैदान पर अपने सामरिक अभियानों को अंजाम देने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिकी सहयोग और तकनीकी मोर्चे पर आ रही इन रुकावटों के बावजूद यूक्रेनी नेतृत्व अपने फैसलों पर पूरी तरह अडिग नजर आ रहा है। उनका साफ कहना है कि देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए वे हरसंभव कदम उठाने को तैयार हैं। रूस के तेल नेटवर्क को निशाना बनाकर वे युद्ध के रुख को पलटने की कोशिश में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष केवल जमीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देश एक-दूसरे की आर्थिक और ऊर्जा से जुड़ी रीढ़ को तोड़ने के लिए और भी बड़े हमले कर सकते हैं।
रूस और भारत के बीच रोजगार समझौते को मिली मंजूरी
एक अन्य महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में, रूस ने भारत के साथ हुए एक अहम रोजगार समझौते को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच श्रम शक्ति के आदान-प्रदान और रोजगार के अवसरों से जुड़े कई अहम कानूनी व प्रशासनिक पहलुओं को स्पष्ट किया गया है। हालांकि इस वैश्विक समझौते के तमाम विवरण अभी सामने आ रहे हैं, लेकिन सामरिक और कूटनीतिक हलकों में इसे काफी अहम माना जा रहा है। रूस की घरेलू और रक्षा नीतियों में लगातार हो रहे इन बदलावों के बीच भारत के साथ हुआ यह नया करार कूटनीतिक रूप से काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
जमीनी स्तर पर स्थिति लगातार बदल रही है और किसी भी वक्त किसी बड़े सैन्य घटनाक्रम के होने की पूरी संभावना बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी इस बात से चिंतित है कि अगर ऊर्जा संयंत्रों और रिफाइनरियों पर हमले यूं ही जारी रहे, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही युद्ध के मैदान से कोई नया अपडेट आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।







