होम/राजनीति/इराक से अमेरिकी सेना की विदाई: 21 साल का खूनी इतिहास, 4500 मौतें और अरबों डॉलर का हिसाब
राजनीतिपढ़ने में समय: 3 मिनट

इराक से अमेरिकी सेना की विदाई: 21 साल का खूनी इतिहास, 4500 मौतें और अरबों डॉलर का हिसाब

दो दशकों से अधिक समय तक इराक की धरती पर खूनी संघर्ष का गवाह रहे अमेरिका ने आखिरकार अपनी सेना को वापस बुलाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस युद्ध में 4500 से अधिक अमेरिकी जवानों की जान गई और अरबों डॉलर का भारी नुकसान हुआ, जिसका असर आज भी वैश्विक भू-राजनीति और अमेरिकी राजनीति, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर साफ दिखाई दे रहा है।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•29 सितंबर 2026 • अपडेटेड•28
🌐Read in English →
शेयर करें:
इराक से अमेरिकी सेना की विदाई: 21 साल का खूनी इतिहास, 4500 मौतें और अरबों डॉलर का हिसाब
📷 इराक से अमेरिकी सेना की विदाई: 21 साल का खूनी इतिहास, 4500 मौतें और अरबों डॉलर का हिसाब — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • दो दशकों से अधिक समय तक इराक की धरती पर खूनी संघर्ष का गवाह रहे अमेरिका ने आखिरकार अपनी सेना को वापस बुलाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस युद्ध में 4500 से अधिक अमेरिकी जवानों की जान गई और अरबों डॉलर का भारी नुकसान हुआ, जिसका असर आज भी वैश्विक भू-राजनीति और अमेरिकी राजनीति, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर साफ दिखाई दे रहा है।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

मैं जब भी वैश्विक संघर्षों के इतिहास को खंगालता हूं, तो 21 साल पहले शुरू हुई इराक की वह जंग जेहन में कौंध जाती है जिसने मध्य पूर्व के नक्शे को हमेशा के लिए बदल दिया। आज जब हम 'द फ्रीलान्स' के मंच से इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल की पड़ताल कर रहे हैं, तो आंकड़े खुद चीख-चीखकर उस तबाही की गवाही दे रहे हैं जो इस युद्ध के नाम पर दुनिया ने झेली। 4,500 से अधिक अमेरिकी जवानों की मौत और अरबों-खरबों डॉलर का भारी-भरकम खर्च—यह सिर्फ कागजी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इंसानी त्रासदी की एक कभी न भरने वाली दास्तां है।

9/11 के बाद की वह आग और इराक का मोड़

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें 9/11 के उस विनाशकारी आतंकी हमले में जुड़ी हैं, जिसने अमेरिका की सुरक्षा नीति को झकझोर कर रख दिया था। अल-कायदा के उस हमले के बाद पैदा हुए वैश्विक सुरक्षा संकट का दायरा बढ़ाते हुए अमेरिका ने सद्दाम हुसैन के खात्मे के नाम पर इराक में सैन्य दखल दिया। इतिहास गवाह है कि कैसे एक आतंकवाद विरोधी अभियान धीरे-धीरे मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य दलदल में बदल गया, जिससे इजरायल-फिलीस्तीन संघर्ष जैसे क्षेत्रीय तनाव भी और अधिक जटिल होते चले गए।

संबंधित खबरें

दिल्ली की अदालत का ऐतिहासिक फैसला: रेप पीड़ित बच्ची को जज ने लिखा पत्र, कहा- 'दोषी कभी आजाद नहीं घूमेगा'

दिल्ली की अदालत का ऐतिहासिक फैसला: रेप पीड़ित बच्ची को जज ने लिखा पत्र, कहा- 'दोषी कभी आजाद नहीं घूमेगा'

महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली-एनसीआर में 4 हफ्ते के भीतर होगा संवेदनशील इलाकों का सुरक्षा ऑडिट

महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली-एनसीआर में 4 हफ्ते के भीतर होगा संवेदनशील इलाकों का सुरक्षा ऑडिट

बडगाम एनकाउंटर: यूसमर्ग के जंगलों में 'ऑपरेशन अशदर' और लश्कर कमांडर मूसा का अंत

बडगाम एनकाउंटर: यूसमर्ग के जंगलों में 'ऑपरेशन अशदर' और लश्कर कमांडर मूसा का अंत

रूस की दो टूक: पैट्रियट मिसाइल पर लावरोव की चेतावनी और भारत की कूटनीतिक हलचल

रूस की दो टूक: पैट्रियट मिसाइल पर लावरोव की चेतावनी और भारत की कूटनीतिक हलचल

चुनावी सरगर्मियों के बीच सोशल मीडिया पर वायरल होती फेक खबरों और बयानों की हकीकत

चुनावी सरगर्मियों के बीच सोशल मीडिया पर वायरल होती फेक खबरों और बयानों की हकीकत

लामिन यमाल और लियोनेल मेसी: एक तस्वीर जो फुटबॉल के भविष्य की कहानी कह रही है

लामिन यमाल और लियोनेल मेसी: एक तस्वीर जो फुटबॉल के भविष्य की कहानी कह रही है

जिसे तुम 'अंकल' कहती थी, वह अब पिंजरे में रहेगा: अदालत का ऐतिहासिक और भावुक संदेश

जिसे तुम 'अंकल' कहती थी, वह अब पिंजरे में रहेगा: अदालत का ऐतिहासिक और भावुक संदेश

स्पेन की राजनीतिक भंवर: बुर्का प्रतिबंध, 87 वर्षीय महिला का आंदोलन और वैश्विक कूटनीति के नए आयाम

स्पेन की राजनीतिक भंवर: बुर्का प्रतिबंध, 87 वर्षीय महिला का आंदोलन और वैश्विक कूटनीति के नए आयाम

डोनाल्ड ट्रंप का रुख और बदलती अमेरिकी कूटनीति

हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर गौर करें तो स्पष्ट हो जाता है कि अमेरिकी जनता अब 'अनंतकाल तक चलने वाले युद्धों' (Endless Wars) से ऊब चुकी है। ट्रंप प्रशासन से लेकर वर्तमान राजनीतिक गलियारों तक, यह बहस तेज हो गई है कि विदेशों में अरबों डॉलर झोंकने के बजाय घरेलू मोर्चे पर ध्यान देना क्यों जरूरी है। इराक से सैनिकों की यह वापसी इसी बदलती हुई अमेरिकी कूटनीति और घरेलू राजनीतिक दबाव का परिणाम है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगा।

मिट्टी पर खड़े सवाल: क्या सच में खत्म हुआ आतंकवाद?

एक फील्ड रिपोर्टर के रूप में जब हम जमीनी हकीकत टटोलते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या दो दशकों की इस भारी सैन्य मौजूदगी से इराक में वाकई शांति स्थापित हो पाई? सच तो यह है कि अमेरिकी सेना की वापसी के बाद भी इराक और आस-पास का क्षेत्र गहरे राजनीतिक और sectarian संकटों से जूझ रहा है। अल-कायदा के बाद आईएसआईएस जैसे संगठनों का उदय और सत्ता का संघर्ष इस बात का सबूत है कि सैन्य ताकत से वैचारिक और सामाजिक दरारों को भरा नहीं जा सकता।

भविष्य का भू-राजनीतिक असर

  • मध्य पूर्व में शक्ति का नया संतुलन उभर रहा है, जहां क्षेत्रीय ताकतें अमेरिका की गैर-मौजूदगी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
  • अमेरिकी रक्षा बजट और विदेश नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसमें विदेशों में बड़े पैमाने पर सैनिकों की तैनाती से बचा जा रहा है।
  • इराक की आंतरिक सुरक्षा पर अब स्थानीय बलों और मिलिशिया समूहों का प्रभाव बढ़ने की पूरी संभावना है।

अंततः, 21 साल बाद इराक से अमेरिकी सेना की विदाई इस बात का स्वीकारोक्ति है कि ताकत के बल पर हर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। यह इतिहास के एक बेहद महंगे और खूनी अध्याय का अंत तो है, लेकिन मध्य पूर्व के भविष्य के गर्भ में अभी कई और अनिश्चितताएं छिपी हुई हैं।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

दिल्ली की अदालत का ऐतिहासिक फैसला: रेप पीड़ित बच्ची को जज ने लिखा पत्र, कहा- 'दोषी कभी आजाद नहीं घूमेगा'CRIME

दिल्ली की अदालत का ऐतिहासिक फैसला: रेप पीड़ित बच्ची को जज ने लिखा पत्र, कहा- 'दोषी कभी आजाद नहीं घूमेगा'

30 सित॰43
महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली-एनसीआर में 4 हफ्ते के भीतर होगा संवेदनशील इलाकों का सुरक्षा ऑडिटPOLITICS

महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली-एनसीआर में 4 हफ्ते के भीतर होगा संवेदनशील इलाकों का सुरक्षा ऑडिट

30 सित॰27
बडगाम एनकाउंटर: यूसमर्ग के जंगलों में 'ऑपरेशन अशदर' और लश्कर कमांडर मूसा का अंतNATIONAL

बडगाम एनकाउंटर: यूसमर्ग के जंगलों में 'ऑपरेशन अशदर' और लश्कर कमांडर मूसा का अंत

30 सित॰33
रूस की दो टूक: पैट्रियट मिसाइल पर लावरोव की चेतावनी और भारत की कूटनीतिक हलचलPOLITICS

रूस की दो टूक: पैट्रियट मिसाइल पर लावरोव की चेतावनी और भारत की कूटनीतिक हलचल

30 सित॰46
चुनावी सरगर्मियों के बीच सोशल मीडिया पर वायरल होती फेक खबरों और बयानों की हकीकतNATIONAL

चुनावी सरगर्मियों के बीच सोशल मीडिया पर वायरल होती फेक खबरों और बयानों की हकीकत

30 सित॰40
लामिन यमाल और लियोनेल मेसी: एक तस्वीर जो फुटबॉल के भविष्य की कहानी कह रही हैSPORTS

लामिन यमाल और लियोनेल मेसी: एक तस्वीर जो फुटबॉल के भविष्य की कहानी कह रही है

30 सित॰49
जिसे तुम 'अंकल' कहती थी, वह अब पिंजरे में रहेगा: अदालत का ऐतिहासिक और भावुक संदेशCRIME

जिसे तुम 'अंकल' कहती थी, वह अब पिंजरे में रहेगा: अदालत का ऐतिहासिक और भावुक संदेश

30 सित॰34
स्पेन की राजनीतिक भंवर: बुर्का प्रतिबंध, 87 वर्षीय महिला का आंदोलन और वैश्विक कूटनीति के नए आयामPOLITICS

स्पेन की राजनीतिक भंवर: बुर्का प्रतिबंध, 87 वर्षीय महिला का आंदोलन और वैश्विक कूटनीति के नए आयाम

30 सित॰24