नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रेलवे नेटवर्क में देश की आधुनिक ट्रेन 'वंदे भारत एक्सप्रेस' को लेकर लगातार बड़े बदलाव हो रहे हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, 16 कोच वाली नई वंदे भारत ट्रेन ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से अपना सफल ट्रायल पूरा कर लिया है। इस नई ट्रेन में यात्रियों के सफर को बेहद आरामदायक बनाने के लिए कई आधुनिक बदलाव किए गए हैं। इसमें 360 डिग्री घूमने वाली कुर्सियां और ऑटोमैटिक तरीके से एसी कोच का तापमान बदलने वाले सेंसर जैसी हाई-टेक सुविधाएं शामिल हैं। रेलवे का यह नया कदम देश के रेल सफर के अनुभव को पूरी तरह बदलने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
देश के अलग-अलग रूटों पर चलाई जा रही वंदे भारत ट्रेनों को आम जनता से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसका ताजा उदाहरण उदयपुर-सूरत वंदे भारत ट्रेन है, जिसे यात्रियों ने हाथों-हाथ लिया है। इस रूट पर ट्रेन का यात्रीभार 90 प्रतिशत से ज्यादा दर्ज किया गया है। लोगों का मानना है कि इस ट्रेन के चलने से कम समय में सुरक्षित और आरामदायक सफर करना बहुत आसान हो गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों की इस बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले दिनों में कई नए रूटों पर भी ऐसी ही हाई-स्पीड ट्रेनों को शुरू करने की पुख्ता योजना बनाई जा रही है ताकि भीड़भाड़ को कम किया जा सके।
राजधानी एक्सप्रेस को कड़ी टक्कर देगी 24 कोच वाली स्लीपर ट्रेन
शॉर्ट-डिस्टेंस यानी कम दूरी की यात्राओं के बाद अब रेलवे का पूरा फोकस लंबी दूरी के सफर को बेहतर बनाने पर है। इसी कड़ी में राजधानी एक्सप्रेस को सीधी टक्कर देने के लिए 24 कोच वाली नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लाने की तैयारी जोरों पर है। इस स्लीपर वर्जन में पैंट्री कार से लेकर यात्रियों के आराम के लिए कई तरह की लग्जरी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों को अब विमान जैसी सुविधाएं कम किराए में मिल सकेंगी। जानकारों का कहना है कि यह ट्रेन भारतीय रेलवे के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि इसमें यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है।
धनबाद होकर गुजरने वाली हावड़ा-नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को भी हाल ही में आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है। इस रूट पर ट्रेन के चलने से झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के यात्रियों को राजधानी दिल्ली तक पहुंचने में बहुत कम समय लगेगा। रेलवे प्रशासन ने इसके लिए पटरियों की क्षमता बढ़ाने और सिग्नलिंक सिस्टम को आधुनिक बनाने का काम तेजी से शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस ट्रेन को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि इससे व्यापारिक गतिविधियों को भी नया बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
तेज रफ्तार और सुरक्षा मानकों पर रेलवे का विशेष जोर
भारतीय रेलवे लगातार पटरियों की गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक पर काम कर रहा है ताकि 180 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड पर चलने वाली ये ट्रेनें पूरी तरह सुरक्षित रहें। हाल ही में हुए ट्रायल्स के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम, झटके सहने की क्षमता और ट्रैक पर पकड़ का बारीकी से परीक्षण किया है। इन सभी पैमानों पर नई वंदे भारत ट्रेन खरी उतरी है। रेलवे मंत्रालय का साफ कहना है कि देश के हर बड़े शहर को आने वाले कुछ सालों में वंदे भारत नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रा का समय आधा हो जाएगा।
आम आदमी के बजट और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किराए और सुविधाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, यात्री चाहते हैं कि लंबी दूरी के स्लीपर रूट पर टिकट की कीमतें सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों के आसपास हों ताकि आम परिवार भी इसका लाभ उठा सकें। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों के फीडबैक को लगातार नोट किया जा रहा है और उसी के आधार पर कोच के अंदरूनी डिजाइन में सुधार किए जा रहे हैं ताकि सफर हर वर्ग के लिए यादगार बन सके।












