उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में सुरक्षा एजेंसियों को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त अभियान के दौरान 30 लाख रुपए के इनामी कुख्यात नक्सली कमांडर को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। मारा गया नक्सली झारखंड के एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन का शीर्ष कमांडर था और लंबे समय से पुलिस तथा केंद्रीय जांच एजेंसियों की सूची में सबसे ऊपर चल रहा था। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से उत्तर प्रदेश और झारखंड दोनों राज्यों की पुलिस हाई अलर्ट पर आ गई है।
वाराणसी के रामनगर इलाके में सुबह-स सुबह हुई मुठभेड़
यह पूरा मामला वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 20 सितंबर की सुबह सुरक्षा एजेंसियों को पुख्ता मुखबिर से सूचना मिली थी कि झारखंड का एक खतरनाक नक्सली कमांडर अपने एक साथी के साथ वाराणसी के रास्ते से गुजरने वाला है। सूचना मिलते ही यूपी एटीएस और स्थानीय पुलिस की टीम ने लंका मैदान के पास टेंगरा मोड़ के नजदीक घेराबंदी कर दी। संदिग्ध बाइक सवारों को जब रोकने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने पुलिस पर सीधा हमला बोल दिया।
पुलिस के रोकने पर नक्सली अपनी मोटरसाइकिल से कूद गया और पुलिस दल पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से एक बार को अफरा-तफरी मच गई, लेकिन सुरक्षाबलों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत मोर्चा संभाला। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली से मुख्य नक्सली गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
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बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह के रूप में हुई खतरनाक नक्सली की पहचान
पुलिस की गोलीबारी में मारे गए इनामी नक्सली की शिनाख्त बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह के रूप में की गई है। बृजेश गंझू कोई आम अपराधी नहीं था, बल्कि वह झारखंड के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन 'तृतीय प्रस्तुति कमेटी' यानी TPC का बेहद खूंखार कमांडर था। इस संगठन पर झारखंड के कई जिलों में लेवी वसूली, आगजनी, हत्या और सुरक्षाबलों पर हमलों के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। बृजेश इस संगठन के जरिए पूरे इलाके में आतंक का पर्याय बना हुआ था और कई बड़ी आपराधिक वारदातों को अंजाम दे चुका था।
सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के मुताबिक, बृजेश गंझू पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपए का भारी-भरकम इनाम घोषित कर रखा था। इसके अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने भी उस पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा था। इस प्रकार इस कुख्यात नक्सली पर कुल 30 लाख रुपए का इनाम घोषित था। करीब 8 साल पहले एनआईए ने उसे एक बड़े टेरर फंडिंग और नक्सली साजिश के मामले में आधिकारिक तौर पर वांटेड घोषित किया था। तब से लेकर अब तक वह देश की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था।
बाल-बाल बचे यूपी ATS के डिप्टी एसपी और हेड कांस्टेबल
इस एनकाउंटर के दौरान बदमाशों की तरफ से चलाई गई गोलियां इतनी खतरनाक थीं कि यूपी एटीएस के अधिकारी बाल-बाल बच गए। मुठभेड़ की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि जब बृजेश गंझू ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू की, तो उसकी सीधी गोली यूपी ATS के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण को लगी। गनीमत यह रही कि दोनों पुलिसकर्मियों ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जिससे उनकी जान बच गई। यदि वे बुलेटप्रूफ जैकेट में नहीं होते, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।
"हमें IG STF से पुख्ता जानकारी मिली है कि आज सुबह वाराणसी में हुई एक मुठभेड़ में 30 लाख रुपए का इनामी बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह मारा गया है। वह झारखंड में प्रतिबंधित संगठन 'तृतीय प्रस्तुति कमिटी' का प्रमुख था और NIA को कई मामलों में उसकी तलाश थी।" — नरेंद्र सिंह, IG ऑपरेशन्स, झारखंड पुलिस
झारखंड पुलिस और NIA ने की एनकाउंटर की पुष्टि
इस बड़ी सफलता के बाद झारखंड पुलिस के प्रवक्ता और आईजी ऑपरेशन्स नरेंद्र सिंह ने आधिकारिक बयान जारी कर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश एटीएस और वाराणसी पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है। झारखंड और उत्तर प्रदेश की खुफिया इकाइयां पिछले कुछ दिनों से इस नक्सली की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही थीं। अंततः वाराणसी में घेराबंदी कर इसे मार गिराने में सफलता हासिल हुई।
घटना की सूचना मिलते ही वाराणसी के काशी जोन के तमाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत अस्पताल पहुंच गए और पूरे मामले की बारीकी से समीक्षा की। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बृजेश वाराणसी में किस उद्देश्य से आया था और यहां उसका कौन सा स्थानीय मददगार छिपा हुआ था। उसके साथ बाइक पर मौजूद दूसरा साथी कौन था, जिसकी तलाश में आसपास के थानों की पुलिस लगातार कांबिंग कर रही है।
देशभर में लगातार कमजोर हो रहा है नक्सली नेटवर्क
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बृजेश गंझू जैसे 30 लाख के इनामी कमांडर का मारा जाना नक्सली संगठनों के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। पिछले कुछ महीनों में केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त रणनीतिक कार्रवाई के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में नक्सलियों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। छत्तीसगढ़ से लेकर झारखंड और उत्तर प्रदेश तक सुरक्षाबलों ने माओवादियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया हुआ है। कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में भी सुरक्षाबलों ने एक महिला नक्सली को ढेर किया था।
वाराणसी में हुई इस सफल कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि अब अपराधी चाहे देश के किसी भी कोने में छिप जाएं, आधुनिक तकनीक, खुफिया तंत्र और मुस्तैद पुलिसिंग के दम पर उन्हें कानून के शिकंजे में लाया ही जा रहा है। यूपी एटीएस की इस साहसिक कार्रवाई की पूरे राज्य में सराहना हो रही है। स्थानीय प्रशासन ने भी जनता से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें ताकि समय रहते किसी भी बड़ी साजिश को नाकाम किया जा सके।





