पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों चुनाव आयोग के एक फैसले को लेकर उबाल आ गया है। कांग्रेस पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव चिह्न और नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाने के समय को लेकर चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने आरोप लगाया है कि आयोग ने यह फैसला बहुत ही सोची-समझी साजिश के तहत और जानबूझकर देरी से लिया है, ताकि विपक्षी दलों और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।
नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद आया फैसला
शुभंकर सरकार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें यह देखकर बेहद हैरानी हुई कि चुनाव आयोग ने रेजीनगर और नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया पूरी होने के ठीक दिन बाद यह फैसला सुनाया। यदि आयोग को कोई कार्रवाई करनी थी, तो यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था। नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के ठीक बाद रोक लगाने से इस पूरे फैसले के पीछे की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और यह लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी सही संकेत नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक मुकाबला और वैचारिक लड़ाइयां तो लोकतंत्र का हिस्सा हैं और हमेशा चलती रहेंगी। अगर किसी पार्टी या नेता को हराना है, तो जनता के बीच जाकर राजनीतिक तरीके से हराया जाएगा, ना कि इस तरह के फैसलों से। पश्चिम बंगाल की जागरूक जनता किसी को भी राजनीतिक रूप से खत्म करने या जिताने का पूरा दम रखती है, इसके लिए किसी संस्था के सहारे की जरूरत नहीं है।
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने चुनाव आयोग पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे आयोग अब स्वतंत्र संस्था न रहकर बीजेपी के किसी संगठन की तरह काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के जरिए किसी चुनी हुई या स्थापित राजनीतिक पार्टी को कमजोर करने या खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जो देश के संसदीय लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक बात है।
"चुनाव आयोग का इस तरह का पक्षपातपूर्ण रवैया लोकतंत्र की बुनियादी नींव को कमजोर कर रहा है। हम इस तरह की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं। राजनीतिक संघर्ष हमारा जारी रहेगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आयोग बीजेपी के इशारे पर ऐसी कवायद शुरू कर दे।" — शुभंकर सरकार, पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष
ममता बनर्जी गुट को मिला 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट को आगामी उपचुनाव के लिए 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न आवंटित किया है। वहीं, टीएमसी के ही दूसरे यानी अरूप रॉय गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न थमाया गया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के दौरान दोनों ही गुट मूल टीएमसी के नाम और 'पुष्प एवं तृण' वाले पारंपरिक चुनाव चिह्न का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकेंगे।
कांग्रेस का टीएमसी से विरोध रहेगा जारी
शुभंकर सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के इस फैसले पर सवाल उठाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कांग्रेस पार्टी का टीएमसी के साथ राजनीतिक विरोध खत्म हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या, पार्टी दफ्तरों पर अवैध कब्जे और राज्य में फैले घोर कुशासन के लिए सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस ही जिम्मेदार रही है। कांग्रेस राज्य की जनता के हक के लिए अपनी लड़ाई पूरी ताकत के साथ सड़क से लेकर सदन तक जारी रखेगी।




