कोलकाता/ग्राउंड ब्यूरो — पश्चिम बंगाल में इन दिनों एक तरफ जहां शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा की भव्य तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य का सियासी पारा भी काफी गर्म है। बंगाली संस्कृति के इस सबसे बड़े त्योहार के लिए राज्य के कोने-कोने में पंडाल सजने लगे हैं। कारीगर और स्थानीय युवा मिलकर मां दुर्गा की सुंदर और विशाल प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में दिन-रात एक कर रहे हैं। बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी है और हर तरफ ढाक की गूंज सुनाई देने लगी है।
लेकिन इस उत्सव के माहौल के बीच राजनीतिक सरगर्मी भी कम नहीं है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के विधायक बिभास सरदार पर हुए हमले की घटना ने राज्य की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हमले में विधायक की कार के शीशे भी तोड़ दिए गए, जिसके बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है ताकि हमलावरों का पता लगाया जा सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
दुर्गा पूजा के पंडालों में मंत्रियों का नया अंदाज
इस बार का दुर्गा पूजा उत्सव सोशल मीडिया के दौर में एक नए रूप में सामने आ रहा है। पश्चिम बंगाल के मंत्री अशोक कीर्तनिया एक ब्लॉगर की भूमिका में नजर आ रहे हैं। वे बनगांव के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में जाकर वहां के भव्य दृश्यों को अपने वीडियो में कैद कर रहे हैं और उन्हें साझा कर रहे हैं। उनका यह नया अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और युवा इसे काफी पसंद कर रहे हैं। पारंपरिक उत्सव के साथ आधुनिक तकनीक का यह मेल इस साल के जश्न को और भी खास बना रहा है।
आम जनता भी महंगाई और तमाम परेशानियों को भूलकर इस महापर्व की तैयारियों में जुटी है। कोलकाता से लेकर जिलों तक के पंडालों की थीम लोगों को अपनी ओर खींच रही है। हर साल की तरह इस बार भी पंडालों की सजावट में अनोखी कला और कारीगरी देखने को मिल रही है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और वे शांति से पूजा का आनंद ले सकें।
केएमसी के पोस्टरों पर छिड़ा नया भाषा विवाद
त्योहारों के इस माहौल के बीच कोलकाता नगर निगम यानी केएमसी के कुछ पोस्टरों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इन पोस्टरों के जरिए राज्य पर जबरन 'हिंदी थोपने' का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि बंगाल की संस्कृति और भाषा को दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं और बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।
जमीन पर स्थिति यह है कि एक तरफ आम नागरिक और कारीगर अपनी कला और आस्था के सबसे बड़े पर्व को सफल बनाने में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। दूसरी तरफ राजनेता अपने सियासी हितों को साधने के लिए हर छोटे-बड़े मुद्दे को भुनाने में लगे हैं। त्योहार की चमक-दमक के बीच राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को थोड़ा तनावपूर्ण जरूर बना दिया है, लेकिन आम जनता का उत्साह अब भी पूरी तरह से बना हुआ है।
उत्सव और सियासत के बीच पिसता आम आदमी
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि पश्चिम बंगाल में इस समय उत्सव और विवाद दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। जहां एक तरफ सांस्कृतिक एकता और भाईचारे का संदेश देने वाले पंडाल तैयार हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक रोटियां सेकने के प्रयास भी जारी हैं। जनता इन सब के बीच अपने पर्व को उल्लाس के साथ मनाने की जिद पर अड़ी है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे पूजा के दिन नजदीक आएंगे, राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने की पूरी उम्मीद है, जिस पर हमारी पैनी नजर बनी रहेगी।







