कोलकाता और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने नए निम्नच क्षेत्र के असर से आसमान में बादल छाए हुए हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मौसमी हलचल के कारण तटीय इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से तापमान में थोड़ी गिरावट जरूर आई है। लेकिन आम जनजीवन पर इसका मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है और लोगों को जलभराव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक समुद्र में बना यह सिस्टम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। कोलकाता, हावड़ा, हुगली और आसपास के जिलों में अगले कुछ घंटों तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा। हवा की रफ्तार बढ़ने से समुद्र तट के पास रहने वाले मछुआरों को भी सतर्क रहने को कहा गया है। प्रशासन की ओर से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। निचले इलाकों में पानी जमा होने से यातायात पर भी थोड़ा असर पड़ा है।
निम्नच हटने के बाद कैसी होगी गर्मी
मौसम विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यह राहत बहुत लंबी नहीं टिकने वाली है। जैसे ही यह निम्नच क्षेत्र कमजोर होगा या बंगाल की ओर से आगे निकलेगा, नमी का स्तर काफी बढ़ जाएगा। हवा में नमी ज्यादा होने के कारण लोगों को भारी उमस और चिपचिपी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। सितंबर के इस महीने में बारिश रुकने के बाद धूप निकलने पर तापमान में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। इस प्रकार की उमस भरी गर्मी शरीर को थका देती है और लोगों को पसीने से तरबतर कर देती है।
आम लोगों और खासकर दफ्तर जाने वालों के लिए यह मौसम काफी परेशानी भरा साबित हो रहा है। कभी अचानक बारिश तो कभी तेज धूप और उमस से लोग बीमार भी पड़ रहे हैं। अस्पतालों में सर्दी, खांसी और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। डॉक्टरों की सलाह है कि इस बदलते मौसम में लोग बाहर का खाना खाने से बचें और उबला हुआ पानी पिएं। बच्चों और बुजुर्गों को इस उमस भरे मौसम में खास सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है ताकि वे संक्रमण से बचे रहें।
तटीय इलाकों में प्रशासन की खास नजर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चक्रवातों और मानसूनी हलचलों का इतिहास गवाह रहा है कि बंगाल की खाड़ी का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। हाल के महीनों में कई चक्रवाती तूफानों जैसे 'बिपारजोय' और अन्य ने भारत और पड़ोसी देशों के तटीय इलाकों को प्रभावित किया है। हालांकि मौजूदा निम्नच उतना खतरनाक नहीं है, फिर भी स्थानीय प्रशासन किसी भी ढिलाई के मूड में नहीं है। आपदा प्रबंधन टीमों को तटीय जिलों में पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
खेती किसानी से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय मिलाजुला असर लेकर आया है। धान की फसल के लिए इस समय पानी की जरूरत होती है, लेकिन लगातार जलभराव से फसलों को नुकसान भी हो सकता है। किसान अपने खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने के उपाय कर रहे हैं ताकि उनकी मेहनत खराब न हो। ग्रामीण इलाकों में किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब यह बारिश थमे और उन्हें खेतों में काम करने का मौका मिले। मौसम विभाग आने वाले दिनों में स्थिति साफ होने की उम्मीद जता रहा है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल
द फ्रीलान्स की टीम ने कोलकाता की सड़कों और बाजारों का जायजा लिया जहां आम लोग इस उमस भरे मौसम से जूझते नजर आए। दुकानदारों का कहना है कि मौसम खराब होने से उनके रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ रहा है। लोग जरूरी सामान खरीदने के बाद तुरंत अपने घरों को लौट रहे हैं जिससे बाजारों में चहल-पहल थोड़ी कम हुई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस साल मानसून का व्यवहार काफी अलग रहा है और मौसम का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है।
आने वाले 48 घंटों में मौसम विभाग की अगली रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि तापमान में कितनी बढ़ोतरी होगी। फिलहाल लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने साथ छाता और पानी की बोतल जरूर रखें ताकि अचानक बदलते मौसम से खुद को बचा सकें। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगा और आपको मौसम से जुड़ी हर सटीक जानकारी सबसे पहले ग्राउंड से पहुंचाता रहेगा।







