भारत में शारदीय नवरात्र का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। देश के कोने-कोने में मां दुर्गा के पंडाल सजते हैं और नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना होती है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर या राजघराने के बारे में सुना है, जहां मां दुर्गा की प्रतिमा साल के ज्यादातर दिन बैंक के लॉकर में कैद रहती है? जी हां, पश्चिम बंगाल की एक ऐतिहासिक राजबाड़ी की दुर्गा पूजा अपनी इसी अनोखी और हैरान कर देने वाली परंपरा के कारण इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है।
400 साल पुरानी परंपरा और सोने की प्रतिमा
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित जयपुर राजबाड़ी की दुर्गा पूजा का इतिहास करीब 400 साल पुराना है। राजपरिवार से मिली जानकारी के मुताबिक, राजा काशीनाथ सिंह के कार्यकाल के दौरान मंदिर में एक आग लगने की दुर्घटना हुई थी। इसके बाद राजा को स्वप्न में मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करने का संकेत मिला। राजा ने अपनी राजकोष से सोना निकालकर बनारस के प्रसिद्ध कारीगरों से मां दुर्गा की द्विभुजा स्वर्ण प्रतिमा और चांदी का चालचित्र तैयार करवाया था। तब से लेकर आज तक यह शाही परंपरा चली आ रही है।
चोरी की घटना के बाद बदली सुरक्षा व्यवस्था
एक समय ऐसा आया जब राजबाड़ी में चोरी की एक बड़ी घटना हो गई, जिसमें कई कीमती सामान और आभूषण चुरा लिए गए। इस घटना के बाद राजपरिवार और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस की सलाह पर यह निर्णय लिया गया कि मां दुर्गा की इस अमूल्य स्वर्ण प्रतिमा को पूजा के कुछ दिनों को छोड़कर पूरे साल बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखा जाएगा।
षष्ठी से दशमी तक होती है कड़ी सुरक्षा
हर साल शारदीय नवरात्र के षष्ठी के दिन, भारी पुलिस बल और कड़ी सुरक्षा के बीच इस स्वर्ण प्रतिमा को बैंक लॉकर से निकालकर जयपुर राजबाड़ी लाया जाता है। राजपरिवार और स्थानीय लोगों द्वारा बड़े उल्लास के साथ मां का स्वागत किया जाता है। विजया दशमी के दिन पूजा संपन्न होने के बाद, मां की प्रतिमा को पुनः पुलिस सुरक्षा के साए में बैंक के सुरक्षित लॉकर में पहुंचा दिया जाता है। इस अनोखी और भव्य परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक पुरुलिया पहुंचते हैं।
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