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धर्मपढ़ने में समय: 3 मिनट

वीडियो: जब महाकाली की शरण में पहुंची थीं पूर्व पीएम इंदिरा गांधी, जानिए इस चमत्कारी मंदिर और 5 फूलों के रहस्य से जुड़ा दिलचस्प इतिहास

उत्तर भारत के एक प्रसिद्ध प्राचीन महाकाली मंदिर का इतिहास पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी जुड़ा रहा है। 1977 की चुनावी हार के बाद उनके यहां आने और मां के दरबार में अनुष्ठान कराने की कहानी आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है।
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धर्म एवं संस्कृति डेस्क, द फ्रीलांस
संस्कृति व विरासत डेस्क•15 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•43
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वीडियो: जब महाकाली की शरण में पहुंची थीं पूर्व पीएम इंदिरा गांधी, जानिए इस चमत्कारी मंदिर और 5 फूलों के रहस्य से जुड़ा दिलचस्प इतिहास
📷 वीडियो: जब महाकाली की शरण में पहुंची थीं पूर्व पीएम इंदिरा गांधी, जानिए इस चमत्कारी मंदिर और 5 फूलों के रहस्य से जुड़ा दिलचस्प इतिहास — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • वर्ष 1977 की करारी चुनावी हार के बाद पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने किया था इस प्राचीन महाकाली मंदिर का दौरा।
  • मंदिर के पुजारी के अनुसार, मां के दरबार में विशेष अनुष्ठान के बाद इंदिरा गांधी ने 1980 में दोबारा राजनीतिक सत्ता हासिल की थी।
  • यहाँ मां काली का पारंपरिक रौद्र रूप नहीं, बल्कि एक बेहद शांत, सौम्य और बालिका स्वरूप विराजमान है।

मां काली का नाम लेते ही मन में उनके रौद्र रूप, खड़ग और मुंडमाला की छवि उभरती है। लेकिन इस ऐतिहासिक मंदिर में मां महाकाली का स्वरूप पूरी तरह से अलग और अनोखा है। यहाँ देवी किसी भयंकर रूप में नहीं, बल्कि एक शांत, सौम्य और वात्सल्य से परिपूर्ण कन्या रूप में विराजमान हैं। यह प्राचीन मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और चमत्कारों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है, जहाँ आस्था का सैलाब उमड़ता है।

ओरछा के राजा से जुड़ा है मंदिर का चार सौ साल पुराना इतिहास

श्री 1008 महाकाली विद्यापीठ के इतिहास को लेकर स्थानीय मान्यता है कि ओरछा के राजा वीर सिंह जूदेव कभी शिकार के दौरान इस क्षेत्र में आए थे। पहाड़ी के पास एक गुफा में उन्हें रहस्यमयी प्रकाश पुंज के दर्शन हुए, जिसके बाद यहाँ पूजा-अर्चना और मंदिर निर्माण की शुरुआत हुई। मंदिर के पुजारी पंडित अजय त्रिवेदी इस स्थान की परंपरा को लगभग चार सौ साल पुरानी बताते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही इस गुरु-शिष्य परंपरा में आज भी देवी की उतनी ही निष्ठा के साथ सेवा की जाती है.

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राजनीतिक उथल-पुथल के बीच जब शरण में आईं थीं इंदिरा गांधी

इस मंदिर के इतिहास का एक बेहद दिलचस्प अध्याय देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी जुड़ा है। वर्ष 1977 के लोकसभा चुनावों में करारी हार का सामना करने के बाद इंदिरा गांधी अचानक इस मंदिर पहुँची थीं। मंदिर के पुजारियों और पुरानी मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने यहाँ आकर विशेष धार्मिक अनुष्ठान कराया था और संकट के समय मां से मार्गदर्शन की प्रार्थना की थी।

कहा जाता है कि इसके बाद राजनीतिक परिदृश्य बदला और इंदिरा गांधी ने जोरदार वापसी करते हुए 1980 में एक बार फिर देश की कमान संभाली। इतना ही नहीं, इसके बाद भी उनका इस मंदिर से जुड़ाव बना रहा और उन्होंने यहाँ लक्षचंडी यज्ञ में भी सहयोग दिया था। हालांकि राजनीतिक सफलता और धार्मिक अनुष्ठान को लेकर लोगों की अपनी-अपनी आस्था है, लेकिन यह प्रसंग आज भी इस मंदिर की लोकप्रियता में चार चाँद लगाता है।

पाँच गुड़हल के फूलों से पूरी होती है मनोकामना

नवरात्र या सामान्य दिनों में भी इस मंदिर की एक और बड़ी विशेषता है—मा को पाँच लाल गुड़हल के फूल अर्पित करना। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि सच्चे मन से पाँच फूल चढ़ाकर जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है। स्थानीय लोग और दूर-दराज से आने वाले भक्त इस परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ पालन करते हैं।

डिस्क्लेमर एवं साभार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।

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