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धर्मपढ़ने में समय: 3 मिनट

शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, जानिए सही मुहूर्त और नियम

वर्ष 2026 के शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी की तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं के मन में संशय बना रहता है। पंडितों के अनुसार सही उदया तिथि और मुहूर्त जानने से व्रत, हवन और कन्या पूजन में किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति नहीं रहती है।
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धर्म एवं संस्कृति डेस्क, द फ्रीलांस
संस्कृति व विरासत डेस्क•7 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•41
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शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, जानिए सही मुहूर्त और नियम
📷 शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, जानिए सही मुहूर्त और नियम — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी।
  • अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे समाप्त होगी।
  • संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा।

शारदीय नवरात्र के दौरान महाअष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर अक्सर श्रद्धालुओं के मन में संशय रहता है। खासकर उन लोगों के लिए जो अष्टमी का व्रत रखते हैं या नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन करते हैं, सही तिथि का ज्ञान होना बेहद आवश्यक है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से आरंभ होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी। आइए जानते हैं कि इस बार महाअष्टमी और महानवमी का पर्व किस दिन मनाया जाएगा और इसके लिए शुभ मुहूर्त क्या हैं।

19 अक्टूबर को होगी महाअष्टमी की मुख्य पूजा

इस वर्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी। जिन घरों में अष्टमी के दिन विशेष पूजा, हवन या कन्या पूजन की परंपरा है, वे 19 अक्टूबर को यह अनुष्ठान कर सकते हैं। जो लोग अष्टमी का व्रत रखते हैं, वे 19 अक्टूबर को विधि-विधान से मां महागौरी की आराधना करें। कोशिश करें कि कन्या पूजन से जुड़े सभी कार्य सुबह 10:51 बजे से पहले संपन्न कर लिए जाएं। हालांकि, जिन परिवारों में रात के समय कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा करने की परंपरा है, वे 18 अक्टूबर की रात को भी अष्टमी तिथि लगने के बाद अनुष्ठान कर सकते हैं।

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महानवमी और कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त

19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होने के तुरंत बाद नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ऐसे में 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जा सकता है। इसके अलावा, जो श्रद्धालु उदया तिथि को विशेष महत्व देते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं। हालांकि, 20 अक्टूबर को नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक ही रहेगी, इसलिए उस दिन दोपहर 12:50 बजे से पहले ही सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे कर लेने चाहिए।

संधि पूजा का विशेष महत्व और समय

शारदीय नवरात्र में संधि पूजा का अत्यधिक धार्मिक महत्व माना गया है। इस वर्ष संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा। यह कुल 48 मिनट का समय होगा, जिसमें अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट शामिल होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी विशेष काल में मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण करके चंड और मुंड असुरों का वध किया था। इसलिए इस दौरान मां चामुंडा की विशेष आराधना करने से भक्तों को माता की असीम कृपा प्राप्त होती है।

डिस्क्लेमर एवं साभार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।

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