चेन्नई/ग्राउंड ब्यूरो — तमिलनाडु में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के शिक्षक भर्ती बोर्ड ने इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी किए हैं। स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए यह परीक्षा पास करना जरूरी हो गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश भर के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में चर्चा तेज हो गई है। हजारों शिक्षक अब इस परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं। सरकारी आदेश के मुताबिक न्यूनतम योग्यता पूरी न करने वाले शिक्षकों की सेवा पर असर पड़ सकता है।
राज्य में पिछले कई वर्षों से टीईटी परीक्षा के नियमों को लेकर खींचतान चल रही थी। कई शिक्षक बिना इस परीक्षा को पास किए सालों से अपनी सेवाएं दे रहे थे। लेकिन अब अदालती आदेशों के चलते सरकार ने अपने नियम कड़े कर दिए हैं। भर्ती बोर्ड ने साफ किया है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने वाले सभी अध्यापकों को यह परीक्षा पास करनी होगी। इसके लिए बोर्ड जल्द ही विशेष परीक्षा आयोजित करने की रूपरेखा तैयार कर रहा है।
कार्यरत शिक्षकों के लिए परीक्षा क्यों बनी जरूरी?
शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद पूरे देश में शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य की गई थी। इसके बावजूद कई राज्यों में पुराने शिक्षकों को इस नियम से छूट मिलती रही। तमिलनाडु में भी सहायता प्राप्त स्कूलों के कई शिक्षकों ने छूट की मांग की थी। मामला मद्रास उच्च न्यायालय और बाद में सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। अदालतों ने साफ कह दिया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए शिक्षकों की योग्यता से समझौता नहीं किया जा सकता।
न्यायालय के इस रुख के बाद राज्य सरकार के पास कड़े कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। सरकार ने साफ किया है कि तय समय के भीतर परीक्षा पास न करने पर पदोन्नति और वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है। इसी वजह से शिक्षक भर्ती बोर्ड पर जल्द से जल्द परीक्षा कराने का दबाव बढ़ गया है। राज्य भर के शिक्षक संघ भी अब सरकार से मांग कर रहे हैं कि परीक्षा का पाठ्यक्रम और कठिनाई स्तर कार्यरत शिक्षकों के अनुभव के अनुकूल रखा जाए।
बोर्ड ने आवेदन और योग्यता को लेकर क्या नियम तय किए?
शिक्षक भर्ती बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार परीक्षा दो स्तरों पर आयोजित की जाती है। पहला पेपर कक्षा एक से पांच तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए होता है। दूसरा पेपर कक्षा छह से आठ तक के अध्यापकों के लिए निर्धारित है। दोनों ही परीक्षाओं में बैठने के लिए तय शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य है। बोर्ड ने बताया कि सेवारत शिक्षकों के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी जाएगी।
ऑनलाइन फॉर्म भरने के दौरान शिक्षकों को अपने सेवा से जुड़े प्रमाण पत्र भी अपलोड करने होंगे। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम साठ प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य रखा गया है। वहीं आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को अंकों में पांच प्रतिशत की छूट दी जाएगी। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि फर्जी प्रमाणपत्र लगाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सत्यापन की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा सख्त बनाया गया है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो सके।
अदालत के आदेश के बाद क्यों गरमाया यह मामला?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अदालत ने बिना टीईटी पास किए शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकने के संकेत दिए। मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। अदालत की इस सख्त टिप्पणी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था। कई शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का विरोध भी किया था। उनका कहना था कि बीस-पच्चीस साल से पढ़ा रहे अध्यापकों से अब लिखित परीक्षा लेना न्यायसंगत नहीं है।
विरोध के बावजूद कानूनी बाध्यता के कारण सरकार को परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ानी पड़ रही है। शिक्षक संगठनों का तर्क है कि उम्र के इस पड़ाव पर नई परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं है। कई शिक्षकों ने मांग की है कि उनके पुराने अध्यापन अनुभव को ध्यान में रखकर न्यूनतम अंक सीमा कम की जाए। हालांकि सरकार ने अभी तक इस मांग पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। बोर्ड का कहना है कि वे केवल राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद के नियमों का पालन कर रहे हैं।
उम्मीदवारों को किन बातों का रखना होगा खास ध्यान?
परीक्षा में बैठने की योजना बना रहे उम्मीदवारों को आधिकारिक पोर्टल पर अपनी नजर रखनी चाहिए। अधिकारियों ने आगाह किया है कि इंटरनेट पर परीक्षा की तारीखों को लेकर कई फर्जी सूचनाएं भी फैलाई जा रही हैं। केवल बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं को ही सही माना जाना चाहिए। आवेदन शुल्क, परीक्षा केंद्र और परीक्षा के पाठ्यक्रम से जुड़ी पूरी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल में सामने आया है कि कोचिंग संस्थानों में भी अब पुराने शिक्षकों की भीड़ बढ़ने लगी है। शिक्षक अपने रोजमर्रा के अध्यापन के साथ-साथ परीक्षा की तैयारी के लिए समय निकाल रहे हैं। परीक्षा बोर्ड ने भी केंद्रों पर कड़ी निगरानी की व्यवस्था करने का भरोसा दिया है। बायोमेट्रिक हाजिरी और सीसीटीवी निगरानी के जरिए परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा। आने वाले हफ्तों में परीक्षा की अंतिम तारीखों की घोषणा की जा सकती है।




