नई दिल्ली से ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्ट: वैश्विक व्यापार के गलियारों में इन दिनों कूटनीतिक और आर्थिक हलचलें तेज हैं। गूगल ट्रेंड्स पर अचानक उभरे 'बहरीन बनाम थाईलैंड' (Bahrain vs Thailand) के कूटनीतिक और खेल परिदृश्यों के बीच, भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। 'द फ्रीलान्स' की विशेष पड़ताल के अनुसार, भारत ने चीन के साथ-साथ थाईलैंड और बहरीन से होने वाले ग्लास फाइबर के आयात को लेकर डंपिंग-रोधी (Anti-Dumping) जांच औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। यह कदम घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को अनुचित रूप से सस्ते आयात से बचाने के लिए उठाया गया है.
व्यापारिक असंतुलन और डंपिंग के आरोप
हमारी फील्ड जांच में यह बात सामने आई है कि पिछले कुछ महीनों में भारतीय बाजारों में थाईलैंड और बहरीन से आने वाले ग्लास फाइबर की खेप में भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। घरेलू निर्माताओं का आरोप था कि ये देश उत्पादन लागत से भी कम कीमत पर भारतीय बाजार में अपने उत्पाद डंप कर रहे हैं, जिससे स्थानीय उद्योगों का टिकना मुश्किल होता जा रहा था। महानिदेशालय व्यापार उपाय (DGTR) ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए अब अपनी आधिकारिक जांच का दायरा विस्तृत कर दिया है।
संबंधित खबरें
खेल के मैदान से लेकर कूटनीति तक सरगर्मी
दिलचस्प बात यह है कि जहां एक ओर व्यापारिक मोर्चे पर थाईलैंड और बहरीन के साथ भारत के रिश्ते वाणिज्यिक नियमों के दायरे में कसे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खेल के गलियारों में भी इन देशों के बीच मुकाबलों की गूंज है। हाल ही में 'थाईलैंड बनाम बहरीन' के बीच चल रहे खेल मुकाबलों और एशियाई युवा खेलों में भारत के शानदार प्रदर्शन (जैसे कबड्डी में डबल गोल्ड) ने एशियाई क्षेत्र में खेल और कूटनीति के समीकरणों को एक नया आयाम दिया है। हालांकि, आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इन देशों के साथ भारत के संबंध अब पूरी तरह से 'पारस्परिक हितों और निष्पक्ष व्यापार' पर टिके होंगे।
क्रिकेट और अन्य वैश्विक घटनाओं की हलचल
इस बीच, खेल जगत में आईपीएल के प्लेऑफ समीकरणों को लेकर वीरेंद्र सहवाग और ज़हीर खान जैसे दिग्गजों के बयान भी चर्चा में हैं, जो यह दर्शाते हैं कि भारतीय मीडिया और दर्शक खेल और कूटनीति दोनों मोर्चों पर कितनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा, विदेशी जमीनों पर भारतीय नागरिकों से जुड़ी मानव तस्करी और सुरक्षा की अन्य खबरों ने भी नीति निर्माताओं का ध्यान खींचा है।
घरेलू उद्योगों पर इसका क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि DGTR की इस जांच में डंपिंग के आरोप सही पाए जाते हैं, तो भारत सरकार इन देशों से आने वाले ग्लास फाइबर पर भारी डंपिंग-रोधी शुल्क (Anti-Dumping Duty) लगा सकती है। इससे घरेलू उद्योगों को राहत मिलेगी और 'मेक इन इंडिया' अभियान को और मजबूती मिलेगी। 'द फ्रीलान्स' इस पूरी प्रक्रिया और व्यापारिक वार्ताओं पर आगे भी पैनी नज़र बनाए रखेगा।








