नयी दिल्ली/मैदान से: द फ्रीलान्स की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच का मुकाबला हमेशा से ही नसों को झकझोर देने वाला होता है। एशियन गेम्स के पुरुष हॉकी सेमीफाइनल में एक बार फिर दोनों चिर-प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने थे। मुकाबला इतना रोमांचक था कि खेल प्रेमियों की सांसें आखिरी पलों तक अटकी रहीं। भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अंततः पाकिस्तान को 4-3 के अंतर से धूल चटा दी और स्वर्ण पदक से अब बस एक कदम की दूरी पर है।
अंतिम 49 सेकंड का वह जादुई पल
मैच का स्कोर बराबरी पर चल रहा था और दोनों टीमें जीत के लिए अपना सब कुछ झोंक चुकी थीं। जब खेल के आखिरी 49 सेकंड बचे थे, तब फॉरवर्ड खिलाड़ी अभिषेक ने वह करिश्मा कर दिखाया जिसकी उम्मीद पूरे देश को थी। अभिषेक का यह निर्णायक गोल भारत की जीत की इबारत लिख गया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में टीम ने जिस मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया, वह काबिले तारीफ था। आखिरी मिनटों में दबाव को झेलते हुए गोल दागना भारतीय हॉकी की बदलती हुई मानसिकता को दर्शाता है।
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प्रसारण और दर्शकों का भारी उत्साह
इस हाई-वोल्टेज मैच को लेकर देश भर में जबर्दस्त क्रेज देखने को मिला। 'एशियन गेम्स' के इस सेमीफाइनल मुकाबले को लेकर खेल प्रेमियों में भारी उत्सुकता थी कि इसे लाइव कहां और कैसे देखा जाए। टीवी से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों दर्शकों ने इस ऐतिहासिक महामुकाबले का आनंद लिया। सोशल मीडिया पर भी भारत की जीत के बाद जश्न का माहौल है, और हर कोई फाइनल मुकाबले का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
हॉकी इंडिया के भीतर सुलगती प्रशासनिक चिंगारी
एक तरफ जहां मैदान पर भारतीय खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खेल प्रशासन के गलियारों से अच्छी खबरें नहीं आ रही हैं। हॉकी इंडिया के भीतर अंदरूनी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में महासचिव भोलानाथ द्वारा कार्यकारी बोर्ड की एक बैठक बुलाई गई, जिस पर अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कड़ी आपत्ति जताई है। खेल जानकारों का मानना है कि मैदान के बाहर चल रहा यह प्रशासनिक खिंचाव आने वाले समय में खिलाड़ियों के तैयारी और मनोबल पर असर डाल सकता है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
स्वर्ण पदक की ओर बढ़ती नजरें
मैदान पर पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों ने साबित कर दिया है कि तमाम प्रशासनिक अड़चनों के बावजूद उनका ध्यान केवल और केवल जीत पर है। पाकिस्तान पर इस नाटकीय जीत ने टीम का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। अब पूरा देश फाइनल मुकाबले और स्वर्ण पदक की उम्मीद के साथ अपनी पुरुष हॉकी टीम के पीछे चट्टान की तरह खड़ा है।








