ब्यूनस आयर्स/ग्राउंड ब्यूरो — फुटबॉल जगत के सबसे बड़े खिलाड़ियों में गिने जाने वाले लियोनेल मेसी ने अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के साथ अपने दो दशक लंबे सुनहरे सफर को आखिरकार पूरा कर लिया है। आज का दिन दुनिया भर के खेल प्रेमियों के लिए बेहद भावुक करने वाला रहा क्योंकि उनके चहेते खिलाड़ी ने आखिरी बार देश की जर्सी पहनकर मैदान पर कदम रखा। पिछले बीस वर्षों में मेसी ने फुटबॉल को जो ऊंचाइयां दी हैं, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। उनके इस आखिरी मुकाबले को देखने के लिए स्टेडियम से लेकर टीवी स्क्रीन तक दर्शकों की भारी भीड़ जुटी रही और हर कोई अपने इस महान खिलाड़ी को विदाई देने के लिए बेताब दिखा।
खेल के इस ऐतिहासिक पल के बीच लियोनेल मेसी ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने खेल प्रशासनिक अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। मेसी ने अपने फेयरवेल मैच के दौरान फुटबॉल जगत में चल रहे पैसों के खेल और कमर्शियल दबाव पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में खेल भावना पीछे छूटती जा रही है और मुनाफे का कारोबार आगे बढ़ता जा रहा है। मेसी के इस तीखे सवाल ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या आधुनिक खेल अब सिर्फ मनोरंजन और बिजनेस बनकर रह गए हैं। उनके इस बेबाक अंदाज की तारीफ दुनियाभर के खेल प्रेमी और पूर्व खिलाड़ी कर रहे हैं।
मैदान पर जीत से ज्यादा आखिरी जर्सी के लिए मची रही होड़
मैच की शुरुआत से पहले और खेल के दौरान मैदान का माहौल पूरी तरह से अलग नजर आया। खिलाड़ियों के बीच मुकाबला जीतने की होड़ तो थी ही, लेकिन उससे कहीं ज्यादा दीवानगी मेसी की आखिरी जर्सी हासिल करने के लिए दिखाई दे रही थी। विपक्षी टीम के खिलाड़ी भी मैच खत्म होने के बाद मेसी की जर्सी पाने के लिए आपस में अनुरोध करते दिखे। मैदान पर मौजूद हर शख्स इस बात को अच्छी तरह जानता था कि यह पल दोबारा कभी नहीं आएगा। खेल प्रेमियों ने नम आंखों से अपने दौर के सबसे बड़े जादूगर को मैदान से रुखसत होते हुए देखा और पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
भारत में बैठे फुटबॉल प्रशंसकों के लिए भी यह रात जागने वाली रही। भारी संख्या में लोगों ने सुबह तड़के जागकर लाइव स्ट्रीमिंग और स्पोर्ट्स चैनलों के जरिए इस ऐतिहासिक मैच को अपनी आंखों से देखा। सोशल मीडिया पर भी मेसी छाए रहे और लाखों लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं देते हुए उनके योगदान को याद किया। वियतनाम से लेकर अर्जेंटीना तक और भारत के छोटे शहरों से लेकर बड़े महानगरों तक, हर जगह केवल मेसी के ही चर्चे रहे। खेल जानकारों का मानना है कि मेसी के जाने के बाद फुटबॉल में एक ऐसा खालीपन आ गया है जिसे भरना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होगा।
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युवा खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बने लियोनेल मेसी
वियतनाम और लैटिन अमेरिका के युवा फुटबॉल खिलाड़ियों ने मेसी को अपनी प्रेरणा बताया है। आने वाली कई पीढ़ियां मेसी के संघर्ष, उनकी कला और मैदान पर दिखाई गई निष्ठा को याद रखेंगी। छोटे कद के बावजूद दुनिया पर राज करने वाले मेसी ने साबित कर दिया कि अगर कड़ी मेहनत और पक्का इरादा हो तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। उनके जाने के साथ ही अर्जेंटीना के फुटबॉल इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया है, लेकिन उनकी यादें और उनका खेल हमेशा प्रशंसकों के दिलों में जिंदा रहेगा।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि आने वाले समय में फुटबॉल की प्रशासनिक संस्थाओं को खिलाड़ियों के इस तरह के सवालों पर गंभीरता से सोचना होगा। पैसों की चमक के बीच खेल की असल आत्मा को बचाए रखना आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। मेसी ने जाते-जाते जिस सच्चाई को सबके सामने रखा है, वह आने वाले दिनों में खेल की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।





