कोलकाता के ऐतिहासिक साल्टलेक स्टेडियम में रविवार को भारतीय फुटबॉल का सबसे बड़ा रोमांच देखने को मिला। मैदान पर कोलकाता डर्बी का मुकाबला था जहां दो सबसे बड़ी टीमें आमने-सामने थीं। मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के बीच इस खिताबी भिड़ंत को देखने के लिए हजारों दर्शक स्टेडियम में मौजूद थे। मैच के पहले मिनट से ही दोनों टीमों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी ताकि इस मुकाबले को अपने नाम किया जा सके।
मैच का सबसे बड़ा पल दूसरे हाफ में आया जब मोहन बागान के खिलाड़ी जेल्जकोвич ने शानदार खेल दिखाया। उन्होंने बेहतरीन पास को गोल में बदलकर अपनी टीम को बढ़त दिला दी। ईस्ट बंगाल की डिफेंस लाइन इस हमले को रोकने में नाकामयाब साबित हुई। इस एकमात्र गोल ने मैच का रुख पूरी तरह से बदल कर रख दिया। इसके बाद ईस्ट बंगाल ने कई बार बराबरी करने की कोशिश की लेकिन मोहन बागान का रक्षा कवच काफी मजबूत साबित हुआ।
जेल्जकोвич के गोल से हुआ फैसला
मैच के आखिरी मिनटों तक तनाव का माहौल बना रहा क्योंकि दोनों टीमों के समर्थक अपनी टीम की जीत के लिए दुआ कर रहे थे। सीटी बजते ही मोहन बागान के खेमे में जश्न शुरू हो गया और खिलाड़ियों ने मैदान पर दौड़कर अपनी खुशी का इजहार किया। इस जीत के साथ ही मोहन बागान ने रिकॉर्ड 22वीं बार आईएफए शील्ड का खिताब अपने नाम कर लिया। यह जीत क्लब और उसके चाहने वालों के लिए बेहद खास है क्योंकि उन्होंने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को फाइनल में हराया है।
इस जीत के साथ मोहन बागान ने एक और इतिहास रच दिया है। ठीक पचास साल बाद क्लब ने कलकत्ता फुटबॉल लीग यानी सीएफएल के बाद आईएफए शील्ड का खिताब भी जीता है। इसे खेल के जानकारों द्वारा पचास साल बाद का डबल धमाका कहा जा रहा है। टीम के कोच और प्रबंधन ने खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन की जमकर तारीफ की है। पूरे सीजन में टीम का खेल शानदार रहा है और इस फाइनल जीत ने उस पर मुहर लगा दी है।
पचास साल बाद ऐतिहासिक डबल धमाका
फाइनल मुकाबले तक पहुंचने का सफर मोहन बागान के लिए आसान नहीं रहा था। सेमीफाइनल मुकाबले में उनका सामना मजबूत पंजाब एफसी से हुआ था। उस कड़े मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट का सहारा लेना पड़ा था जहां मोहन बागान ने धैर्य दिखाते हुए जीत हासिल की थी। उस दबाव भरे मैच को जीतने के बाद टीम का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर था। फाइनल में उन्होंने उसी फॉर्म को जारी रखा और मैदान पर अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी।
दूसरी ओर ईस्ट बंगाल की टीम इस हार से बेहद निराश होगी। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन खिताबी मुकाबले में वे चूक गए। मैच के बाद खिलाड़ियों के चेहरे पर मायूसियां साफ नजर आ रही थीं। मैदान पर मौजूद उनके समर्थकों का दिल भी टूट गया क्योंकि वे अपनी टीम को जीतते देखना चाहते थे। हालांकि खेल में हार और जीत लगी रहती है और ईस्ट बंगाल के खिलाड़ी इस अनुभव से सीख लेकर आगे वापसी करना चाहेंगे।
डर्बी मैच की शानदार यादें
कोलकाता फुटबॉल का यह महामुकाबला एक बार फिर साबित कर गया कि यहाँ के खेल प्रेमियों में फुटबॉल का कितना क्रेज है। साल्टलेक स्टेडियम का गूँजता हुआ माहौल और दर्शकों का उत्साह इस खेल की असली ताकत है। मोहन बागान की इस ऐतिहासिक जीत को आने वाले कई सालों तक याद रखा जाएगा। खिलाड़ियों की मेहनत और रणनीति ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे इस खिताब के असली हकदार थे।








