कोलकाता के साल्टलेक स्टेडियम में मैदान पर एक बार फिर पुराना और कड़ा मुकाबला देखने को मिला। मोहन बागान की टीम ने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ईस्ट बंगाल को हराकर एक और बड़ा खिताब अपने नाम कर लिया है। इस खिताबी भिड़ंत में मोहन बागान ने ईस्ट बंगाल को एक-शून्य से मात दी और इतिहास के पन्नों में अपना नाम फिर से दर्ज कराया। यह जीत क्लब के करोड़ों फैंस के लिए किसी बड़े जश्न से कम नहीं है क्योंकि मैदान पर दोनों टीमों के बीच हमेशा से ही करो या मरो की टक्कर होती रही है।
इस मुकाबले का एकमात्र और सबसे अहम गोल जेल्जकोविच के पैर से निकला। मैच के दौरान दोनों ही टीमों के खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल दिखाया और एक-दूसरे के डिफेंस को भेदने की पूरी कोशिश की। लेकिन मोहन बागान के खिलाड़ियों ने बेहतर तालमेल और रणनीति दिखाते हुए ईस्ट बंगाल को कोई मौका नहीं दिया। जेल्जकोविच के उस एक सटीक शॉट ने खेल का पूरा पासा पलट दिया और स्टेडियम में मौजूद मोहन बागान के समर्थकों का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया।
पचास साल बाद ऐतिहासिक डबल धमाका
इस जीत के साथ ही मोहन बागान के नाम एक और बड़ा रिकॉर्ड जुड़ गया है। क्लब ने पचास साल के लंबे अंतराल के बाद एक ही सत्र में कलकत्ता फुटबॉल लीग यानी सीएफएल और आईएफए शील्ड दोनों बड़े खिताब अपने नाम किए हैं। फुटबॉल के जानकारों का मानना है कि यह उपलब्धि टीम की कड़ी मेहनत और मैदान पर दिखाए गए शानदार अनुशासन का नतीजा है। खिलाड़ी मैदान पर पूरे समय जोश में दिखे और कोच की रणनीति पर पूरी तरह से खरे उतरे।
इस टूर्नामेंट के फाइनल तक का सफर किसी भी टीम के लिए आसान नहीं रहा था। इससे पहले सेमीफाइनल मुकाबले में भी मोहन बागान को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ा था। पंजाब एफसी के खिलाफ खेले गए कड़े मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट के जरिए मोहन बागान ने फाइनल का टिकट कटाया था। उस मुश्किल मैच को जीतने के बाद टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था जिसका सीधा फायदा उन्हें इस खिताबी मुकाबले में मिला।
मैदान पर और बाहर दिखा प्रशंसकों का उत्साह
मैच खत्म होने के बाद कोलकाता की सड़कों और स्टेडियम के बाहर जश्न का माहौल बन गया। मोहन बागान के समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ अपनी टीम की इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। लाल और मैरून रंग के झंडों के साथ फैंस ने पूरी रात जीत के नारे लगाए। दूसरी ओर, ईस्ट बंगाल के खेमे में इस हार के बाद मायूसई छा गई क्योंकि टीम फाइनल मुकाबले में अपनी पूरी ताकत झोंकने के बावजूद गोल करने में नाकाम रही।
खेल प्रेमियों के लिए यह मुकाबला आने वाले कई दिनों तक चर्चा का विषय बना रहेगा। मोहन बागान के इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय फुटबॉल में उनका दबदबा आज भी कायम है। 22वीं बार आईएफए शील्ड पर कब्जा जमाकर क्लब ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे मैदान के असली सिकंदर हैं। अब सभी की नजरें आगामी टूर्नामेंट्स पर हैं जहां ये दोनों टीमें एक बार फिर आमने-सामने होंगी।
भारतीय फुटबॉल में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
स्थानीय स्तर पर खेले जाने वाले ऐसे पुराने टूर्नामेंट्स आज भी भारतीय फुटबॉल की रीढ़ माने जाते हैं। मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के बीच का मुकाबला सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि बंगाल की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। साल्टलेक स्टेडियम में उमड़ी दर्शकों की भारी भीड़ ने यह बता दिया कि आज भी पारंपरिक फुटबॉल के प्रति लोगों का प्यार कम नहीं हुआ है। खिलाड़ियों ने भी मैदान पर अपनी जान लगाकर खेल दिखाया और दर्शकों को निराश नहीं किया।







