नई दिल्ली/अंतरराष्ट्रीय खेल डेस्क, द फ्रीलान्स: जब बात आधुनिक टेनिस के दिग्गजों की होती है, तो नोवाक जोकोविच का नाम उस सूची में सबसे ऊपर चमकता है। लेकिन खेल का मैदान हमेशा एक सा नहीं रहता। पिछले कुछ महीनों में जोकोविच के करियर ग्राफ ने जितनी तेजी से आसमान छुआ है, उतनी ही गहराई से उन्हें झटके भी मिले हैं। 'द फ्रीलान्स' के खेल डेस्क ने जब इस महान खिलाड़ी के पिछले कुछ हफ्तों के प्रदर्शन का गहराई से विश्लेषण किया, तो एक बेहद दिलचस्प और संघर्षपूर्ण तस्वीर सामने आई।
चीन ओपन: जब जोकोविच ने फिर लिखा इतिहास
एक तरफ जहां उनके करियर को लेकर उम्र और फिटनेस को लेकर सवाल उठ रहे थे, वहीं जोकोविच ने चीन ओपन के कोर्ट पर उतरकर आलोचकों को करारा जवाब दिया। टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने इतिहास रचते हुए टेनिस के चिर-प्रतिद्वंद्वी राफेल नडाल का एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। चीन ओपन में अपनी 32वीं जीत दर्ज करते हुए जोकोविच ने सेमीफाइनल का टिकट कटाया और मजबूत प्रतिद्वंद्वी ज्वेरेव को मात दी। यह जीत इस बात का प्रमाण थी कि 'जोकर' अभी भी कोर्ट पर अपनी बादशाहत कायम रखने का माद्दा रखते हैं।
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मैराथन मुकाबले और विंबलडन की महागाथा
जोकोविच की मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति का सबसे बड़ा इम्तहान विंबलडन के मैदानों पर देखने को मिला। जब उन्होंने 5 घंटे और 15 मिनट तक चले एक मैराथन मुकाबले में जीत हासिल कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया, तो स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह मुकाबला केवल एक मैच नहीं था, बल्कि यह साबित करता था कि पांच सेट के थकाऊ मुकाबलों में भी जोकोविच की जिद और जीत का जज्बा दुनिया में सबसे अलग है।
यूएस ओपन: आंसुओं, उल्टी और मायूसी का काला साया
लेकिन हर चमकती चीज सोना नहीं होती। इसके विपरीत, यूएस ओपन का मंच जोकोविच के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। टूर्नामेंट के पहले ही दौर में अर्जेंटीना के 49वीं रैंकिंग वाले खिलाड़ी मारियानो नावोन के खिलाफ उन्हें अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। मैच के दौरान जोकोविच को मैदान पर उल्टी हुई, जिसके बाद उन्हें दवा लेनी पड़ी। आंखों में आंसू और चेहरे पर लाचारी का भाव लिए कोर्ट से बाहर जाते हुए 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन को देखना उनके प्रशंसकों के लिए झकझोर देने वाला पल था।
उम्र, फिटनेस और भविष्य के सामने खड़े सवाल
हमारी फील्ड जांच और खेल विश्लेषकों की राय के अनुसार, यह गिरावट किसी तकनीकी कमी की वजह से नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते शारीरिक तनाव और उम्र के असर का नतीजा है। 24 ग्रैंड स्लैम जीतने के बाद भी भूख कम नहीं हुई है, लेकिन शरीर अब उतनी तेजी से रिकवर नहीं कर पा रहा जितना युवावस्था में हुआ करता था।
निष्कर्ष और आगे की राह
नोवाक जोकोविच का वर्तमान दौर यह सिखाता है कि महानता केवल जीत दर्ज करने में नहीं, बल्कि लगातार गिरकर दोबारा खड़े होने में है। एक तरफ रिकॉर्ड टूट रहे हैं, तो दूसरी तरफ शरीर जवाब दे रहा है। आने वाले टूर्नामेंट्स में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह दिग्गज खिलाड़ी अपनी इस शारीरिक सीमा को पार कर पाता है या टेनिस का एक और अध्याय अपने ढलान की ओर बढ़ रहा है।







