पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां के कोसीपुर इलाके में स्थित ज्योतिनगर कॉलोनी के करीब 5,000 निवासी पिछले 50 दिनों से बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं। हालात यह हैं कि महिलाओं और बच्चों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
यहाँ रहने वाली 24 साल की सायरा बीबी रोज सुबह सड़क किनारे लगे एक नल पर अपनी बाल्टियों के साथ कतार में खड़ी नजर आती हैं। उन्हें जल्दी होती है क्योंकि घर में उनकी छह महीने की मासूम बच्ची अकेली होती है। सायरा अकेली नहीं हैं, बल्कि उनकी कॉलोनी के हजारों लोग इसी तरह की दुविधा का सामना कर रहे हैं।
29 जुलाई को अचानक काट दिया गया पानी का कनेक्शन
स्थानीय लोगों के अनुसार, कोलकाता नगर निगम (KMC) ने 29 जुलाई को अचानक इस इलाके के करीब छह नलों की सप्लाई काट दी थी। यह कटौती बैंक स्ट्रैंड रोड के 100 मीटर के दायरे में की गई थी। इस कॉलोनी में ज्यादातर गरीब मजदूर, दिहाड़ी कमाने वाले और कूड़ा बीनने वाले लोग रहते हैं, जो दशकों से यहां रह रहे हैं।
स्थानीय झुग्गी विकास समिति के सचिव शेख मोइनुद्दीन ने बताया कि झुग्गियों के अंदर व्यक्तिगत नल नहीं हैं, इसलिए सभी लोग इन सार्वजनिक नलों पर ही निर्भर हैं। अचानक पानी कट जाने से महिलाओं का पूरा दिन पानी का जुगाड़ करने में ही निकल जाता है। अब लोग या तो दूर की कॉलोनियों से पानी लाते हैं या फिर हफ्ते में दो बार आने वाले पानी के टैंकरों का इंतजार करते हैं।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट से जुड़ा है जमीन का विवाद
यह पूरा मामला भूमि के स्वामित्व और बेदखली से जुड़ा हुआ है। यह जमीन श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (जिसे पहले कोलकाता पोर्ट के नाम से जाना जाता था) की है। सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत यहां के लोगों को जमीन खाली करने का नोटिस दिया गया था।
निवासियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व चेतावनी या नोटिस के पानी से वंचित कर दिया गया। जब उन्होंने खोजबीन की तो पता चला कि पोर्ट के एस्टेट ऑफिसर ने फरवरी में ही बेदखली का नोटिस जारी कर दिया था। इस कॉलोनी में करीब 350 मतदाता हैं, जिनके नाम और भविष्य को लेकर अब संशय बना हुआ है।
कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली थोड़ी राहत
पानी के कनेक्शन कटने और बेदखली के नोटिस के खिलाफ स्थानीय लोग कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचे। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निवासियों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या सख्त कदम न उठाएं। अदालत का यह अंतरिम आदेश फिलहाल सितंबर तक बढ़ा दिया गया है।
"अदालत ने आदेश दिया है कि निवासियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न की जाए। बिना किसी निष्पक्ष प्रक्रिया के सार्वजनिक प्राधिकरण नागरिकों को पानी जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित नहीं कर सकते हैं। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।" — समिम अहमद, याचिकाकर्ता के वकील
इस पूरे मामले पर स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। वार्ड की पूर्व पार्षद सुमन सिंह ने कहा कि पानी की सप्लाई रोके जाने के कारणों के बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन यह सब राजनीतिक बदलाव के बाद हुआ है। फिलहाल, भीषण गर्मी और उमस के बीच इन 5,000 लोगों की निगाहें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं।
