नई दिल्ली / देहरादून। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) सहित उत्तर भारत के कई मैदानी और पर्वतीय इलाकों में मंगलवार सुबह अचानक आए भूकंप के झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। सुबह के समय जब अधिकांश लोग अपने रोजमर्रा के कामकाज की तैयारी कर रहे थे या सो रहे थे, तभी पंखे, खिड़कियां और घरेलू सामान हिलने लगे। झटके महसूस होते ही घबराए लोग बहुमंजिला इमारतों, सोसायटियों और घरों से बाहर खुले मैदानों की तरफ दौड़ पड़े। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 2.9 मापी गई है, जिसका प्रभाव राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद सहित उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों तक महसूस किया गया।
सुबह के समय डोली धरती, सोसायटियों में अफरा-तफरी
दिल्ली और एनसीआर के घनी आबादी वाले इलाकों में ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों ने बताया कि सुबह के वक्त अचानक बेड और सोफे हिलने लगे। कई आवासीय सोसायटियों में सायरन बज उठे और सुरक्षा गार्ड्स ने तुरंत लोगों को सुरक्षित और खुले स्थानों पर एकत्र होने की सलाह दी। नोएडा के सेक्टर 74, 137 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की गगनचुंबी सोसायटियों में लोग लिफ्ट का उपयोग करने के बजाय सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। राजधानी दिल्ली के मयूर विहार, लक्ष्मीनगर, रोहिणी और द्वारका क्षेत्रों में भी लोगों ने कुछ सेकंड तक थरथराहट महसूस की।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि झटके भले ही कुछ सेकंड के थे, लेकिन उनकी तीव्रता इतनी स्पष्ट थी कि कोई भी इसे नजरअंदाज नहीं कर सका। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र भूकंपीय संवेदनशीलता के लिहाज से जोन 4 (Seismic Zone IV) में आता है, जिसके चलते हिमालयी बेल्ट या आसपास के फॉल्ट लाइन्स में होने वाली किसी भी प्लेट टेक्टोनिक हलचल का सीधा और गहरा असर इस पूरे क्षेत्र पर पड़ता है।
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उत्तराखंड और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी महसूस हुए झटके
प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन की गहराई में स्थित था, जिसके चलते झटके केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहे बल्कि उत्तराखंड के तराई और गढ़वाल के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने तुरंत सभी तहसीलों और पुलिस चौकियों से संपर्क स्थापित किया। सौभाग्य से, प्रारंभिक आकलन में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या ढांचागत क्षति की कोई खबर नहीं है।
आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अपुष्ट अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों द्वारा जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
दिल्ली-एनसीआर में बार-बार क्यों हिलती है जमीन?
भूवैज्ञानिकों और सिस्मोलॉजिस्ट्स का मानना है कि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट की ओर उत्तर दिशा में खिसक रही है। इस टकराव और दबाव के कारण हिमालयी क्षेत्र में ऊर्जा जमा होती रहती है। जब यह ऊर्जा फॉल्ट लाइन्स के जरिए बाहर निकलती है, तो भूकंपीय तरंगें दिल्ली-एनसीआर के जलोढ़ मैदानों तक तेजी से पहुंचती हैं। यमुना का कछार और रेतीली मिट्टी होने के कारण दिल्ली के कई हिस्सों में इन तरंगों का प्रभाव और अधिक तीव्र महसूस होता है।
विशेषज्ञों ने नागरिकों को याद दिलाया है कि भूकंप के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, भारी फर्नीचर के नीचे ड्रॉप, कवर एंड होल्ड का नियम अपनाएं और बिजली के खंभों व ऊंची दीवारों से दूर खुले स्थानों पर रहें। प्रशासन ने सभी नगर निगमों को पुरानी व जर्जर इमारतों का सुरक्षा ऑडिट कराने के भी निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक सतर्कता और ग्राउंड रिपोर्ट का सारांश
द फ्रीलान्स की टीम ने जमीनी स्तर पर दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के विभिन्न नियंत्रण कक्षों से जानकारी जुटाई है। दिल्ली पुलिस और आपदा राहत बलों ने पुष्टि की है कि यातायात, मेट्रो सेवाएं और सभी आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। मेट्रो ट्रेनों को एहतियात के तौर पर कुछ मिनट के लिए धीमी गति पर चलाया गया था, लेकिन स्थिति का जायजा लेने के बाद परिचालन को सामान्य कर दिया गया। सरकार स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही है।








