उत्तर प्रदेश की राजधानी के कई इलाकों में बाढ़ के पानी ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई परिवारों के लिए उनके अपने घर ही सुरक्षित पनाहगाह की बजाय इंतजार का केंद्र बन गए हैं। किचन से लेकर बेडरूम और गलियों तक पानी भर जाने के कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह ठप हो गई है।
छतों पर शरण और राहत की बोट का इंतजार
जिन रास्तों और गलियों से लोग रोजाना अपने कामकाज के लिए निकलते थे, वे अब पूरी तरह जलमग्न हैं। बाढ़ का पानी घरों के उस हिस्से तक पहुंच चुका है जहां रोजमर्रा की जिंदगी चलती थी। रसोई और कमरों में पानी भरने के बाद लोगों ने अपना जरूरी सामान ऊपर रख लिया है और खुद छतों पर ठिकाना बनाया है। सुबह से ही हाथ में ब्रेड और नाश्ते का सामान थामे लोग बोट का इंतजार करते नजर आ रहे हैं, क्योंकि पानी के बीच पैदल सफर करना असंभव हो चुका है।
राजधानी में बाढ़ का कहर: घरों में घुसा पानी, बोट के सहारे पहुंचाई जा रही है राहत सामग्री। pic.twitter.com/example
— The Freelance (@TheFreelance_in) October 24, 2023
प्रशासनिक राहत और लाउडस्पीकर से अपील
संकट की इस घड़ी में राहत और बचाव टीमें लगातार पानी के बीच मोर्चा संभाले हुए हैं। एडीएम सिटी महेंद्र पाल के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए लगभग 100 बोट्स लगाई गई हैं, जिनके जरिए करीब 2000 परिवारों तक लगातार मदद पहुंचाई जा रही है। लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार घोषणा कर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है, हालांकि कई परिवार अब भी अपने घरों की छतों पर ही डटे हुए हैं।
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