भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी सुशांत नंदा द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया गया एक वीडियो इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों और शोधकर्ताओं के बीच गहरी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में ओडिशा के प्रसिद्ध सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व के जंगलों में दुर्लभ काले बाघ (Melanistic Tigers) को टहलते हुए देखा जा सकता है, जिनके शरीर पर विशिष्ट गहरी धारियां होती हैं। यह दृश्य न केवल अपनी सुंदरता से लोगों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि वन्यजीव विज्ञान के एक अहम पहलू को भी उजागर कर रहा है।
वीडियो के साथ साझा किए गए विवरण में बताया गया है कि सिमिलिपाल एक अलग-थलग (isolated) बाघों की आबादी वाला क्षेत्र है, जिसकी अन्य बाघ बस्तियों से कनेक्टिविटी काफी सीमित है। इसी भौगोलिक अलगाव के कारण यहां इनब्रीडिंग और जेनेटिक ड्रिफ्ट (आनुवंशिक विचलन) की प्रक्रिया तेजी से होती है, जिसके चलते बाघों की खाल के रंग और पैटर्न में दुर्लभ रिसेसिव म्यूटेशन (recessive mutations) देखने को मिलते हैं।
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वन्यजीव विशेषज्ञों और आनुवंशिकीविदों के अनुसार, सिमिलिपाल में संस्थापक आबादी (founder population) का आकार छोटा होने के कारण म्यूटेशन की संभावना काफी अधिक हो जाती है। यही कारण है कि दुनिया भर में केवल इसी क्षेत्र में इस प्रकार के 'स्यूडोमेलैनिस्टिक' यानी छद्म-कृष्ण वर्ण वाले बाघ पाए जाते हैं। हालांकि ये बाघ बंगाल टाइगर की ही उप-प्रजाति हैं, लेकिन इनका विशिष्ट रंग इन्हें पूरी दुनिया में अनोखा बनाता है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही यूजर्स विभिन्न प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। जहां एक ओर आम लोग प्रकृति के इस अद्भुत और रहस्यमयी रूप को देखकर आश्चर्यचकित हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणविदों ने इस बात पर चिंता भी जताई है कि अत्यधिक इनब्रीडिंग भविष्य में इस विशिष्ट आबादी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। बहरहाल, यह वीडियो वन्यजीव संरक्षण और आनुवंशिक विविधता के अध्ययन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





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