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भारत में यूरिया और डीएपी की किल्लत, आसमान छूती कीमतें और 3 लाख करोड़ तक पहुंचती सब्सिडी के बीच किसानों का रुझान अब प्राकृतिक खेती और देसी विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।