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हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव की नाक, कान और खुले अंगों में रुई रखने की परंपरा है। गरुड़ पुराण और आयुर्वेद में इसके पीछे ऊर्जा के संरक्षण, स्वच्छता और वैज्ञानिक कारणों को विस्तार से समझाया गया है।