कैंसर के इलाज के बढ़ते खर्च पर सरकार का बड़ा प्रहार
भारत में कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी का इलाज कराना मरीज और उसके पूरे परिवार के लिए किसी बड़ी आर्थिक चुनौती से कम नहीं होता है। खासकर इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक दवाओं की कीमतें इतनी अधिक होती हैं कि आम आदमी की सारी जमा-पूंजी इलाज में ही खत्म हो जाती है। इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों पर नकेल कसने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। दवा बाजार में मनमाने दामों पर बेची जाने वाली जीवनरक्षक दवाओं पर अब मुनाफाखोरी की सीमा तय कर दी गई है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर से जुड़ी 137 गैर-अनुसूचित दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को केवल 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि निर्माता कंपनी से लेकर स्टॉकिस्ट, वितरक और खुदरा विक्रेता तक के बीच होने वाले मुनाफे का दायरा अब तय कर दिया गया है। इस व्यवस्था के लागू होने से बाजार में मिलने वाली इन जीवनरक्षक दवाओं की खुदरा कीमतों (MRP) में मौजूदा दरों के मुकाबले 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आने की पूरी संभावना है। सरकार के इस कदम से उन मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों को सबसे बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें महंगी दवाओं के कारण कर्ज के दलदल में फंसना पड़ता था।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर उठाया गया यह सख्त कदम
दवाओं की कीमतों को तर्कसंगत बनाने की यह पूरी प्रक्रिया एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार की गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के अंतर्गत गठित इस समिति में देश भर के नामी ऑन्कोलॉजिस्ट, कैंसर विशेषज्ञ, बड़े अस्पतालों के चिकित्सक और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल थे। समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में उन 137 दवाओं को चिन्हित किया था, जिन पर बिचौलियों और वितरकों द्वारा अत्यधिक मुनाफा वसूला जा रहा था। इन सभी पहलुओं की गहन समीक्षा के बाद सरकार ने यह कड़ा निर्णय लिया है।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन काम करने वाले एनपीपीए ने इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था आगामी 9 नवंबर से देश भर में पूरी तरह से लागू हो जाएगी। तय की गई इस सूची को समय-समय पर अपडेट भी किया जाएगा ताकि नई और आधुनिक दवाओं को भी इसके दायरे में लाया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल दवाओं के दाम नियंत्रित होंगे, बल्कि बाजार में एक पारदर्शी व्यवस्था भी स्थापित होगी।
सालाना 2,500 करोड़ रुपये की होगी सीधी बचत
कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने हलफनामे में यह जानकारी साझा की थी कि कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की सीमा तय करने से देश के आम नागरिकों को कितना बड़ा आर्थिक फायदा पहुंचेगा। शुरुआती आकलन के अनुसार, इस एक फैसले से कैंसर के मरीजों और उनके तीमारदारों को सालाना लगभग 2,500 करोड़ रुपये की सीधी बचत होने की उम्मीद है। जब दवाएं सस्ती होंगी, तो मरीजों का इलाज बीच में रुकने का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाएगा और लोग समय पर अपनी पूरी खुराक ले सकेंगे।
"कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए वित्तीय संकट सबसे बड़ा बोझ होता है। दवाओं के दामों पर यह नियंत्रण न केवल आर्थिक राहत देगा, बल्कि जीवन बचाने की इस लड़ाई में एक मजबूत संबल भी साबित होगा। सरकार का यह फैसला स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता की दिशा में एक मील का पत्थर है।" — वरिष्ठ चिकित्सा विश्लेषक
इससे पहले साल 2019 में भी एनपीपीए ने एक प्रायोगिक योजना के तहत 42 कैंसर-रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तय किया था। उस दौरान लगभग 526 अलग-अलग ब्रांड की दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में 90 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की गई थी। उसी सफलता से प्रेरणा लेते हुए अब इस दायरे को और अधिक व्यापक बनाते हुए 137 प्रमुख दवाओं को इसमें शामिल किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक इसका सीधा लाभ पहुंच सके।
अस्पतालों और दवा विक्रेताओं के लिए कड़े निर्देश जारी
सरकार ने इस नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए देश के सभी राज्य दवा नियंत्रकों को विशेष निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य स्तर के अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि दवा निर्माता, स्टॉकिस्ट, रिटेल स्टोर, बड़े अस्पताल और मेडिकल संस्थान किसी भी सूरत में नियमों का उल्लंघन न करें। सभी संबंधित संस्थानों को यह अनिवार्य किया गया है कि वे अधिसूचना जारी होने के कुछ दिनों के भीतर ही अपनी संशोधित मूल्य सूचियों की जानकारी एनपीपीए को सौंप दें और अपनी फार्मेसी तथा दुकानों पर नए दामों को प्रमुखता से प्रदर्शित करें।
आम उपभोक्ता और मरीज इन नई और संशोधित कीमतों की सत्यता की जांच करने के लिए एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ सरकार के विशेष मोबाइल ऐप ‘फार्मा सही दाम’ का उपयोग कर सकते हैं। यदि कोई अस्पताल या दवा विक्रेता निर्धारित नियमों से अधिक कीमत वसूलता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की इस सख्त निगरानी से साफ है कि मुनाफाखोरों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा।










