नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच एक बेहद डरावनी और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। सड़क पर सामान्य रफ्तार से दौड़ती एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक कार अचानक आग के गोले में बदल गई। गाड़ी के भीतर बैठे चार लोग चाहकर भी बाहर नहीं निकल सके और उनकी जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण हादसे के बाद वाहन सुरक्षा मानकों और बैटरी तकनीक पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार से अचानक धुआं निकलता देख आसपास के लोगों ने वाहन चालकों को आगाह करने की कोशिश की थी। इससे पहले कि कार को सड़क किनारे रोककर लोग बाहर निकलते, देखते ही देखते आग की ऊंची लपटों ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम फेल होने के कारण अंदर बैठे लोग अंदर ही फंस गए और बाहर नहीं आ सके। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। राहत और बचाव दल जब तक मौके पर पहुंचा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और चारों लोग दम तोड़ चुके थे।
बैटरी सुरक्षा और तकनीकी खामियों पर उठे बड़े सवाल
पिछले कुछ महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से इलेक्ट्रिक गाड़ियों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जानकारों का मानना है कि भारतीय मौसम की अत्यधिक गर्मी और लगातार लंबी दूरी तक गाड़ी चलाने से बैटरी का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। यदि कूलिंग सिस्टम ठीक से काम न करे, तो लिथियम-आयन बैटरी में थर्मल रनवे की स्थिति बन जाती है जिससे पलभर में भयानक आग भड़क उठती है। वाहन निर्माताओं द्वारा किए जाने वाले सुरक्षा दावों की जमीनी हकीकत अब एक बड़े संदेह के घेरे में आ गई है। परिवहन मंत्रालय और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों की एक विशेष टीम अब इस पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुट गई है।
हादसे का शिकार हुए परिवार के लोगों और स्थानीय नागरिकों में भारी गुस्सा और शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे वाहन निर्माता कंपनी पर सख्त कार्रवाई तथा मुआवजे की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि कंपनियां महंगे विज्ञापनों में सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन सड़क पर उतरने के बाद ये गाड़ियां मौत का जाल साबित हो रही हैं। प्रशासन ने फॉरेंसिक जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह साफ हो सके कि आग लगने की असल तकनीकी वजह क्या थी।
सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों के लिए जरूरी एहतियात
इस दुखद हादसे ने एक बार फिर से इस बात की जरूरत को रेखांकित किया है कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने से पहले उनकी सुरक्षा परखनी बेहद जरूरी है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का सुझाव है कि इलेक्ट्रिक कार चालकों को लंबी यात्रा के दौरान बैटरी के तापमान पर लगातार नजर रखनी चाहिए। यदि डैशबोर्ड पर किसी भी तरह की चेतावनी लाइट जले या अजीब गंध आए, तो तुरंत गाड़ी रोककर बाहर निकल जाना समझदारी है। इसके अलावा, कारों में आपातकालीन स्थिति के लिए मैनुअल डोर रिलीज मेकैनिज्म का होना अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि बिजली गुल होने पर भी दरवाजे खोले जा सकें।
स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए उसके निर्माण और मेंटेनेंस का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। कंपनी के स्थानीय डीलरों और तकनीकी इंजीनियरों से भी पूछताछ की तैयारी की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि गाड़ी की समय पर सर्विसिंग हुई थी या नहीं। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है और जैसे ही फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आएगी, सबसे पहले आप तक सटीक जानकारी पहुंचाई जाएगी।





