नई दिल्ली से ग्राउंड ब्यूरो की रिपोर्ट — देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ से जुड़ी खबरें इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। सोशल मीडिया और तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार जल्द ही पीएफ की वेज सीलिंग को पंद्रह हजार रुपये से बढ़ाकर पच्चीस हजार रुपये कर सकती है। यदि यह बदलाव होता है तो देश के लाखों नए कर्मचारी इस सामाजिक सुरक्षा दायरे के भीतर आ जाएंगे। नियम बदलने के बाद कंपनियों और कर्मचारियों दोनों के योगदान का गणित पूरी तरह बदल जाएगा।
इस बीच, ईपीएफओ ने खाताधारकों को अपने फंड से जुड़े रिकॉर्ड समय पर ठीक रखने की सख्त चेतावनी दी है। कई बार लोग नौकरी बदलते ही अपना पूरा पीएफ का पैसा निकाल लेते हैं और पीछे के दस्तावेजों पर ध्यान नहीं देते हैं। जानकारों का कहना है कि ऐसा करना भविष्य में भारी पड़ सकता है क्योंकि पुरानी कंपनी का डेटा और नई कंपनी का यूएएन लिंक न होने पर खाता फंस जाता है। इसलिए पैसा निकालने से पहले अपने खाते की पूरी केवाईसी और पुरानी जानकारियों को ऑनलाइन जरूर जांच लेना चाहिए।
वेतन सीमा बढ़ने से पेंशन पर क्या असर पड़ेगा
पेंशन यानी ईपीएस को लेकर भी कर्मचारियों के मन में तमाम सवाल लगातार बने हुए हैं। यदि मूल वेतन की सीमा पंद्रह हजार से बढ़ाकर पच्चीस हजार रुपये होती है, तो पेंशन की गणना का तरीका भी बदल जाएगा। जिन कर्मचारियों की मासिक सैलरी पच्चीस हजार रुपये से कम है, उन्हें इस बदलाव से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक श्रम मंत्रालय या ईपीएफओ की तरफ से कोई आधिकारिक और अंतिम तारीख वाला आदेश जारी नहीं किया गया है।
बाजार में चल रही इन चर्चाओं के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों को केवल कयासों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। जब तक श्रम मंत्रालय की ओर से गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक मौजूदा नियम ही लागू रहेंगे। इसलिए हर नौकरीपेशा व्यक्ति को अपने पीएफ खाते के पोर्टल पर जाकर लगातार नजर रखनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की तकनीकी अड़चन से बचा जा सके।
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पीएफ निकालते समय इन छह बातों का रखें ध्यान
ईपीएफओ ने अपने पोर्टल पर कई बार स्पष्ट किया है कि पैसा निकालने की ऑनलाइन अर्जी देने से पहले छह जरूरी बातों की जांच जरूर कर लें। सबसे पहले अपना नाम, जन्मतिथि और बैंक खाता नंबर आधार कार्ड से पूरी तरह मेल खाता होना चाहिए। यदि इनमें एक भी स्पेलिंग की गलती पाई गई, तो आपका पैसा सीधे बैंक खाते में अटक जाएगा और आवेदन रद्द हो जाएगा। इसके अलावा पिछली नौकरी छोड़ने की तारीख यानी डेट ऑफ एग्जिट का अपडेट होना भी उतना ही जरूरी है।
अक्सर देखा गया है कि लोग नई नौकरी ज्वाइन तो कर लेते हैं लेकिन पुरानी कंपनी से डेट ऑफ एग्जिट अपडेट नहीं करवाते। इसकी वजह से जब वे पीएफ निकालने जाते हैं तो सिस्टम एरर दिखाने लगता है और महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का बैंक खाते तथा आधार से लिंक होना भी उतना ही अनिवार्य कर दिया गया है ताकि ओटीपी समय पर मिल सके।
भविष्य की तैयारी और हमारी ग्राउंड पड़ताल
द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की, तो यह सामने आया कि वेज सीलिंग बढ़ाने की मांग लंबे समय से ट्रेड यूनियनों द्वारा की जा रही है। सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है लेकिन इसे अमलीजामा पहनाने में अभी कुछ वक्त और लग सकता है। आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें।




