भारत ने एयरो-इंजन निर्माण के क्षेत्र में अपनी आत्मनिर्भरता की ओर एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ा दिया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के कोरापुट डिवीजन ने अपना 2000वां एयरो-इंजन रक्षा बलों को सौंप दिया है। इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिरकत की और देश में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े और दूरदर्शी ऐलान किए।
बढ़ेगी AL-31FP और शक्ति इंजनों की उत्पादन क्षमता
HAL अपने कोरापुट डिवीजन में उत्पादन क्षमता को तेजी से विस्तार दे रहा है। सरकार द्वारा Su-30MKI विमानों के लिए मिले ऑर्डर के तहत AL-31FP इंजन की सालाना प्रोडक्शन क्षमता 30 से बढ़ाकर 50 करने का निर्णय लिया गया है। इस कार्य पर लगभग 335 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
इसके साथ ही, ध्रुव (ALH) और प्रचंड (LCH) जैसे अत्याधुनिक हेलिकॉप्टरों में इस्तेमाल होने वाले 'शक्ति इंजन' की दूसरी प्रोडक्शन लाइन स्थापित की जा रही है। इस पर 218 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे वर्ष 2028-29 तक हर साल 100 शक्ति इंजन तैयार किए जा सकेंगे। कोरापुट डिवीजन पिछले 6 दशक से MiG और Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों के लिए इंजन निर्माण और मरम्मत का प्रमुख केंद्र रहा है।
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AMCA के लिए 5000 करोड़ का हाई-थ्रस्ट इंजन मिशन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर दिया कि भारत को केवल विमान और हेलिकॉप्टरों के आयात या असेंबलिंग पर निर्भर रहने के बजाय उनके इंजनों का निर्माण भी स्वदेशी तकनीक से करना होगा। विशेष रूप से, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए एक शक्तिशाली स्वदेशी इंजन की आवश्यकता है।
इस दिशा में सरकार करीब 5,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ हाई-थ्रस्ट इंजन कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है। इसमें कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर आधुनिक टेस्टिंग सुविधाओं के विकास तक पर फोकस किया जा रहा है, जिससे भारत वैश्विक एयरोस्पेस बाजार में एक बड़ी ताकत के रूप में उभर सके।
यह रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय और HAL के आधिकारिक बयानों व प्रेस विज्ञप्तियों पर आधारित है। 'The Freelance' इसकी सत्यता और तथ्यात्मक सटीकता की पुष्टि करता है।






