हिमाचल प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण अभियान की तेज रफ्तार
देशभर में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच हिमाचल प्रदेश से एक बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक खबर सामने आई है। पर्वतीय राज्य के विभिन्न इलाकों में सर्वाइकल कैंसर यानी बच्चेदानी के मुंह के कैंसर से बचाव के लिए चलाए जा रहे एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान ने अपनी मंजिल का एक बड़ा हिस्सा तय कर लिया है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े प्रशासनिक सूत्रों और मैदानी अमले की कड़ी मेहनत के चलते इस मेगा स्वास्थ्य अभियान का नब्बे प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा व्यवस्था के लिए बल्कि प्रदेश की किशोरियों और उनके परिवारों के लिए भी राहत भरी खबर है।
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है, लेकिन समय रहते टीका लगवाने से इस घातक बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी खतरे को भांपते हुए सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस विशेष टीकाकरण अभियान को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया था। प्रदेश के विभिन्न जिलों और सुदूर पहाड़ी अंचलों तक चिकित्सा कर्मियों ने पहुंचकर बालिकाओं को इस जीवनरक्षक टीके से आच्छादित करने का बीड़ा उठाया था। शुरुआती चुनौतियों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों का जज्बा कम नहीं हुआ और उन्होंने निर्धारित समयावधि में नब्बे प्रतिशत लक्ष्य को भेद दिया।
संबंधित खबरें
अभियान की सफलता के पीछे स्वास्थ्य कर्मियों और प्रशासन की मेहनत
किसी भी बड़े सरकारी स्वास्थ्य अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी जमीनी पहुंच कितनी मजबूत है। हिमाचल प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण को घर-घर और स्कूल स्तर तक ले जाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक व्यापक रणनीति तैयार की थी। ब्लॉक स्तर के अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सभी चिकित्सा अधिकारियों को इस कार्य की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम बहनों ने घर-घर जाकर अभिभावकों को इस टीके के फायदे समझाए और सामाजिक झिझक या भ्रांतियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाई।
अभिभावकों की काउंसलिंग करने के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों में विशेष शिविर आयोजित किए गए, जहां लक्षित आयु वर्ग की बालिकाओं को बिना किसी परेशानी के टीके की खुराक दी गई। कई ग्रामीण इलाकों में शुरुआती दौर में लोग इस नए टीके को लेकर संशय में थे, लेकिन चिकित्सा दल के निरंतर संवाद और जागरूकता बैठकों के बाद लोगों का डर दूर होता चला गया। यही कारण है कि आज प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में नब्बे प्रतिशत टीकाकरण का आंकड़ा पार हो चुका है जो अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक और चिकित्सीय मील का पत्थर है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव और भविष्य की बड़ी तैयारी
चिकित्सकों का मानना है कि एचपीवी टीका किशोरावस्था की शुरुआत में ही लग जाने से महिलाओं में आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर होने की आशंका नगण्य हो जाती है। यह टीका भविष्य की पीढ़ी को एक स्वस्थ जीवन देने की दिशा में सबसे मजबूत कवच माना जाता है। भारत जैसे देश में जहां महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले बड़ी संख्या में सामने आते हैं, वहां इस तरह के राज्य-स्तरीय टीकाकरण अभियान वरदान साबित हो रहे हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रही है कि किस तरह इच्छाशक्ति और बेहतर प्रबंधन से बड़े स्वास्थ्य लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सकता है।
"हमारी प्राथमिकता प्रदेश की हर एक पात्र बालिका तक जीवनरक्षक एचपीवी टीका पहुंचाना है। जमीनी स्तर पर जुटी स्वास्थ्य टीमों की बदौलत हमने नब्बे प्रतिशत का पड़ाव पार कर लिया है और शेष बचे हुए हिस्से को भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।"— स्वास्थ्य विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो इलाके या बस्तियां अभी किसी कारणवश इस दायरे से बाहर रह गई हैं, उनके लिए विशेष कैच-अप ड्राइव चलाई जा रही है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन तक पहुंच बनाएं ताकि कोई भी बच्ची इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ से वंचित न रहे।
निष्कर्ष और आगे की राह
संक्षेप में कहा जाए तो हिमाचल प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण अभियान की यह सफलता चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर है। नब्बे प्रतिशत कार्य का पूरा होना इस बात का प्रमाण है कि यदि सही योजना और जनभागीदारी को मिला दिया जाए तो किसी भी स्वास्थ्य लक्ष्य को पाना असंभव नहीं है। आने वाले दिनों में जब यह अभियान सौ प्रतिशत पूरा हो जाएगा, तब यह राज्य देश के सबसे स्वस्थ और जागरूक राज्यों की श्रेणी में मजबूती से खड़ा नजर आएगा। सरकार और जनता के बीच का यह आपसी विश्वास आने वाले समय में अन्य बीमारियों के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा भी बनेगा।








