नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत का आयात बाजार इन दिनों एक बेहद दिलचस्प और बड़े मोड़ पर खड़ा है। देश के सामने एक तरफ चीन से आने वाले सस्ते और अनचाहे सामानों का पुराना जाल है, तो दूसरी तरफ दुनिया भर में बदलते कूटनीतिक समीकरणों के बीच नई व्यापारिक राहें तलाशने की मजबूरी भी है। पिछले कुछ महीनों में देश के आयात के आंकड़े बताते हैं कि भारत सरकार अब अपनी नीतियों में कड़े बदलाव कर रही है। चाहे बात पड़ोसी देश से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामानों की हो या फिर सात समंदर पार से आने वाले कच्चे तेल की, हर मोर्चे पर तस्वीर तेजी से बदल रही है। आम आदमी की जेब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और बाजार की चाल भी इसी के हिसाब से तय हो रही है।
बीबीसी की हालिया रिपोर्ट बताती है कि कैसे धीरे-धीरे और चुपचाप भारत चीनी सामानों के आयात के जाल में फंसता चला गया। मोबाइल फोन के कलपुर्जे हों या फिर रोजमर्रा के प्लास्टिक के खिलौने, हमारी निर्भरता पड़ोसी देश पर बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। इस जाल से बाहर निकलने के लिए सरकार अब मेक इन इंडिया और लोकल फॉर वोकल जैसे नारों के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है। लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं है क्योंकि भारतीय उद्योगों को अभी भी कई कच्चे माल के लिए चीन का मुंह देखना पड़ता है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इस निर्भरता को खत्म करने में अभी कई साल का समय लग सकता है।
कच्चे तेल के बाजार में भारत की नई चाल
ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भारत ने अपनी रणनीति में बड़ा फेरबदल किया है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, जब रूस से मिलने वाला कच्चा तेल महंगा होने लगा, तो भारत ने तुरंत अपनी दिशा बदल दी और दूसरे देशों से तेल खरीदना शुरू कर दिया। नवभारत टाइम्स की एक और खास रिपोर्ट बताती है कि वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात अब सात साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद भारत ने इस दक्षिण अमेरिकी देश से भारी मात्रा में तेल मंगाना शुरू कर दिया है। यह कदम साफ दिखाता है कि भारत अपनी जरूरत के हिसाब से बिना किसी दबाव के सबसे सस्ते और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोतों को चुन रहा है।
केवल कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि खाने के तेल यानी पाम तेल के बाजार में भी नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इन्वेस्टिंग डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, आईग्रेन इंडिया के आंकड़े बताते हैं कि पाम तेल के आयात के लिए लगातार नए स्रोतों की तलाश जारी है ताकि घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखा जा सके। इंडोनेशिया और मलेशिया पर पारंपरिक निर्भरता को कम करने के लिए सरकार अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ नए व्यापार समझौतों पर बात कर रही है। देश की आबादी और रसोई की मांग इतनी बड़ी है कि पाम तेल का आयात रोकना संभव नहीं है, इसलिए इसके विकल्पों को बढ़ाना ही एकमात्र उपाय बचा है।
सोने और चांदी पर जीएसटी परिषद की टेढ़ी नजर
आयात के इस पूरे चक्र में कीमती धातुओं का बाजार भी पीछे नहीं है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद कि लोग कम से कम सोने-चांदी की खरीदारी करें, अब जीएसटी परिषद इस पर बड़ा फैसला ले सकती है। सोने और चांदी के आयात पर मिलने वाली टैक्स छूट और दरों की समीक्षा करने के लिए अधिकारीयों की उच्च स्तरीय बैठकें चल रही हैं। देश में सोने का आयात हमेशा से चालू घाटे यानी करंट अकाउंट डिफिसिट का एक बड़ा कारण रहा है। अगर सरकार इस पर कड़े टैक्स या नियम लागू करती है, तो इससे देश से बाहर जाने वाले विदेशी मुद्रा भंडार पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है।
मैदान से मिली जमीनी हकीकत यह बताती है कि भारत का आयात ढांचा अब केवल पारंपरिक समझौतों तक सीमित नहीं रहा है। सरकार हर उस देश के साथ हाथ मिलाने को तैयार है जो भारत की आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों को पूरा कर सके। चाहे वह वेनेजुएला का कच्चा तेल हो या फिर पाम तेल के नए बाजार, हर कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया जा रहा है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि आने वाले दिनों में आयात नीति में और भी कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिनका असर सीधे तौर पर आम आदमी की थाली और बाजार की कीमतों पर पड़ेगा।
व्यापार घाटे को पाटने की कठिन चुनौती
देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती आयात और निर्यात के बीच के अंतर को कम करने की है। हम जितना सामान बाहर से मंगाते हैं, उसकी कीमत हमारे कुल निर्यात से कहीं ज्यादा होती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के मामले में तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। जब तक देश के भीतर ही आधुनिक तकनीक और फैक्ट्रियों का जाल नहीं बिछेगा, तब तक हम विदेशी सामानों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर रहेंगे। नीति आयोग और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। आने वाले बजट सत्र और व्यापार नीतियों में इस पर कुछ और कड़े कदम उठाए जाने की पूरी संभावना है।






