नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले आम लोग इन दिनों अपने मासिक खर्च को लेकर काफी परेशान दिख रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में टेलीकॉम कंपनियों ने अपने प्रीपेड और पोस्टपेड प्लान काफी महंगे कर दिए हैं। इसके चलते हर आम आदमी के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है। आज इंटरनेट पर अचानक एक नया शब्द तेजी से खोजा जा रहा है। गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार घंटों में इस विषय पर लोगों की जिज्ञासा बहुत बढ़ गई है। लोग लगातार यह जानना चाहते हैं कि उनके फोन का खर्च आने वाले दिनों में और कितना बढ़ने वाला है।
हमारी ग्राउंड टीम ने जब इस पूरे मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि यह सिर्फ एक तकनीकी खोज नहीं है। इसका सीधा संबंध लोगों की जेब और उनकी मासिक कमाई से जुड़ा हुआ है। जब फोन कंपनियां बार-बार रिचार्ज के दाम बढ़ाती हैं तो हर परिवार का बजट हिल जाता है। आम नौकरीपेशा लोग और छोटे दुकानदार इंटरनेट के बिना अपना काम नहीं चला सकते हैं। ऐसे में महंगे प्लान खरीदना उनकी मजबूरी बन चुका है। लोग अब यह हिसाब लगा रहे हैं कि वे कम पैसों में कैसे ज्यादा डेटा और बात करने की सुविधा पा सकते हैं।
सस्ते प्लान की तलाश में जुटे मोबाइल यूजर
बाजार में इस समय कई तरह के नए प्लान चल रहे हैं जिनमें डेटा और कॉलिंग की अलग-अलग शर्तें होती हैं। लेकिन आम ग्राहक को हमेशा यही लगता है कि उसे कम कीमत में बेहतर सुविधा मिलनी चाहिए। हाल ही में कई कंपनियों ने अपने ग्राहकों को रोकने के लिए लंबी अवधि वाले नए विकल्प बाजार में उतारे हैं। इन नए विकल्पों में नब्बे दिन और चौरासी दिन की वैधता वाले प्लान शामिल हैं। हालांकि इन प्लान की कुल कीमत अब पहले से काफी ज्यादा हो चुकी है। ग्राहक हर रिचार्ज से पहले यह सोचता है कि क्या इतने पैसे खर्च करना सचमुच जरूरी है या नहीं।
शहरों से लेकर छोटे गांवों तक हर जगह स्मार्टफोन का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर बड़ों के दफ्तर के काम तक सब कुछ इंटरनेट पर निर्भर है। ऐसे में रिचार्ज कराना किसी जरूरी बिल चुकाने जैसा हो गया है। जब भी कंपनियां अपने प्लान के दाम बढ़ाती हैं तो लोगों की त्योरियां चढ़ जाती हैं। लोग सोशल मीडिया और सर्च इंजन पर यह तलाशते हैं कि कौन सी कंपनी सबसे सस्ता और अच्छा विकल्प दे रही है। यही वजह है कि आज यह विषय इंटरनेट पर सबसे आगे चल रहा है।
पारिवारिक बजट पर पड़ रहा है सीधा असर
एक मध्यमवर्गीय परिवार में महीने का बजट बहुत नपी-तुली0 होता है। घर का किराया, बिजली का बिल, बच्चों की फीस और खाने-पीने का सामान खरीदने के बाद बहुत कम पैसे बचते हैं। ऐसे में अगर घर के तीन या चार सदस्यों के फोन का रिचार्ज भी महंगा हो जाए तो पूरा गणित बिगड़ जाता है। लोगों का कहना है कि सरकार को इस दिशा में कुछ कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि टेलीकॉम कंपनियां मनमाने तरीके से दाम न बढ़ा सकें। आज का उपभोक्ता हर एक रुपये का हिसाब लगाता है और समझदारी से अपने पैसे खर्च करना चाहता है।
हमारी इस शुरुआती पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि मोबाइल रिचार्ज अब एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है। लोग केवल कॉलिंग के लिए नहीं बल्कि काम और मनोरंजन के लिए भी इंटरनेट पर निर्भर हैं। आने वाले दिनों में अगर कंपनियों ने अपने दाम और बढ़ाए तो ग्राहकों का गुस्सा फूट सकता है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। हम आगे भी आपको बताएंगे कि टेलीकॉम बाजार में क्या नए बदलाव आ रहे हैं और आम जनता को इससे क्या राहत मिल सकती है।
रीचार्ज कराने से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी अपने फोन का अगला रिचार्ज कराने की सोच रहे हैं तो कुछ बातों का खास ख्याल रखें। सबसे पहले अपने पिछले महीने के डेटा इस्तेमाल की जांच करें। कई बार हम ऐसा प्लान चुन लेते हैं जिसकी हमें जरूरत ही नहीं होती है। हमेशा अपनी जरूरत के हिसाब से ही छोटे या बड़े पैक का चुनाव करें। कंपनियों के लुभावने विज्ञापनों के चक्कर में न आएं और हमेशा सही कीमत वाले प्लान ही चुनें। समझदारी से किया गया चुनाव आपके हर महीने के हजारों रुपये बचा सकता है।







